सेहतमंद बने रहने में खानपान का महत्वपूर्ण योगदान होता है। वैज्ञानिकों ने नए अनुसंधान में पाया है कि अगर आहार की आदतों में थोड़ा-सा भी बदलाव आ जाए तो उसका सीधा असर जीन पर होता है। इसका सीधे-सीधे व्यक्ति के स्वास्थ्य और मनोविज्ञान पर असर होता है।
आहार आदतों में परिवर्तन आपके जीन को प्रभावित कर सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि आहार संबंधी परिवर्तन जीन के स्वरूप में बदलाव से जुड़ा होता है जो कि संपूर्ण सेहत और शरीर विज्ञान को प्रभावित कर सकता है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि स्वास्थ्य को लेकर जागरूक अधिकांश लोग भी समय-समय पर जंक फूड के मोहपाश से मुक्त नहीं हो पाते हैं।
स्वास्थ्य पर गहरा असर
मैसाचुसेट्स यूनिवर्सिटी की मेडिकल इकाई (यूएमएमएस) के शोध से जुड़े वैज्ञानिकों के मुताबिक किसी खास मौके, शादी समारोह, जन्मदिन की पार्टियां या ऐसे ही अन्य किसी मौके पर ही लिया गया बहुत थोड़ा-सा भी मनपसंद भोजन जीन के स्वरूप में परिवर्तन ला सकता है। इसका व्यक्ति के मनोविज्ञान और स्वास्थ्य पर नकारात्मक रूप से प्रभाव पड़ता है।
यूएमएमएस में मॉलिक्युलर मेडिसिन के प्रोफेसर और शोध सामग्री के प्रकाशक एजी मरियन वाल्हाउट शोधपत्र में बताते हैं कि कैसे उपापचय प्रक्रिया (मेटाबोलिज्म) और शरीर विज्ञान (फिजियोलॉजी) आहार (डाइट) एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। वाल्हाउट और और उनके सहयोगियों ने इस बात का अवलोकन किया कि कैसे अलग-अलग आहार जीन के स्वरूप में परिवर्तन लाते हैं।
आहार आदतों में परिवर्तन आपके जीन को प्रभावित कर सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि आहार संबंधी परिवर्तन जीन के स्वरूप में बदलाव से जुड़ा होता है जो कि संपूर्ण सेहत और शरीर विज्ञान को प्रभावित कर सकता है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि स्वास्थ्य को लेकर जागरूक अधिकांश लोग भी समय-समय पर जंक फूड के मोहपाश से मुक्त नहीं हो पाते हैं।
स्वास्थ्य पर गहरा असर
मैसाचुसेट्स यूनिवर्सिटी की मेडिकल इकाई (यूएमएमएस) के शोध से जुड़े वैज्ञानिकों के मुताबिक किसी खास मौके, शादी समारोह, जन्मदिन की पार्टियां या ऐसे ही अन्य किसी मौके पर ही लिया गया बहुत थोड़ा-सा भी मनपसंद भोजन जीन के स्वरूप में परिवर्तन ला सकता है। इसका व्यक्ति के मनोविज्ञान और स्वास्थ्य पर नकारात्मक रूप से प्रभाव पड़ता है।
यूएमएमएस में मॉलिक्युलर मेडिसिन के प्रोफेसर और शोध सामग्री के प्रकाशक एजी मरियन वाल्हाउट शोधपत्र में बताते हैं कि कैसे उपापचय प्रक्रिया (मेटाबोलिज्म) और शरीर विज्ञान (फिजियोलॉजी) आहार (डाइट) एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। वाल्हाउट और और उनके सहयोगियों ने इस बात का अवलोकन किया कि कैसे अलग-अलग आहार जीन के स्वरूप में परिवर्तन लाते हैं।

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