बच्चों की चहलपहल से ही घर की रौनक होती है। यह बात सौ फीसद सच है, बच्चे न हों तो घर में सबकुछ अधूरा लगता है। इसी आधार पर किए एक नए अध्ययन में पाया गया कि निसंतान पुरुष, महिलाओं की तुलना में ज्यादा तनावग्रस्त और गुस्से वाले होते हैं।
ब्रिटेन की कीले यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पाया कि निसंतान होने की वजह से पुरुष का रुख ईर्ष्या, अकेलेपन और तनाव की तरफ ज्यादा हो जाता है। इसका असर उम्र के अंतिम पड़ाव तक व्यक्ति पर दिखाई देता है। अध्ययन में यह खुलासा हुआ है कि कई बुजुर्ग व्यक्तियों को यह बात तब बहुत सालती है, जब वे अपने दोस्तों को दादा बना हुआ देखते हैं। 'द टेलीग्राफ" की रिपोर्ट के अनुसार शोध में यह पाया गया कि बच्चे की घर में अनुपस्थिति को महिलाओं की अपेक्षा अलग-अलग ढंग से महसूस करते हैं। जबकि कुछ महिलाओं का कहना है कि संतान न होने की वजह से वे अपराधबोध महसूस करती हैं। हालांकि वह अपनी इस फीलिंग को आसानी से कह भी देती हैं, मगर पुरुष ऐसा नहीं कर पाते। यह अध्ययन लंदन में ब्रिटिश सोशियोलॉजिकल एसोसिएशन की वार्षिक बैठक में रॉबिन हेडली द्वारा प्रस्तुत किया गया। रॉबिन एक काउंसलर और कीले यूनिवर्सिटी के डॉक्टोरल स्टूडेंट हैं। इन्होंने निसंतान पुरुष और महिलाओं से लिए साक्षात्कार के बाद इस बात का खुलासा किया।
अध्ययन में क्या पाया
महिलाओं और पुरुषों पर तुलनात्मक ढंग से किए इस शोध में पाया गया कि लगभग आधे पुरुष संतान न होने की वजह से खुद को एकाकी या अलग-थलग महसूस करते हंै, जबकि महिलाओं में यह आंकड़ा सिर्फ एक चौथाई पाया गया। 10 में से 4 निसंतान पुरुष ऐसी स्थिति में खुद को तनावग्रस्त महसूस करते हैं, वहीं महिलाओं में यह आंकड़ा 10 में से 3 का है।
हालांकि जब इन लोगों से पैरेंट बनने की इच्छा को महसूस करने के बारे में पूछा गया तो इस स्थिति में महिला और पुरुषों का आंकड़ा 10 में से 7 यानी समान पाया गया। वहीं 7 में से 1 महिला ने संतान न होने पर अपराधबोध महसूस करने की बात कही, लेकिन पुरुषों में यह इमोशन नहीं देखा गया।
महिलाओं में बच्चे की चाहत ज्यादा
पुरुष और महिलाओं पर किए इस अध्ययन में यह तो स्पष्ट है कि दोनों ही पैरेंट बनने की इच्छा रखते हैं। मगर यह भी सच है कि बच्चे की चाहत महिलाओं में ज्यादा होती है और वे इसको लेकर लगातार नेगेटिव इमोशन का अनुभव अधिक करती हैं बनस्बित पुरुष के। दूसरी ओर पुरुष इसके लिए खुद गुस्से और तनाव को ओढ़ता रहता है।
ब्रिटेन की कीले यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पाया कि निसंतान होने की वजह से पुरुष का रुख ईर्ष्या, अकेलेपन और तनाव की तरफ ज्यादा हो जाता है। इसका असर उम्र के अंतिम पड़ाव तक व्यक्ति पर दिखाई देता है। अध्ययन में यह खुलासा हुआ है कि कई बुजुर्ग व्यक्तियों को यह बात तब बहुत सालती है, जब वे अपने दोस्तों को दादा बना हुआ देखते हैं। 'द टेलीग्राफ" की रिपोर्ट के अनुसार शोध में यह पाया गया कि बच्चे की घर में अनुपस्थिति को महिलाओं की अपेक्षा अलग-अलग ढंग से महसूस करते हैं। जबकि कुछ महिलाओं का कहना है कि संतान न होने की वजह से वे अपराधबोध महसूस करती हैं। हालांकि वह अपनी इस फीलिंग को आसानी से कह भी देती हैं, मगर पुरुष ऐसा नहीं कर पाते। यह अध्ययन लंदन में ब्रिटिश सोशियोलॉजिकल एसोसिएशन की वार्षिक बैठक में रॉबिन हेडली द्वारा प्रस्तुत किया गया। रॉबिन एक काउंसलर और कीले यूनिवर्सिटी के डॉक्टोरल स्टूडेंट हैं। इन्होंने निसंतान पुरुष और महिलाओं से लिए साक्षात्कार के बाद इस बात का खुलासा किया।अध्ययन में क्या पाया
महिलाओं और पुरुषों पर तुलनात्मक ढंग से किए इस शोध में पाया गया कि लगभग आधे पुरुष संतान न होने की वजह से खुद को एकाकी या अलग-थलग महसूस करते हंै, जबकि महिलाओं में यह आंकड़ा सिर्फ एक चौथाई पाया गया। 10 में से 4 निसंतान पुरुष ऐसी स्थिति में खुद को तनावग्रस्त महसूस करते हैं, वहीं महिलाओं में यह आंकड़ा 10 में से 3 का है।
हालांकि जब इन लोगों से पैरेंट बनने की इच्छा को महसूस करने के बारे में पूछा गया तो इस स्थिति में महिला और पुरुषों का आंकड़ा 10 में से 7 यानी समान पाया गया। वहीं 7 में से 1 महिला ने संतान न होने पर अपराधबोध महसूस करने की बात कही, लेकिन पुरुषों में यह इमोशन नहीं देखा गया।
महिलाओं में बच्चे की चाहत ज्यादा
पुरुष और महिलाओं पर किए इस अध्ययन में यह तो स्पष्ट है कि दोनों ही पैरेंट बनने की इच्छा रखते हैं। मगर यह भी सच है कि बच्चे की चाहत महिलाओं में ज्यादा होती है और वे इसको लेकर लगातार नेगेटिव इमोशन का अनुभव अधिक करती हैं बनस्बित पुरुष के। दूसरी ओर पुरुष इसके लिए खुद गुस्से और तनाव को ओढ़ता रहता है।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें