मातृत्व को दुनिया का सबसे बड़ा सुख माना जाता है और एक मां से बेहतर अपने बच्चे की देखभाल करने वाला और कोई नहीं हो सकता। यदि महिलाएं बच्चे को जन्म देने के साथ ही डिप्रेशन की शिकार हो जाएं तो बच्चे की देखभाल कौन करे। इस स्थिति से बचने का आसान उपाय ढूंढ निकाला है वैज्ञानिकों ने।
वॉरविक यूनिवर्सिटी के शोध्ाकर्ताओं ने गर्भवती महिलाओं के लिए एक क्रांतिकारी खोज की है, जो बच्चे के जन्म के बाद होने वाले डिप्रेशन से उन्हें बचाएगा। इसके लिए गर्भवती महिलाओं को एक टेस्ट करवाना होगा, जिसमें महज 10 पौंड का खर्च आएगा। इससे डिलेवरी के बाद होने वाले डिप्रेशन जैसी परेशानियों का इलाज पहले ही कर लिया जाएगा।
शोध्ा के जरिए यह बताया कि सात में से एक प्रसूता डिप्रेशन की शिकार होती है, जिसके गंभीर परिणाम मां और बच्चे दोनों पर हो सकते हैं। कई बार गंभीर मामलों में प्रसूता महिलाएं आत्महत्या कर लेती हैं या अपने बच्चे को मार देती हैं। विश्व में अपनी तरह की यह पहली जांच अगले 5 साल के अंदर व्यापक अमल में आ सकती है। इसके तहत प्रेगनेंसी के आरंभिक चरणों में खून की कुछ बूंदें लेकर उनकी जांच की जाती है कि महिला के शरीर में ऐसा जीन तो नहीं है, जो डिप्रेशन के लिए जिम्मेदार है। यदि कारणों का पता चल जाए तो उसका इलाज भी समय रहते किया जा सकेगा। अध्ािकांश मामलों में पोस्ट नेटल डिप्रेशन को गंभीर परिस्थिति में पहुंचने से पहले ही रोका जा सकता है।
यदि किसी गर्भवती महिला में चिड़चिड़ापन, भूख की कमी, उदासी जैसे लक्षण नजर आते हैं तो उसे तुरंत डॉक्टर को दिखाने की जरूरत होती है। जिन मांओं को इस तरह का डिप्रेशन होता है, उनके बच्चे उचित देखभाल और स्नेह के अभाव में भविष्य में चीजों को सीखने और भावनाओं को समझने में पीछे रह जाते हैं।
200 महिलाओं पर किए गए शोध में यह बात सामने आई कि जिन महिलाओं में स्ट्रेस के जीन मौजूद हैं, उनमें पोस्ट नेटल डिप्रेशन होने की आशंका 3 से 5 गुना अध्ािक होती है। इसके कारण वे गर्भावस्था के बाद नॉर्मल हॉर्मोनल बैलेंस को रिस्टोर नहीं कर पातीं। इस स्थिति से लड़ने के लिए डॉक्टर्स एंटी डिप्रेसेंट दवाओं को भी एक विकल्प के रूप में मानते हैं। इससे एकमात्र साइड इफेक्ट होता है कि होने वाले बच्चे का वजन अध्ािक होता है।
इस महत्वपूर्ण जांच का खर्च केवल 10 पौंड ही है। शोध्ाकर्ताओं का मानना है कि पोस्ट नेटल डिप्रेशन की अध्ािकतर शिकार वही होती हैं, जिनकी हिस्ट्री डिप्रेशन की रही है। साथ ही जिनके साथ कोई सपोर्ट सिस्टम नहीं होता या फिर जिनके बच्चे अध्ािक अटेंशन चाहते हैं, उन मांओं को भी इस तरह का डिप्रेशन हो सकता है।
वॉरविक यूनिवर्सिटी के शोध्ाकर्ताओं ने गर्भवती महिलाओं के लिए एक क्रांतिकारी खोज की है, जो बच्चे के जन्म के बाद होने वाले डिप्रेशन से उन्हें बचाएगा। इसके लिए गर्भवती महिलाओं को एक टेस्ट करवाना होगा, जिसमें महज 10 पौंड का खर्च आएगा। इससे डिलेवरी के बाद होने वाले डिप्रेशन जैसी परेशानियों का इलाज पहले ही कर लिया जाएगा।शोध्ा के जरिए यह बताया कि सात में से एक प्रसूता डिप्रेशन की शिकार होती है, जिसके गंभीर परिणाम मां और बच्चे दोनों पर हो सकते हैं। कई बार गंभीर मामलों में प्रसूता महिलाएं आत्महत्या कर लेती हैं या अपने बच्चे को मार देती हैं। विश्व में अपनी तरह की यह पहली जांच अगले 5 साल के अंदर व्यापक अमल में आ सकती है। इसके तहत प्रेगनेंसी के आरंभिक चरणों में खून की कुछ बूंदें लेकर उनकी जांच की जाती है कि महिला के शरीर में ऐसा जीन तो नहीं है, जो डिप्रेशन के लिए जिम्मेदार है। यदि कारणों का पता चल जाए तो उसका इलाज भी समय रहते किया जा सकेगा। अध्ािकांश मामलों में पोस्ट नेटल डिप्रेशन को गंभीर परिस्थिति में पहुंचने से पहले ही रोका जा सकता है।
यदि किसी गर्भवती महिला में चिड़चिड़ापन, भूख की कमी, उदासी जैसे लक्षण नजर आते हैं तो उसे तुरंत डॉक्टर को दिखाने की जरूरत होती है। जिन मांओं को इस तरह का डिप्रेशन होता है, उनके बच्चे उचित देखभाल और स्नेह के अभाव में भविष्य में चीजों को सीखने और भावनाओं को समझने में पीछे रह जाते हैं।
200 महिलाओं पर किए गए शोध में यह बात सामने आई कि जिन महिलाओं में स्ट्रेस के जीन मौजूद हैं, उनमें पोस्ट नेटल डिप्रेशन होने की आशंका 3 से 5 गुना अध्ािक होती है। इसके कारण वे गर्भावस्था के बाद नॉर्मल हॉर्मोनल बैलेंस को रिस्टोर नहीं कर पातीं। इस स्थिति से लड़ने के लिए डॉक्टर्स एंटी डिप्रेसेंट दवाओं को भी एक विकल्प के रूप में मानते हैं। इससे एकमात्र साइड इफेक्ट होता है कि होने वाले बच्चे का वजन अध्ािक होता है।
इस महत्वपूर्ण जांच का खर्च केवल 10 पौंड ही है। शोध्ाकर्ताओं का मानना है कि पोस्ट नेटल डिप्रेशन की अध्ािकतर शिकार वही होती हैं, जिनकी हिस्ट्री डिप्रेशन की रही है। साथ ही जिनके साथ कोई सपोर्ट सिस्टम नहीं होता या फिर जिनके बच्चे अध्ािक अटेंशन चाहते हैं, उन मांओं को भी इस तरह का डिप्रेशन हो सकता है।
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