रात में सोते समय कमरे की रोशनी का प्रभाव भी नींद पर पड़ता है। इसलिए अगर आपकी नींद भी ज्यादा डिस्टर्ब होती है तो अपने कमरे के नाइट बल्ब को भी बदलने की कोशिश की जा सकती है। एक नए शोध में यह बात सामने आई है कि नीली रोशनी का नाइट लैंप न सिर्फ नींद पर असर डालता है बल्कि इसका असर व्यक्ति के मूड पर भी पड़ता है, जो डिप्रेशन का कारण बन सकता है। हालांकि रात में लाल लाइट के असर से डिप्रेशन के लक्षण कम देखे गए।नए शोध में बताया गया है कि कैसे नाइट लैंप के कलर्स व्यक्ति के मूड को प्रभावित कर सकते हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि ब्लू लाइट का सबसे अधिक प्रभाव मूड संबंधित गतिविधियों पर पड़ता है और यही बात लगभग सफेद रंग में भी शामिल होती है।
वहीं इस शोध में लाल रंग के प्रकाश से इस तरह के कोई लक्षण नहीं देखे गए। इसमें ब्रेन का संबंध डिप्रेशन वाले बिंदुओं से कम होता है जबकि वहीं ब्लू और व्हाइट लाइट में तुलनात्मक रूप से ज्यादा देखने को मिलता है।
'साइंस डेली" की रिपोर्ट के अनुसार इस शोध से मिले नतीजे उन लोगों के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण हैं, जो नाइट शिफ्ट्स में काम करते हैं क्योंकि वे मूड डिस्ऑर्डर की समस्या से ज्यादा ग्रसित रहते हैं। ओहियो यूनिवर्सिटी में न्यूरोसाइंस और साइकोलॉजी इस शोध की को-ऑथर रेंडी नेल्सन ने बताया कि हमने नाइट-शिफ्ट्स वाले वर्कर्स के लिए लाल रोशनी वाले प्रकाश का उपयोग करने पर जोर दिया। जिसमें अधिकांश मामलों में इस रोशनी के उन पर कोई नेगेटिव इफेक्ट नहीं देखे गए बनिस्पत व्हाइट लाइट के। यह अध्ययन 'जर्नल ऑफ न्यूरोसाइंस" में प्रकाशित किया गया है।
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