सोमवार, 28 अक्टूबर 2013

हाथ धोना भी होता है अहम

वैसे तो शारीरिक साफ-सफाई को हमेशा से तवज्जो दी जाती है और बच्चों को विशेषकर प्रारंभ से यही सिखाया जाता है कि वे स्वच्छ रहने की आदत अपनाए ताकि गंदगी से दूर रहे। पूरे शरीर की सफाई तो ठीक होती है लेकिन हर काम के बाद जिस चीज की बार-बार आवश्यकता पड़ती है, वह है हाथों की सफाई की। जितने काम, उतनी ही बार
हाथों की सफाई जरूरी। और जो लोग यह काम बखूबी करते हैं उन पर इसका पॉजिटिव असर होता है। जी हां, यकीन नहीं होता तो हाल ही में हुए एक शोध के निष्कर्षों को लेकर जाना जा सकता है। जिसमें बताया गया है कि हाथ धोने की आदत न केवल आपको बीमारियों से बचाने में मददगार होती है बल्कि यह आपका दर्द भी कम कर सकती है। केवल इतना ही नहीं हाथ धोने की आदत हमें नाकामयाबी के बाद भी सकारात्मक बनाए रखने में मदद करती है।
लोगों को तीन समूहों में बांटा 
यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोग्न के डॉक्टर काय कास्पर ने बताया कि शारीरिक सफाई किसी हादसे के बाद हम पर कैसे असर डालती है। उन्होंने पाया कि किसी कार्य में असफल होने के बाद जिन लोगों ने हाथ धोए, वे इस बात को लेकर अधिक आशांवित थे कि अगली बार वे जरूर कामयाब होंगे। डॉक्टर कास्पर ने 98 लोगों को तीन समूहों में बांटा।
कैसे किया अध्ययन  
प्रयोग के पहले हिस्से में, दो समूहों के प्रतिभागियों को असंभव कार्य करने को दिया गया। जब दोनों समूह काम पूरा करने में नाकाम रहे, तब एक को  हाथ धोने के लिए कहा गया। दोनों समूह इस बात को लेकर आशांवित थे कि वे अगली बार इस कार्य में बेहतर प्रदर्शन करेंगे लेकिन जिस समूह के लोगों ने हाथ धोए थे, वे अपनी सफलता को लेकर अधिक सकारात्मक थे। डॉक्टर ने बताया कि नाकामयाबी के बाद शारीरिक सफाई से नकारात्मक भावनाओं को दूर करने में और ज्यादा मदद मिलती है। इसलिए अक्सर लोग न सिर्फ थकान के बाद बल्कि तनाव के पलों में भी स्नान करने लगते हैं, इससे तनाव काफी हद तक कम भी हो जाता है। इसी बीच जिन लोगों ने हाथ धोए थे, उन्होंने अगली बार बेहतर प्रदर्शन किया। यानी उनके मन में भी बेहतर करने के लिए प्रेरणा जागी। यह स्टडी 'सोशल साइकोलॉजिकल एंड पर्सनालिटी साइंस" के जर्नल में प्रकाशित हुई है।  

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