आमतौर पर कोई यह कहता है कि उसे पास का दिखाई नहीं देता, या कोई यह कहता है कि उसे दूर का दिखाई नहीं देता। इसके भी
कारण होते हैं। हर व्यक्ति में इससे जुड़े कुछ जीन होते हैं, जिनके कारण अलग-अलग परिणाम सामने आते हैं। कुछ लोगों का मानना यह होता है कि यह सिस्टम पीढ़ी दर पीढ़ी चलता है, जबकि ऐसा
बिल्कुल नहीं है।
वैज्ञानिकों ने कुछ ऐसे नए जीन की खोज कर ली है जो किसी भी व्यक्ति की दूरदृष्टि में सुधार लाने में सहायक हो सकते हैं। लंदन के किंग्स कॉलेज में जेनेटिक एपिडिमियोलॉजी के प्रोफेसर क्रिस हेमंड कहते हैं- हम अब तक यह जानते थे कि दूरदृष्टि या निकटदृष्टि (माइओपिया) की शिकायत पीढ़ियों से चलती है, लेकिन नई खोज के अनुसार अब ऐसा नहीं है। इसके पीछे कुछ जेनेटिक कारण होते हैं। उनके शोध में यह बात सामने आई है कि कुछ जीन का एक समूह होता है जिनसे दूरदृष्टि और निकटदृष्टि का कारण उत्पन्न् होता है।
प्रोफेसर हेमंड के शोध की रिपोर्ट जर्नल नेचर जेनेटिक्स में प्रकाशित की गई है। इसके मुताबिक 24 जीन ऐसे होते हैं जो निकट या दूरदृष्टि की रिस्क को 10 गुना अधिक बढ़ा देते हैं। इस शोध को अंजाम तक पहुंचाने के लिए यूरोप, एशिया, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के वैज्ञानिकों ने मिलकर काम किया है। उनका उद्देश्य माइओपिया के कारण को जानना था जो पूरे विश्व में एक समस्या भी है।
शोध के निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए वैज्ञानिकों ने 45,000 लोगों के जेनेटिक और रफ्रेक्टिव इरर डेटा कलेक्ट किए और पाया कि दूर और निकट दृष्टि के कारक 24 जीन होते हैं। माइओपिया की समस्या से यूरोप की 30 प्रतिशत और एशिया की 80 प्रतिशत आबादी जूझ रही है। आश्चर्य की बात यह है कि एशियाई और यूरोपीय नागरिकों के जीन के समूह में कोई विशेष अंतर नहीं पाया गया।
माइओपिया का प्रमुख कारण आंखों की लंबाई होती है। अकसर रोशनी या लाइट रेटिना के ठीक सामने पड़ती है लेकिन दूसरे हिस्सों में नहीं पहुंचती। इसके परिणामस्वरुप दृश्य धुंधला जाता है और इसका उपाय हम ग्लासेस, कान्टैक्ट लेंस या फिर सर्जरी के जरिए करते हैं।
कारण होते हैं। हर व्यक्ति में इससे जुड़े कुछ जीन होते हैं, जिनके कारण अलग-अलग परिणाम सामने आते हैं। कुछ लोगों का मानना यह होता है कि यह सिस्टम पीढ़ी दर पीढ़ी चलता है, जबकि ऐसा
बिल्कुल नहीं है।
वैज्ञानिकों ने कुछ ऐसे नए जीन की खोज कर ली है जो किसी भी व्यक्ति की दूरदृष्टि में सुधार लाने में सहायक हो सकते हैं। लंदन के किंग्स कॉलेज में जेनेटिक एपिडिमियोलॉजी के प्रोफेसर क्रिस हेमंड कहते हैं- हम अब तक यह जानते थे कि दूरदृष्टि या निकटदृष्टि (माइओपिया) की शिकायत पीढ़ियों से चलती है, लेकिन नई खोज के अनुसार अब ऐसा नहीं है। इसके पीछे कुछ जेनेटिक कारण होते हैं। उनके शोध में यह बात सामने आई है कि कुछ जीन का एक समूह होता है जिनसे दूरदृष्टि और निकटदृष्टि का कारण उत्पन्न् होता है।प्रोफेसर हेमंड के शोध की रिपोर्ट जर्नल नेचर जेनेटिक्स में प्रकाशित की गई है। इसके मुताबिक 24 जीन ऐसे होते हैं जो निकट या दूरदृष्टि की रिस्क को 10 गुना अधिक बढ़ा देते हैं। इस शोध को अंजाम तक पहुंचाने के लिए यूरोप, एशिया, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के वैज्ञानिकों ने मिलकर काम किया है। उनका उद्देश्य माइओपिया के कारण को जानना था जो पूरे विश्व में एक समस्या भी है।
शोध के निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए वैज्ञानिकों ने 45,000 लोगों के जेनेटिक और रफ्रेक्टिव इरर डेटा कलेक्ट किए और पाया कि दूर और निकट दृष्टि के कारक 24 जीन होते हैं। माइओपिया की समस्या से यूरोप की 30 प्रतिशत और एशिया की 80 प्रतिशत आबादी जूझ रही है। आश्चर्य की बात यह है कि एशियाई और यूरोपीय नागरिकों के जीन के समूह में कोई विशेष अंतर नहीं पाया गया।
माइओपिया का प्रमुख कारण आंखों की लंबाई होती है। अकसर रोशनी या लाइट रेटिना के ठीक सामने पड़ती है लेकिन दूसरे हिस्सों में नहीं पहुंचती। इसके परिणामस्वरुप दृश्य धुंधला जाता है और इसका उपाय हम ग्लासेस, कान्टैक्ट लेंस या फिर सर्जरी के जरिए करते हैं।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें