गुरुवार, 31 अक्टूबर 2013

टॉयफाइड के बाद डाइट करेगी फाइट

टायफॉइड में रोगी के लिए सबसे बड़ी परेशानी का कारण होता है बुखार, लेकिन यह बीमारी आपके पेट को ज्यादा परेशान करती है। इस बीमारी के बाद आपकी लड़ाई में आपकी डाइट ही निभाएगी साथ...
टायफॉइड दरअसल खुद में एक बड़ी बीमारी नहीं है, लेकिन इसमें बरती गई थोड़ी-सी भी लापरवाही इसे वापस बुला सकती है। डॉक्टर्स कहते हैं कि इस बीमारी में अपच और डायरिया होना आम है। इसके अलावा गैस्ट्रोइंटेस्टिनल ट्रैक्ट में इंफेक्शन होने की वजह से कब्जियत भी हो जाती है। ऐसे में डाइट आपको स्वस्थ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके अलावा टॉयफाइड होने के बाद भी डाइट पर प्रॉपर ध्यान दिया जाए तो इस बीमारी के रिलेप्स होने का खतरा कम हो जाता है।
 फल और सब्जियां 
टायफॉइड में भरपूर मात्रा में मौसमी फल और सब्जियां खाएं। इससे बॉडी की इम्यूनिटी बेहतर होती है। हरी सब्जियां, टमाटर और खाने से पाचन क्रिया बेहतर होती है। इस दौरान मट्ठा पीने से आंतें सुचारू रूप से काम करतीं और और पेट भी बेहतर तरीके से काम करता है।
 स्टीम्ड या बेक्ड चीजें 
ऐसी चीजें पचने में ज्यादातर आसान होती हैं, जिससे पेट को आराम मिलता है।
 प्रोटीन  
शरीर की क्षतिग्रस्त कोश्ािकाओं के निर्माण करने का काम प्रोटीन करता है। लेकिन इसकी मात्रा अत्यधिक नहीं होनी। इसके अलावा थोड़ा नमक भी लेना चाहिए क्योंकि उल्टी होने के बाद डायरिया का रिस्क बढ़ जाता है और डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है। टायफॉइड का बुखार जब दूसरे हफ्ते में पहुंचता है तो हाई ग्रेड फीवर सीधे मस्तिष्क पर प्रभाव डालता है और बेहोशी की स्थिति पैदा हो जाती है। इसे ही 'नर्वस फीवर" कहते हैं। ये 'सेलमोनेला" और 'पैरा टाइफी" बैक्टीरिया से फैलता है। इस डिजीज से खांसी, नाक से ब्लीडिंग, बेहोशी जैसी समस्या होती है। इसके बचाव के लिए अब नई वैक्सीन भी आ गई हैं, जिससे जल्दी ठीक हुआ जा सकता है। वैसे थोड़ी-सी लापरवाही जानलेवा भी हो सकती है।
 इन बातों का रखें ध्यान 

  • नॉन-वेजिटेरियन प्रोटीन : नॉनवेजिटेरियन प्रोटीन को न लें क्योंकि ये पचने में आसान नहीं होते।
  • घी :  तली हुई चीजें नहीं खानी चाहिए। घी पचाने में पेट को काफी मेहनत करनी पड़ती है। इससे परेशानी बढ़ जाती है। 
  •  फास्ट फूड : फास्ट फूड में मैदे का काफी इस्तेमाल होता है। मैदा पचने में भारी होता है। इसके अलावा फास्ट फूड में आलू और घी भी काफी मात्रा में उपयोग होता है, जिससे तबीयत बिगड़ने की आशंका बढ़ जाती है।  

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