बुधवार, 30 अक्टूबर 2013

लंबी उम्र की कुंजी हो सकती है वेजिटेरियन डाइट

 अगर आप भी वेजिटेरियन डाइट लेते हैं तो खुश हो जाइए....क्योंकि यह वेजिटेरियन डाइट लंबा और हेल्दी जीवन जीने की कुंजी साबित हो सकती है। एक नए अध्ययन में बताया गया है कि वेजिटेरियन डाइट्स का संबंध डेथ रेट्स कम करने से भी है। लगभग 70 हजार से अधिक लोगों पर किए अध्ययन में यह बात सामने आई है। इसमें महिलाओं और पुरुषों में अधिक फेवरेबल रिजल्ट्स प्राप्त हुए हैं और इसे स्वास्थ्य के लिए ज्यादा बेनिफिशियल माना गया है। इस शोध में डाइट और मोर्टेलिटी के बीच संभावित रिलेशनशिप को देखा गया जो शोध का एक सकारात्मक पक्ष है। शोधकर्ताओं का कहना है कि वेजिटेरियन डाइट्स का कई तरह की क्रॉनिक डिजीज जैसे हाइपरटेंशन, मेटाबोलिक सिंड्रोम, डाइबिटीज मेलिटस और इस्चेमिक हार्ट डिजीज (आईएचडी) का खतरा कम होने से सीधा संबंध होता है।  कैलिफोर्निया की लोमा लिंडा यूनिवर्सिटी की मिशेल जे.ऑरलिक और उनके सहयोगियों ने अपने शोध में 73,308 पुरुष और महिलाओं के समूहों पर यह परीक्षण किया और कारण जानने की कोशिश की।
पांच भागों में बांटे प्रतिभागी
शोधकर्ताओं ने डाइटरी पैशेन्ट्स से प्रश्नावली के आधार पर कैटगरी डिवाइड करते हुए यह निष्कर्ष निकाला। प्रतिभागियों को पांच भागों में बांटा गया। इनमें नॉनवेजिटेरियन, सेमी-वेजिटेरियन, पेस्को-वेजिटेरियन (सीफूड समेत), लैक्टो-ओवो-वेजिटेरियन (डेयरी और एग प्रॉडक्ट्स समेत) और वेगन (सभी एनिमल प्रोडक्ट्स समेत) शामिल थे। इस शोध में देखा गया कि वेजिटेरियन ग्रुप्स के लोगों की आयु ज्यादा थी, वे ज्यादा एजुकेटेड और ज्यादातर शादीशुदा थे। ये अल्कोहल का सेवन और स्मोकिंग भी कम करते थे। साथ ही अपनी दिनचर्या को सुचारू ढंग से चलाने के लिए इनमें एक्सरसाइज का भी रूटीन देखा गया। इन तथ्यों से पता चलता है कि वेजिटेरियन डाइटरी पैटर्न लोगों को सात्विक भावना के साथ हेल्दी जीवन देता है, जो उनकी लंबी उम्र का राज हो सकती है।
कैसे किया अध्ययन
एक समूह के लोगों को एक दिन तक इस तरह से लोगों के चेहरे दिखाते हुए उनकी पहचान बताने के लिए कहा गया वहीं अन्य समूह का यह क्रम चार दिन तक चला। इस शोध में पता चला कि महिलाएं, पुरुषों की अपेक्षा किसी भी चीज को देखने में अपना पूरा कॉन्सन्ट्रेशन करती हैं जबकि पुरुष ऐसा नहीं करते। इस कॉन्सन्ट्रेशन के कारण सारी पिक्चर्स उनके दिमाग के सुप्त भाग में पहुंच जाती है, जो उन्हें चेहरों को भूलने नहीं देता। यह शोध 'जर्नल साइकोलॉजिकल साइंस" में प्रकाशित किया गया। 

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