शनिवार, 2 नवंबर 2013

जीवन की संजीवनी है खुशी

किसी ने सच ही कहा है कि खुश रहना हजार परेशानियों का हल है। जब आप खुश रहते हैं तो जीवन में अपार संभावनाएं दिखाई देती हैं और किसी भी तरह की चुनौती का सामना करने में आप सक्षम रहते हैं। मगर नाखुश व्यक्ति के हिस्से में सिर्फ दुख और परेशानियां ही आती हैं। कई शोधों में भी यह बात सिद्ध हो चुकी हैं कि खुश रहने से व्यक्ति के आसपास का माहौल भी खुशनुमा हो जाता है। इसलिए खुशी जीवन की संजीवनी से कम नहीं है, जिसे संभालकर रखा जाना जरूरी है। इसकी वजह से न सिर्फ आपके स्वभाव में परिवर्तन आता है, बल्कि आपकी मानसिक स्थिति इतनी अनुकूल रहती है जो आपको समय-बेसमय निर्णय लेने में मदद करती है। छोटी-छोटी बातों से हमें बड़ी-बड़ी खुशियां हासिल हो सकती हैं, सिर्फ जरूरत है इसे महसूस करने की। एक नए अध्ययन में कहा गया है कि अगर किसी का बचपन खुशियों से भरा हो तो उसे जिंदगी में आने वाली चुनौतियों का सामना करने में आसानी होती है, लेकिन अगर
किसी बच्चे के बचपन में
खुशियां कम हो तो ऐसे बच्चे आगे चलकर चिड़चिड़े और भौतिकवादी बन जाते हैं।
प्रसिद्ध शोध पत्रिका 'लाइव साइंस" में प्रकाशित शोध के अनुसार नाखुश बच्चे, खुश रहने वाले बच्चों की तुलना में ज्यादा भौतिकवादी और चिड़चिड़े होते हैं।
क्या कहता है शोध 
नीदरलैंड के एम्सटर्डम स्कूल ऑफ कम्युनिकेशन रिसर्च की शोधकर्ता सुजैन ओप्री ने इस शोध के जरिए पता लगाया कि जो बच्चे अपनी जिंदगी से खुश नहीं होते, वे समय के साथ-साथ रिश्तों और भावनाओं की अपेक्षा भौतिक सुख-सुविधाओं को ज्यादा तरजीह देने लगते हैं।
विज्ञापनों का भी योगदान 
शोध के अनुसार नाखुश बच्चों के भौतिकवादी बनने के पीछे कम खुशी के साथ ही विज्ञापन भी एक वजह है। विज्ञापन देखकर नाखुश बच्चों को यह लगता है कि अगर उनके पास सुख-सुविधा ज्यादा रहेगी तो वे खुश हो सकते हैं। खुश रहने के लिए वे ज्यादा भौतिकवादी बन जाते हैं। इससे पहले यह माना जाता था कि भौतिकवादी बच्चे बड़े होने पर नाखुश रहते हैं लेकिन नए शोध से पता चला है कि बच्चे पहले नाखुश होते हैं और यही कारण उन्हें भौतिकवादी बनाता है।  

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