वैज्ञानिकों ने एक ऐसा अतिसूक्ष्म (नैनो) कैप्सूल तैयार किया है, जो शरीर में कैंसरग्रस्त कोशिकाओं को जड़ से खत्म कर देगा। इतना ही नहीं यह शरीर की स्वस्थकोशिकाओं को बिना नुकसान पहुंचाए, ट्यूमर को धीरे-धीरे छोटा कर देगा।
यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के श्ाोधकर्ताओं ने एक बहुत ही सूक्ष्म आकार का कैप्सूल खोल बनाया है, जिसके अंदर कैंसरग्रस्त कोशिकाओं को मारने वाला प्रोटीन रखा जाएगा। कैप्सूल का यह खोल शरीर में जाकर नष्ट हो जाता है। उसमें रखा प्रोटीन कैंसरग्रस्त कोशिकाओं को नष्ट करता है और ट्यूमर में वृद्धि को रोकता है। यी टैंग के नेतृत्व में एक टीम ने पानी में घ्ाुल जाने वाले पॉलीमर से खोल का निर्माण्ा किया है। 100 नैनोमीटर आकार का यह खोल सबसे सूक्ष्म जीवाण्ाु के आकार से भी आधा है। इससे स्वस्थ्ा कोशिकाओं को किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचता। साथ्ा ही इस प्रक्रिया से कैंसर की जीनथेरेपी से उत्पन्न् अनुवांश्ािकी तब्दीली और कीमोथेरेपी के दौरान स्वास्थ्य पर पड़ने वाले बुरे प्रभावों का खतरा नहीं रहेगा। कैंसरग्रस्त कोशिकाओं को मारने वाला तत्व एपोप्टिन एक तरह का प्रोटीन है, जो पक्षियों में पाया जाता है।
यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के श्ाोधकर्ताओं ने एक बहुत ही सूक्ष्म आकार का कैप्सूल खोल बनाया है, जिसके अंदर कैंसरग्रस्त कोशिकाओं को मारने वाला प्रोटीन रखा जाएगा। कैप्सूल का यह खोल शरीर में जाकर नष्ट हो जाता है। उसमें रखा प्रोटीन कैंसरग्रस्त कोशिकाओं को नष्ट करता है और ट्यूमर में वृद्धि को रोकता है। यी टैंग के नेतृत्व में एक टीम ने पानी में घ्ाुल जाने वाले पॉलीमर से खोल का निर्माण्ा किया है। 100 नैनोमीटर आकार का यह खोल सबसे सूक्ष्म जीवाण्ाु के आकार से भी आधा है। इससे स्वस्थ्ा कोशिकाओं को किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचता। साथ्ा ही इस प्रक्रिया से कैंसर की जीनथेरेपी से उत्पन्न् अनुवांश्ािकी तब्दीली और कीमोथेरेपी के दौरान स्वास्थ्य पर पड़ने वाले बुरे प्रभावों का खतरा नहीं रहेगा। कैंसरग्रस्त कोशिकाओं को मारने वाला तत्व एपोप्टिन एक तरह का प्रोटीन है, जो पक्षियों में पाया जाता है।

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