चैत्र प्रतिपदा यानी हिंदू नववर्ष की शुरुआत । हिंदू संस्कृति में नववर्ष की शुरुआत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से होती है और गुरुवार को सभी इस नववर्ष को मनाएंगे। प्रार्थना, आराधना और नए संकल्पों का यह पर्व हर व्यक्ति को जीवन में नई शुरुआत करने का एक और मौका देता है। इसी को ध्यान में रखते हुए आज हम प्रार्थना और उस पर किए वैज्ञानिक अनुसंधान के बारे जानते हैं।
यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया में हाल ही में एक शोध में पाया गया कि धार्मिक प्रवृत्ति के लोगों में बीमारियों की आशंका कम होती है। उनका मानना है कि प्रार्थना में वह शक्ति है, जो अच्छी-अच्छी दवाइयों में नहीं मिलेगी।
तनाव दूर करने में सहायक
आज की भागमभाग भरी जिंदगी में हर एक के हिस्से में तनाव (स्ट्रेस) भी शामिल हो गया। बच्चों से लेकर बड़ों तक कोई भी इस तनाव से अछूता नहीं है। किसी को थोड़ा तनाव है, तो किसी को बहुत ज्यादा, और सब इससे अपने-अपने स्तर पर निपटने का प्रयास करते रहते हैं। जिसमें व्यायाम से लेकर डॉक्टरी सलाह तक शामिल होती है। मगर इन सबके अलावा भी एक उपाय है, जो तनाव को आपके पास से छू-मंतर करने में कारगर हो सकता है और वह उपाय है प्रार्थना। अब तो वैज्ञानिक भी प्रार्थना और उससे होने वाले फायदों को मानने लगे हैं।
खुद से पूछिए
इस शोध के बाद हम खुद से यह पूछ सकते हैं कि क्या तनाव में हमने कभी प्रार्थना का सहारा लिया है या नहीं? यदि नहीं लिया तो इसकी शुरुआत अभी से की जा सकती है क्योंकि प्रार्थना से न सिर्फ तनाव का स्तर कम होता है, बल्कि यह कई बीमारियों से बचाने में भी मददगार साबित होती है। इस नए शोध में दावा किया गया है कि प्रार्थना मन के साथ-साथ संपूर्ण शरीर को भी स्वस्थ रखती है। इससे ब्लड प्रेशर, अवसाद, एंग्जाइटी जैसे कई विकारों पर आसानी से नियंत्रण किया जा सकता है। केवल इतना ही नहीं प्रार्थना उम्र के असर को भी आपके चेहरे से छिपा सकती है, ऐसा शोधकर्ता मानने लगे हैं।
सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है
नियमित रूप से पूजा-प्रार्थना करने से मन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। आज के समय की अनियमित जीवन शैली की वजह से शरीर रोगों की खान बनता जा रहा है, मगर ऐसे में प्रार्थना को अपने जीवन में नियमित रूप से शामिल करने से निश्चित ही बदलाव महसूस किया जा सकता है।
मन से किया जाए
प्रार्थना का सकारात्मक प्रभाव देखने के लिए जरूरी है कि उसे सच्चे मन से किया जाए। सच्चे मन से की गई प्रार्थना हमेशा पूरी होती है। प्रार्थना व्यक्ति के आसपास एक ऐसा 'ऑरा" बनाती है, जो बीमारियों के खिलाफ रक्षा कवच का कार्य करता है।
प्रार्थना में समाए ढेरों लाभ
यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया में हाल ही में एक शोध में पाया गया कि धार्मिक प्रवृत्ति के लोगों में बीमारियों की आशंका कम होती है। उनका मानना है कि प्रार्थना में वह शक्ति है, जो अच्छी-अच्छी दवाइयों में नहीं मिलेगी।
तनाव दूर करने में सहायक
आज की भागमभाग भरी जिंदगी में हर एक के हिस्से में तनाव (स्ट्रेस) भी शामिल हो गया। बच्चों से लेकर बड़ों तक कोई भी इस तनाव से अछूता नहीं है। किसी को थोड़ा तनाव है, तो किसी को बहुत ज्यादा, और सब इससे अपने-अपने स्तर पर निपटने का प्रयास करते रहते हैं। जिसमें व्यायाम से लेकर डॉक्टरी सलाह तक शामिल होती है। मगर इन सबके अलावा भी एक उपाय है, जो तनाव को आपके पास से छू-मंतर करने में कारगर हो सकता है और वह उपाय है प्रार्थना। अब तो वैज्ञानिक भी प्रार्थना और उससे होने वाले फायदों को मानने लगे हैं।
खुद से पूछिए
इस शोध के बाद हम खुद से यह पूछ सकते हैं कि क्या तनाव में हमने कभी प्रार्थना का सहारा लिया है या नहीं? यदि नहीं लिया तो इसकी शुरुआत अभी से की जा सकती है क्योंकि प्रार्थना से न सिर्फ तनाव का स्तर कम होता है, बल्कि यह कई बीमारियों से बचाने में भी मददगार साबित होती है। इस नए शोध में दावा किया गया है कि प्रार्थना मन के साथ-साथ संपूर्ण शरीर को भी स्वस्थ रखती है। इससे ब्लड प्रेशर, अवसाद, एंग्जाइटी जैसे कई विकारों पर आसानी से नियंत्रण किया जा सकता है। केवल इतना ही नहीं प्रार्थना उम्र के असर को भी आपके चेहरे से छिपा सकती है, ऐसा शोधकर्ता मानने लगे हैं।
सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है
नियमित रूप से पूजा-प्रार्थना करने से मन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। आज के समय की अनियमित जीवन शैली की वजह से शरीर रोगों की खान बनता जा रहा है, मगर ऐसे में प्रार्थना को अपने जीवन में नियमित रूप से शामिल करने से निश्चित ही बदलाव महसूस किया जा सकता है।
मन से किया जाए
प्रार्थना का सकारात्मक प्रभाव देखने के लिए जरूरी है कि उसे सच्चे मन से किया जाए। सच्चे मन से की गई प्रार्थना हमेशा पूरी होती है। प्रार्थना व्यक्ति के आसपास एक ऐसा 'ऑरा" बनाती है, जो बीमारियों के खिलाफ रक्षा कवच का कार्य करता है।
प्रार्थना में समाए ढेरों लाभ
- प्रार्थना से मन को शांति और शक्ति मिलती है और नेगेटिव बातों से दूर रहा जा सकता है।
- वैज्ञानिकों का मानना है कि प्रार्थना से शरीर में ऐसे हार्मोन्स का स्राव होता है, जिससे रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
- प्रार्थना से स्मरण शक्ति बढ़ती है और यह क्रोध पर नियंत्रण रखने में भी मदद दिलाती है।

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