खाना बर्बाद करना अच्छी आदत नहीं। बच्चों से भी अपेक्षा की जाती है कि वे प्लेट में रखा पूरा खाना खाएं। कई बार उन्हें भूख से अधिक खाने के लिए जोर दिया जाता है, जिससे बच्चा स्वस्थ कम, बीमार अधिक होता है। अमेरिका की मिनेसोटा यूनिवर्सिटी में हुई रिसर्च में यह बात सामने आई कि जिन बच्चों को प्लेट में रखा पूरा खाना खत्म करने की हिदायत दी जाती है, उन्हें भविष्य में ईटिंग डिसऑर्डर होने की आशंका अध्ािक होती है। आगे चलकर ऐसे बच्चों में खाने को लेकर निर्णय लेने की क्षमता विकसित नहीं हो पाती है। यहां तक कि उन्हें इस बात का सही तरीके से पता नहीं चल पाता कि उनका पेट भरा है या नहीं।
प्लेट करो खाली
पीडियाट्रिक्स जर्नल में छपी रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक आधे से अधिक माता-पिता यह उम्मीद करते हैं कि उनके बच्चे प्लेट में खाना न छोड़ें। एक तिहाई संख्या ऐसे माता-पिता की होती है, जो पेट भरने के बाद भी अपने बच्चों को खाने के लिए प्रेरित करते हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह आदत बच्चों की सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकती है। माता-पिता को बच्चों को उतना ही खाने देना चाहिए, जितने में उनका पेट भर जाए। उन्हें भूख से अधिक खाने के लिए प्रेरित नहीं करना चाहिए।
दिमाग पर प्रभाव
शोधकर्ता लिंडा गिलमोर का कहना है कि अभिभावकों को खाने की टेबल पर जरूरी से ज्यादा नियंत्रण नहीं बनाना चाहिए, क्योंकि कई बार ऐनोरेक्सिया जैसे खान-पान संबंधी विकार व्यक्ति के अपने शरीर पर जरूरत से ज्यादा नियंत्रण की वजह से ही जन्म लेते हैं। इस बीमारी में इंसान पर दुबला होने की सनक इस कदर सवार हो जाती है कि उसकी जान खतरे में पड़ जाती है।
बच्चों को तय करने दें
अपेटाइट जर्नल में छपी रिपोर्ट के मुताबिक 85 प्रतिशत पैरेंट्स चाहते हैं कि उनके बच्चे ज्यादा खाएं। इसके लिए बच्चों को तरह-तरह के उपहारों का प्रलोभन भी देते हैं। शोध्ाकर्ताओं का कहना है कि माता-पिता को यह ध्यान रखना जरूरी है कि बच्चे पोषक चीजें खाएं, लेकिन यह बच्चों को ही तय करने दें कि वह कितनी मात्रा में खाना चाहते हैं। पोषक तत्वों से भरपूर जरूरत से अध्ािक भोजन भी बच्चों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
प्लेट करो खाली
पीडियाट्रिक्स जर्नल में छपी रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक आधे से अधिक माता-पिता यह उम्मीद करते हैं कि उनके बच्चे प्लेट में खाना न छोड़ें। एक तिहाई संख्या ऐसे माता-पिता की होती है, जो पेट भरने के बाद भी अपने बच्चों को खाने के लिए प्रेरित करते हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह आदत बच्चों की सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकती है। माता-पिता को बच्चों को उतना ही खाने देना चाहिए, जितने में उनका पेट भर जाए। उन्हें भूख से अधिक खाने के लिए प्रेरित नहीं करना चाहिए।
दिमाग पर प्रभाव
शोधकर्ता लिंडा गिलमोर का कहना है कि अभिभावकों को खाने की टेबल पर जरूरी से ज्यादा नियंत्रण नहीं बनाना चाहिए, क्योंकि कई बार ऐनोरेक्सिया जैसे खान-पान संबंधी विकार व्यक्ति के अपने शरीर पर जरूरत से ज्यादा नियंत्रण की वजह से ही जन्म लेते हैं। इस बीमारी में इंसान पर दुबला होने की सनक इस कदर सवार हो जाती है कि उसकी जान खतरे में पड़ जाती है।
बच्चों को तय करने दें
अपेटाइट जर्नल में छपी रिपोर्ट के मुताबिक 85 प्रतिशत पैरेंट्स चाहते हैं कि उनके बच्चे ज्यादा खाएं। इसके लिए बच्चों को तरह-तरह के उपहारों का प्रलोभन भी देते हैं। शोध्ाकर्ताओं का कहना है कि माता-पिता को यह ध्यान रखना जरूरी है कि बच्चे पोषक चीजें खाएं, लेकिन यह बच्चों को ही तय करने दें कि वह कितनी मात्रा में खाना चाहते हैं। पोषक तत्वों से भरपूर जरूरत से अध्ािक भोजन भी बच्चों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

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