सोमवार, 28 अक्टूबर 2013

उफ् यह दांत का दर्द...

 दांत के दर्द को वही समझ सकता है, जिसने इसे सहा हो। इस दर्द को सहन करने वाला तुरंत सामने वाले की पीड़ा को आसानी से समझ जाता है। इसलिए कहते हैं दांत दर्द एक बड़ी समस्या है। कई बार यह काफी तकलीफदेह हो सकता है। मगर हाल ही में किए शोध में विशेषज्ञों का कहना है कि दांत का यह दर्द आपको मानसिक रोगी भी बना सकता है।
जी हां, सुनने में अजीब लग सकता है, मगर यह सच है। विशेषज्ञों का मानना है कि दांतों में लगातार रहने वाला दर्द आपको मानसिक समस्याएं दे सकता है। लोगों में आमतौर पर ट्राइजेमिनल न्यूरापैथिक डिस्ऑर्डर (टीएनडी) की दिक्कत पाई जाती है। सर्दियों में अमूमन दांत के दर्द का आंकड़ा गर्मियों की अपेक्षा 10 गुना बढ़ जाता है। टीएनडी खासतौर पर सुबह और शाम के समय दिमाग में गंभीर असर करता है। हालांकि दांद के इस दर्द का इलाज दर्द निवारक दवाओं से नहीं करना चाहिए। इस दर्द का सीधा संपर्क मस्तिष्क से होता है।
विशेषज्ञ कहते हैं कि दो से तीन सप्ताह तक रहने वाला दांत का दर्द मानसिक रोगी भी बना सकता है। इसकी मुख्य वजह से दांत में होने वाला तेज दर्द है, जो सीधे नर्वस सिस्टम पर इफेक्ट डालता है।
दांत में लगातार दर्द के 80 फीसद मामलों में मसूढ़ों में सूजन की जांच कर एंटी इंफ्लेमेटरी या संकुचन कम करने की दवाएं देकर दर्द का इलाज किया जाता है। जबकि टीएनडी की पहचान के लिए दर्द से प्रभावित जगह की रेडियोग्राफी से जांच की जाना चाहिए।  

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