अधिकांश बच्चों की खाने को लेकर ढेरों चॉइस होती हैं। इस चॉइस में सबसे पहले तो वे फल और सब्जियों के नाम पर मुंह फेरने लगते हैं। ऐसे में पौष्टिक भोजन की उनसे लगातार दूरी बनी रहती है। माता-पिता के लाख जतन करने के बावजूद भी बच्चों को पौष्टिक आहार देना कठिन हो जाता है। बच्चों को संतुलित भोजन करने की आदतें डालने में नहीं होगी दिक्कतें जरूरी है कि पैरेन्ट्स बच्चों के खान-पान पर बराबर ध्यान दें। जिन माता-पिता को बच्चों के आहार को लेकर चिंता रहती है, उन लोगों के लिए वेस्ट यार्कशायर की लीड्स यूनिवर्सिटी का यह अध्ययन काफी मदद कर सकता है। इस अध्ययन में बताया गया है कि जिन घरों में परिवार के सभी सदस्य एकसाथ मिल बैठकर भोजन करते हैं, उन घरों के बच्चों को सब तरह के खाने की आदत हो जाती है बनिस्बत उन बच्चों के जिनके परिवार में सब अलग-अलग खाना खाते हैं।
अध्ययन में क्या पाया
लीड्स यूनिवर्सिटी के इस अध्ययन में पाया गया कि जो माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्य बच्चों के साथ मिलकर खाना खाते हैं, वे बच्चे खाने को लेकर ज्यादा नाक-भौंह नहीं सिकोड़ते हैं। इसका सीधा-सा अर्थ यही निकलता है कि साथ में बैठकर भोजन करने से जो खाना बड़े खाते हैं, उसे छोटों की भी खाने की आदत हो जाती है। इसके अलावा खाने के तौर-तरीके और अदब भी बच्चे बड़ों से ही सीखते हैं। केवल इतना ही नहीं एक ही डाइनिंग पर बैठे घर के बड़े लोग खाना खाने की जिन हिदायतों को देते हैं, उन्हें बच्चों को मानना भी पड़ता है। यह सीख उनके जीवन में हमेशा के लिए आ जाती है और वे भी अपने से छोटों को सिखाने के काबिल हो जाते हैं।
कैसे किया अध्ययन
शोधकर्ताओं ने यह अध्ययन तकरीबन 25 से अधिक परिवारों पर किया गया। लगभग एक महीने तक इन परिवार के लोगों और उनकी भोजन करने की गतिविधियों पर नजर रखी गई। इसमें पाया गया कि जिन घरों में सभी एकसाथ भोजन करते थे, वहां के बच्चों को खाने में चॉइस की ज्यादा दिक्कत नहीं थी। इनमें कुछ न्यूक्लियर फैमिली भी शामिल थीं। मगर उन घरों के बच्चों में खाने को लेकर ज्यादा चॉइस देखी गई, जहां सभी लोग अलग-अलग खाना खाते थे और वे बाहर का खाना या फिर जंक फूड खाने पर ज्यादा विश्वास करते थे।
पैरेन्ट्स के लिए हिदायत
यह शोध उन पैरेन्ट्स को हिदायत देता है कि यदि वे अपने बच्चों को अधिक मात्रा में फल-सब्जियां और संतुलित आहार खिलाना चाहते हंै तो वे खुद भी इन आदतों का पालन करें। अगर आप चाहते हैं कि आपके बच्चे भी पौष्टिक भोजन को अपने पसंदीदा फास्ट फूड से ज्यादा तरजीह दें तो इसकी जिम्मेदारी आप ही की है। आपको न सिर्फ उनके साथ खाना खाने के लिए वक्त निकालना पड़ेगा, बल्कि खुद भी उसी तरह का भोजन करना होगा।
कुछ तरकीब भी लगाएं
अक्सर देखा गया है कि बच्चे भोजन के रंग-रूप को ज्यादा तरजीह देते हैं और वे उसी खाने को ज्यादा पसंद करते हैं, जो उन्हें रंग-बिरंगा हो या जो उन्हें देखने में अच्छा लगता हो। ऐसे में जरूरत है मम्मियां कुछ ऐसी तरकीब लगाएं, जिससे सारे पोषक तत्व बच्चों को उसके रंग-बिरंगे खाने में आसानी से मिल जाएं। जैसे बच्चे पालक, मैथी, गाजर, मूली खाना पसंद नहीं करते हैं तो इन सब चीजों को अलग-अलग या एक साथ मैश कर पराठे बना सकते हैं, जिसका स्वाद उसे खाने में अच्छा भी लगेगा और उसके शरीर में पोषक तत्व भी आसानी से चले जाएंगे। इसी तरह विभिन्ना तरह के सूप, मिक्स ज्यूस, दूध नहीं तो दही के व्यंजन या फिर खीर इस तरह के कई उपाय कर और थोड़ा-सा मनाकर बच्चों को इस तरह के खाने को आसानी से खिलाया जा सकता है।
अध्ययन में क्या पाया
लीड्स यूनिवर्सिटी के इस अध्ययन में पाया गया कि जो माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्य बच्चों के साथ मिलकर खाना खाते हैं, वे बच्चे खाने को लेकर ज्यादा नाक-भौंह नहीं सिकोड़ते हैं। इसका सीधा-सा अर्थ यही निकलता है कि साथ में बैठकर भोजन करने से जो खाना बड़े खाते हैं, उसे छोटों की भी खाने की आदत हो जाती है। इसके अलावा खाने के तौर-तरीके और अदब भी बच्चे बड़ों से ही सीखते हैं। केवल इतना ही नहीं एक ही डाइनिंग पर बैठे घर के बड़े लोग खाना खाने की जिन हिदायतों को देते हैं, उन्हें बच्चों को मानना भी पड़ता है। यह सीख उनके जीवन में हमेशा के लिए आ जाती है और वे भी अपने से छोटों को सिखाने के काबिल हो जाते हैं।
कैसे किया अध्ययन
शोधकर्ताओं ने यह अध्ययन तकरीबन 25 से अधिक परिवारों पर किया गया। लगभग एक महीने तक इन परिवार के लोगों और उनकी भोजन करने की गतिविधियों पर नजर रखी गई। इसमें पाया गया कि जिन घरों में सभी एकसाथ भोजन करते थे, वहां के बच्चों को खाने में चॉइस की ज्यादा दिक्कत नहीं थी। इनमें कुछ न्यूक्लियर फैमिली भी शामिल थीं। मगर उन घरों के बच्चों में खाने को लेकर ज्यादा चॉइस देखी गई, जहां सभी लोग अलग-अलग खाना खाते थे और वे बाहर का खाना या फिर जंक फूड खाने पर ज्यादा विश्वास करते थे।
पैरेन्ट्स के लिए हिदायत
यह शोध उन पैरेन्ट्स को हिदायत देता है कि यदि वे अपने बच्चों को अधिक मात्रा में फल-सब्जियां और संतुलित आहार खिलाना चाहते हंै तो वे खुद भी इन आदतों का पालन करें। अगर आप चाहते हैं कि आपके बच्चे भी पौष्टिक भोजन को अपने पसंदीदा फास्ट फूड से ज्यादा तरजीह दें तो इसकी जिम्मेदारी आप ही की है। आपको न सिर्फ उनके साथ खाना खाने के लिए वक्त निकालना पड़ेगा, बल्कि खुद भी उसी तरह का भोजन करना होगा।
कुछ तरकीब भी लगाएं
अक्सर देखा गया है कि बच्चे भोजन के रंग-रूप को ज्यादा तरजीह देते हैं और वे उसी खाने को ज्यादा पसंद करते हैं, जो उन्हें रंग-बिरंगा हो या जो उन्हें देखने में अच्छा लगता हो। ऐसे में जरूरत है मम्मियां कुछ ऐसी तरकीब लगाएं, जिससे सारे पोषक तत्व बच्चों को उसके रंग-बिरंगे खाने में आसानी से मिल जाएं। जैसे बच्चे पालक, मैथी, गाजर, मूली खाना पसंद नहीं करते हैं तो इन सब चीजों को अलग-अलग या एक साथ मैश कर पराठे बना सकते हैं, जिसका स्वाद उसे खाने में अच्छा भी लगेगा और उसके शरीर में पोषक तत्व भी आसानी से चले जाएंगे। इसी तरह विभिन्ना तरह के सूप, मिक्स ज्यूस, दूध नहीं तो दही के व्यंजन या फिर खीर इस तरह के कई उपाय कर और थोड़ा-सा मनाकर बच्चों को इस तरह के खाने को आसानी से खिलाया जा सकता है।

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