गुरुवार, 31 अक्टूबर 2013

जंक फूड जेनरेशन

बेहतर खानपान से ही अच्छी सेहत मिलती है, इस मूलमंत्र को लोग पढ़ते हैं, सुनते हैं लेकिन बहुत कम है, जो इस पर अमल भी करते हैं। रिसर्च बताती है कि खासतौर टीनएजर्स इस मुद्दे को लेकर ज्यादा गंभीर नहीं हैं।
अमेरिका के  नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ ने किशोरों के खानपान की आदतों पर शोध  कर इस बात का पता लगाया है कि वे फल और सब्जियों की जगह जंक फूड खाकर अपना पेट   भरते हैं। 11 साल से 16 साल के दस हजार किशोरों पर की गई इस रिसर्च में यह बात सामने आई कि 74 प्रतिशत सेहतमंद भोजन नहीं खाते। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन का कहना है कि स्कूल जाने वाली किशोरियों को दिन में एक बार डेढ़ कप फल और ढाई कप हरी सब्जियां जरूर खानी चाहिए। लड़कों को इससे अधिक मात्रा में इन चीजों को खाना आवश्यक है। एक कप लगभग मध्यम आकार के सेब, आठ स्ट्रॉबेरी, 12 छोटे गाजर या एक बड़े टमाटर के पोषण जितना होता है। जंक फूड खाने वाले इन टीनएजर्स में कुपोषण, तनाव और अन्य परेशानियां होती हैं। इसके कारण पीठ में दर्द और चक्कर जैसे लक्षण नजर आते हैं।  अध्ययन के दौरान यह जानने का प्रयास भी किया गया कि वे हर दिन कितनी एक्सरसाइज करते हैं। इसमें पाया गया कि लगभगआधे किशोर-किशोरी ही ऐसे थे जो हफ्ते में पांच या उससे अधिक  दिन व्यायाम करते हैं। शोधकर्ता  आयनॉटी का कहना है कि टीनएजर्स को घर से स्कूल पैदल या साइकिल से जाना चाहिए और अधिक  से अधिक  ताजा फल और सब्जियां खानी चाहिए।  

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