व्यायाम सेहत के लिए बहुत मददगार है। वैज्ञानिकों ने पाया है कि कभी-कभी की जाने वाली छोटी-सी कसरत ब्रेन के प्री-फ्रंटल एरिया की ओर ब्लड और ऑक्सीजन का फ्लो बढ़ाती है। इससे सेल्फ कंट्रोल में बड़ी मदद मिलती है।
अटेंशन हाइपर एक्टिविटी डेफिसिट डिसऑर्डर (एडीएचडी) और ऑटिज्म जैसी दिमाग से जुड़ी बीमारियों का इलाज करने में कसरत काफी उपयोगी है। यह डिमेंशिया को रोकने में भी लाभदायक है। ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि वैज्ञानिकों ने शारीरिक कसरत के दिमाग पर पड़ने वाले असर के आंकड़ों का विश्लेषण किया। इसमें दिमाग के मुख्य फंक्शन जैसे स्मरण शक्ति, ध्यान, योजना और फैसले लेने आदि पर कसरत के असर का विश्लेषण किया गया। यह विश्लेषण 6 से 12 साल, 13 से 17 और 18 से 35 साल आयुवर्ग के तीन समूहों पर किए गए 24 अध्ययनों पर आधारित था।
24 में से 19 अध्ययन, जिसमें 586 भागीदार थे, ने कभी-कभी की जाने वाली कसरत और पांच, जिसमें 358 भागीदार थे, में नियमित कसरत का असर शामिल था। यह पाया गया कि नियमित कसरत का ब्रेन के बड़े फंक्शन पर खास असर नहीं देखा गया लेकिन छोटी-छोटी और कभी-कभी की जाने वाली कसरत का ब्रेन के मुख्य फंक्शन पर बड़ा असर नजर आया। विशेष रूप से सेल्फ कंट्रोल में यह बड़ी मददगार साबित होती है।
बच्चों व किशोरों के
लिए महत्वपूर्ण
यह बच्चों और किशोरों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि वेल डेवलप्ड हायर ब्रेन फंक्शन शैक्षणिक उपलब्धियां हासिल करने और दैनिक जीवन के अन्य पहलुओं के लिए बहुत जरूरी है। सेल्फ कंट्रोल पर शारीरिक कसरत के सकारात्मक असर उत्साहवर्धक हैं और अत्यंत प्रासंगिक हैं।
अटेंशन हाइपर एक्टिविटी डेफिसिट डिसऑर्डर (एडीएचडी) और ऑटिज्म जैसी दिमाग से जुड़ी बीमारियों का इलाज करने में कसरत काफी उपयोगी है। यह डिमेंशिया को रोकने में भी लाभदायक है। ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि वैज्ञानिकों ने शारीरिक कसरत के दिमाग पर पड़ने वाले असर के आंकड़ों का विश्लेषण किया। इसमें दिमाग के मुख्य फंक्शन जैसे स्मरण शक्ति, ध्यान, योजना और फैसले लेने आदि पर कसरत के असर का विश्लेषण किया गया। यह विश्लेषण 6 से 12 साल, 13 से 17 और 18 से 35 साल आयुवर्ग के तीन समूहों पर किए गए 24 अध्ययनों पर आधारित था।
24 में से 19 अध्ययन, जिसमें 586 भागीदार थे, ने कभी-कभी की जाने वाली कसरत और पांच, जिसमें 358 भागीदार थे, में नियमित कसरत का असर शामिल था। यह पाया गया कि नियमित कसरत का ब्रेन के बड़े फंक्शन पर खास असर नहीं देखा गया लेकिन छोटी-छोटी और कभी-कभी की जाने वाली कसरत का ब्रेन के मुख्य फंक्शन पर बड़ा असर नजर आया। विशेष रूप से सेल्फ कंट्रोल में यह बड़ी मददगार साबित होती है।
बच्चों व किशोरों के
लिए महत्वपूर्ण
यह बच्चों और किशोरों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि वेल डेवलप्ड हायर ब्रेन फंक्शन शैक्षणिक उपलब्धियां हासिल करने और दैनिक जीवन के अन्य पहलुओं के लिए बहुत जरूरी है। सेल्फ कंट्रोल पर शारीरिक कसरत के सकारात्मक असर उत्साहवर्धक हैं और अत्यंत प्रासंगिक हैं।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें