एक्सरसाइज हर उम्र के लोगों के स्वास्थ्य के लिए बेहतर नियामत है। एक नए शोध से यह पता चला है कि रेग्युलर एक्सरसाइज किशोरवय लड़कियों के हिंसक व्यवहार को कम करने में मदद कर सकती है। कोलंबिया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने तकरीबन 1,312 स्टूडेंट्स पर यह अध्ययन किया। न्यूयॉर्क के चार शहरों में हाई स्कूल स्टूडेंट्स पर यह सर्वे किया गया। इसके तहत रेग्युलर एक्सरसाइज और हिंसा से संबंधित व्यवहार में संबंध देखा गया।
इस सर्वे के तहत स्टूडेंट्स से पूछा गया कि वे कैसे एक्सरसाइज करते हैं, क्या है कितनी सिट-अप्स करते हैं और पिछले चार सप्ताह में उनका सबसे लंबा दौड़ने का टाइम कितना था। इसके अलावा उन्होंने पिछले कुछ सालों में कौन-सी स्पोर्ट्स एक्टिविटी में भाग लिया। स्टूडेंट्स से यह भी पूछा गया कि वे पिछले 30 दिनों में अपने साथ हथियार के साथ स्कूल गए हैं या फिर पिछले दिनों में यदि उन्होंने किसी और के साथ किसी तरह का संघर्ष किया हो। इस शोध में भाग लेने वाले तीन चौथाई लैटिन अमेरिकी थे और 19 प्रतिशत अश्वेत थे जबकि सारे स्टूडेंट्स में 56 प्रतिशत लड़कियां शामिल थीं।
क्या निकला निष्कर्ष
इस शोध में पाया गया कि जो लड़कियां रेग्युलर एक्सरसाइज करती थीं उनमें हिंसक व्यवहार का स्तर कम पाया गया। वहीं लड़कों में हिंसक व्यवहार और एक्सरसाइज के मध्य कोई संबंध नहीं देखा गया। यह शोध वाशिंगटन में आयोजित पिडिएट्रिक एकेडेमिक सोसाइटीज् (पीएएस) की वार्षिक मीटिंग में पेश
किया गया।
इस सर्वे के तहत स्टूडेंट्स से पूछा गया कि वे कैसे एक्सरसाइज करते हैं, क्या है कितनी सिट-अप्स करते हैं और पिछले चार सप्ताह में उनका सबसे लंबा दौड़ने का टाइम कितना था। इसके अलावा उन्होंने पिछले कुछ सालों में कौन-सी स्पोर्ट्स एक्टिविटी में भाग लिया। स्टूडेंट्स से यह भी पूछा गया कि वे पिछले 30 दिनों में अपने साथ हथियार के साथ स्कूल गए हैं या फिर पिछले दिनों में यदि उन्होंने किसी और के साथ किसी तरह का संघर्ष किया हो। इस शोध में भाग लेने वाले तीन चौथाई लैटिन अमेरिकी थे और 19 प्रतिशत अश्वेत थे जबकि सारे स्टूडेंट्स में 56 प्रतिशत लड़कियां शामिल थीं।
क्या निकला निष्कर्ष
इस शोध में पाया गया कि जो लड़कियां रेग्युलर एक्सरसाइज करती थीं उनमें हिंसक व्यवहार का स्तर कम पाया गया। वहीं लड़कों में हिंसक व्यवहार और एक्सरसाइज के मध्य कोई संबंध नहीं देखा गया। यह शोध वाशिंगटन में आयोजित पिडिएट्रिक एकेडेमिक सोसाइटीज् (पीएएस) की वार्षिक मीटिंग में पेश
किया गया।

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