छोटी-छोटी बातों पर रिश्तों का टूट जाना, तलाक के बढ़ते मामलों के कारण लोग शादी को लेकर काफी सतर्क हो गए हैं। यही वजह है कि शादी टूटने जैसी नौबत न आए लोग प्री-मैरिटल काउंसलिंग की शरण में जा रहे हैं।
अलग-अलग सोच और पृष्ठभूमि के लोग जब एक बंधन में बांधते हैं तो ढेरों चुनौतियां सामने आना लाजिमी है। यदि उन चुनौतियों के बारे में पहले ही किसी एक्सपर्ट से पूछा जाए तो रिश्ता निभाना और आसान हो सकता है। विवाह पूर्व काउंसिलिंग का चलन काफी तेजी से बढ़ रहा है। शादी के लिए तैयार लड़का और लड़की इस संशय में रहते हैं कि उन्होंने या उनके परिवारवालों ने जो फैसला लिया है वह सही है या नहीं। उनके मन में कुछ इस तरह के सवाल होते हैं
काउंसिलिंग के दौरान कई अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा होती है। जिससे रिश्ते में बंध्ाने से पूर्व कई बातें स्पष्ट हो जाती हैं और निर्णय लेने में आसानी होती है।
कितना संगत है रिश्ता: दो अलग-अलग सोच वाले लोग जीवनभर एक साथ रहने के लिए पहला कदम बढ़ा रहे हैं। दोनों को एक-दूसरे की खूबियों और कमियों को स्वीकार कर इस रिश्ते से जुड़ना है। इससे जुड़े जितने भी सवाल मन में आ रहे हैं उस पर चर्चा की जाती है।
अपेक्षाएं: हर व्यक्ति की कुछ उम्मीदें होती हैं और उन्हीं उम्मीदों के साथ वह किसी के साथ जुड़ता है। दो लोग एक-दूसरे की जिंदगी, करियर और भावनात्मक रूप से क्या अपेक्षा रखते हैं इससे दोनों को भविष्य की बेहतर योजना बनाने में मदद मिल सकती है।
परिवार भी जुड़ता है: अरेंज मैरिज में न केवल लड़का और लड़की को देखा जाता है बल्कि पूरे परिवार की पृष्ठभूमि देखी जाती है। इसके जरिए यह समझना आसान हो जाता है कि दो अलग-अलग सोच वाले लोग एक जैसी जिंदगी से कितना और किस प्रकार सामंजस्य बिठा पाएंगे।
कैसे करें हल: कोई भी रिश्ता हो उसमें विभिन्न् मुद्दों पर असहमति होना आम है। ऐसे में दो अलग तरह के लोगों के बीच इस तरह की परेशानी होती है तो ऐसी परिस्थिति में दोनों किस तरह समझदारी और प्यार से स्थिति संभालते हैं यह जानना भी जरूरी होता है।
विश्वास बड़ी चीज है : हर समय एक जैसी ही स्थिति होगी यह जरूरी नहीं। मुश्किल घड़ी में दोनों कैसे सहयोग, विश्वास और प्यार से कठिन परिस्थितियों को भी आसान बना देते हैं इस पहलू को भी जानने का प्रयास किया जाता है।
अलग-अलग सोच और पृष्ठभूमि के लोग जब एक बंधन में बांधते हैं तो ढेरों चुनौतियां सामने आना लाजिमी है। यदि उन चुनौतियों के बारे में पहले ही किसी एक्सपर्ट से पूछा जाए तो रिश्ता निभाना और आसान हो सकता है। विवाह पूर्व काउंसिलिंग का चलन काफी तेजी से बढ़ रहा है। शादी के लिए तैयार लड़का और लड़की इस संशय में रहते हैं कि उन्होंने या उनके परिवारवालों ने जो फैसला लिया है वह सही है या नहीं। उनके मन में कुछ इस तरह के सवाल होते हैं
- क्या मैं शादी के लिए तैयार हूं या नहीं
- क्या मैंने सही जीवनसाथी चुना है
- क्या हमारा रिश्ता उम्रभर के लिए होगा
- मुझे अरेंज मैरेज करनी चाहिए या नहीं
काउंसिलिंग के दौरान कई अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा होती है। जिससे रिश्ते में बंध्ाने से पूर्व कई बातें स्पष्ट हो जाती हैं और निर्णय लेने में आसानी होती है।
कितना संगत है रिश्ता: दो अलग-अलग सोच वाले लोग जीवनभर एक साथ रहने के लिए पहला कदम बढ़ा रहे हैं। दोनों को एक-दूसरे की खूबियों और कमियों को स्वीकार कर इस रिश्ते से जुड़ना है। इससे जुड़े जितने भी सवाल मन में आ रहे हैं उस पर चर्चा की जाती है।
अपेक्षाएं: हर व्यक्ति की कुछ उम्मीदें होती हैं और उन्हीं उम्मीदों के साथ वह किसी के साथ जुड़ता है। दो लोग एक-दूसरे की जिंदगी, करियर और भावनात्मक रूप से क्या अपेक्षा रखते हैं इससे दोनों को भविष्य की बेहतर योजना बनाने में मदद मिल सकती है।
परिवार भी जुड़ता है: अरेंज मैरिज में न केवल लड़का और लड़की को देखा जाता है बल्कि पूरे परिवार की पृष्ठभूमि देखी जाती है। इसके जरिए यह समझना आसान हो जाता है कि दो अलग-अलग सोच वाले लोग एक जैसी जिंदगी से कितना और किस प्रकार सामंजस्य बिठा पाएंगे।
कैसे करें हल: कोई भी रिश्ता हो उसमें विभिन्न् मुद्दों पर असहमति होना आम है। ऐसे में दो अलग तरह के लोगों के बीच इस तरह की परेशानी होती है तो ऐसी परिस्थिति में दोनों किस तरह समझदारी और प्यार से स्थिति संभालते हैं यह जानना भी जरूरी होता है।
विश्वास बड़ी चीज है : हर समय एक जैसी ही स्थिति होगी यह जरूरी नहीं। मुश्किल घड़ी में दोनों कैसे सहयोग, विश्वास और प्यार से कठिन परिस्थितियों को भी आसान बना देते हैं इस पहलू को भी जानने का प्रयास किया जाता है।

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