शनिवार, 2 नवंबर 2013

डायबिटीज को कंट्रोल करे बैक्टीरिया!

 बैक्टीरिया शरीर में स्वास्थ्यगत समस्याओं का कारण बनते हैं। इसी तरह पेट में पाया जाने वाला एक बैक्टीरिया अल्सर और गैस्ट्रिक कैंसर की वजह बनता है लेकिन वास्तव में यह बैक्टीरिया डायबिटीज को नियंत्रित करने के लिए फायदेमंद है। एक नए अध्ययन में यह बात सामने आई है।
वर्जीनिया बायोइन्फॉर्मेटिक्स इंस्टीट्यूट ऑफ वर्जीनिया टेक के इम्यूनोलॉजिस्ट्स के अनुसार अध्ययन में यह निष्कर्ष निकला है कि गैस्ट्रिक कैंसर और पेप्टिक अल्सर के लिए जिम्मेदार बैक्टीरिया पेट के इकोसिस्टम को बैलेंस करता है और शरीर के वजन को नियंत्रित करता है और ग्लुकोज को टॉलरेट करता है। बीमारी रोकता भी है!
वर्जीनिया टेक में न्यूट्रिशनल इम्युनोलॉजी एंड मॉलेक्यूलर मेडिसीन लैबोरेटरी और सेंटर फॉर मॉडलिंग इम्युनिटी टू एंट्रिक पैथोजेंस के निदेशक जोसेफ बासागैन्या-रिएरा का कहना है कि बैक्टीरिया हेलिकोबैक्टर पायलोरी गैस्ट्रिक माइक्रोबायोटा का प्रमुख सदस्य है और इसने दुनिया की आधी आबादी को संक्रमित कर रखा है। इस बैक्टीरिया के संक्रमण से कई बीमारियां जुड़ी हुई हैं लेकिन यह क्रॉनिक इन्फ्लैमेटरी, एलर्जिक या ऑटोइम्युनी डिसीजेज को कंट्रोल करता है।
अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि प्रयोग के दौरान यह पहली बार पता चला है कि बैक्टीरिया हेलिकोबैक्टर पायलोरी ओबेसिटी और डायबिटीज को नियंत्रित करने में अत्यंत लाभकारी है। यह प्रयोग चूहों पर किया गया था। जर्नल पीएलओएस वन में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार बैक्टीरिया हेलिकोबैक्टर पायलोरी से संक्रमित चूहों में डायबिटीज के कारण बनने वाले तत्वों से संघर्ष अधिक देखा गया।
ओवरयूज से बचें
अध्ययन में सुझाव दिया गया है कि एंटीबायोटिक्स के ओवरयूज से बेनेफिशियल बैक्टीरिया नष्ट हो सकते हैं और इस कारण मोटापा, एलर्जी, इन्फ्लैमेटरी बावेल डिसीज और अस्थमा जैसी बीमारियां हो सकती हैं।
इस बात पर भी निर्भर
अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि संक्रमण लाभदायक है या नुकसानदेह, यह इस बात पर निर्भर करता है कि बैक्टीरिया हेलिकोबैक्टर पायलोरी के जेनेटिक मैकअप और मरीज के इम्यून रिस्पांस के बीच कितना इंटरएक्शन है।
एक अध्ययन यह भी
एक अन्य अध्ययन में यह बात भी सामने आई है कि पेट के निचले हिस्से में पाए जाने वाले गुड बग्स न केवल अच्छी सेहत का कारण बनते हैं बल्कि डायबिटीज को दूर रखने में भी मददगार होते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटॅ के सिक चिल्ड्रंस हॉस्पिटल के जेयने डांस्का और क्लीनिक फॉर विसेरल सर्जरी एंड मेडिसीन, यूनिवर्सिटी ऑफ बर्न के एंड्र्यू मॅकफेरसन के नेतृत्व में अनुसंधान टीम ने यह निष्कर्ष निकाला है।  

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