मेडिटेशन (ध्यान) न सिर्फ शरीर और दिमाग को स्वस्थ रखता है बल्कि इससे व्यक्ति ज्यादा दयालु और उदार भी बनता है। ऐसा व्यक्ति हर क्षण किसी की भी मदद करने के लिए तत्पर रहता है। एक नए अध्ययन में यह बात सामने आई है। अभी तक वैज्ञानिकों ने मेडिटेशन से दिमाग और शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों पर ही फोकस किया है मगर नए अध्ययन में पाया गया कि मेडिटेशन व्यक्तित्व में काफी कुछ बदलाव कर सकता है। नार्थइस्टर्न यूनिवर्सिटी और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इस नए अध्ययन में मेडिटेशन के प्रभाव को इंटरपर्सनल हार्मनी और कम्पैशन के रूप में देखा है।
हर पल तैयार रहने की भावना
आध्यात्मिक तौर पर ध्यान को हमेशा से महत्व दिया जाता है। किसी के दुख को बेहतर तरीके से समझते हुए उसकी मदद के लिए तत्पर रहने का भाव दिल में जो सुकून देता है, वह और कहीं नहीं होता। इसके अलावा हर एक के प्रति संवेदना और दूसरों के प्रति की गई दयालुता ही मेडिटेशन का सही परिणाम है।
डिप्रेशन होता है दूर
मेडिटेशन से डिप्रेशन हटाने में भी मदद मिलती है, इसलिए अक्सर चिकित्सक भी अवसाद वाले मरीजों को मेडिटेशन करने की सलाह देते हैं।
इन्सोम्निया से मिलती है निजात
मेडिटेशन को लेकर अमेरिका में हुए अध्ययन में भी पाया गया है कि मेडिटेशन से इन्सोम्निया (अनिद्रा) के मरीजों को काफी लाभ मिलता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि लाइफ स्टाइल में लगातार हो रहे बदलावों का सबसे ज्यादा असर नींद पर ही पड़ता है। ऐसे में मेडिटेशन का सहारा इसका अचूक इलाज बन सकता है।
क्या पाया
शोधकर्ताओं ने पाया कि मेडिटेशन का असर व्यक्ति के पूरे व्यवहार पर पड़ता है। इस शोध में शामिल प्रतिभागियों को आठ सप्ताह तक दो तरह के मेडिटेशन की ट्रेनिंग दी गई। इस ट्रेनिंग सेशन के बाद उन लोगों की टेस्ट ली गई। इसके जरिए पाया गया है कि जिन लोगों ने मेडिटेशन का सहारा लिया था, उनमें दूसरों की मदद का जज्बा, उनके दर्द को महसूस करने की भावना 50 प्रतिशत तक पाई गई, जबकि जो लोग मेडिटेशन नहीं करते थे, उनमें यह जज्बा मात्र 15 प्रतिशत तक ही पाया गया। यह शोध 'जर्नल साइकोलॉजी साइंस" में प्रकाशित किया गया है।
हर पल तैयार रहने की भावना
आध्यात्मिक तौर पर ध्यान को हमेशा से महत्व दिया जाता है। किसी के दुख को बेहतर तरीके से समझते हुए उसकी मदद के लिए तत्पर रहने का भाव दिल में जो सुकून देता है, वह और कहीं नहीं होता। इसके अलावा हर एक के प्रति संवेदना और दूसरों के प्रति की गई दयालुता ही मेडिटेशन का सही परिणाम है।
डिप्रेशन होता है दूर
मेडिटेशन से डिप्रेशन हटाने में भी मदद मिलती है, इसलिए अक्सर चिकित्सक भी अवसाद वाले मरीजों को मेडिटेशन करने की सलाह देते हैं।
इन्सोम्निया से मिलती है निजात
मेडिटेशन को लेकर अमेरिका में हुए अध्ययन में भी पाया गया है कि मेडिटेशन से इन्सोम्निया (अनिद्रा) के मरीजों को काफी लाभ मिलता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि लाइफ स्टाइल में लगातार हो रहे बदलावों का सबसे ज्यादा असर नींद पर ही पड़ता है। ऐसे में मेडिटेशन का सहारा इसका अचूक इलाज बन सकता है।
क्या पाया
शोधकर्ताओं ने पाया कि मेडिटेशन का असर व्यक्ति के पूरे व्यवहार पर पड़ता है। इस शोध में शामिल प्रतिभागियों को आठ सप्ताह तक दो तरह के मेडिटेशन की ट्रेनिंग दी गई। इस ट्रेनिंग सेशन के बाद उन लोगों की टेस्ट ली गई। इसके जरिए पाया गया है कि जिन लोगों ने मेडिटेशन का सहारा लिया था, उनमें दूसरों की मदद का जज्बा, उनके दर्द को महसूस करने की भावना 50 प्रतिशत तक पाई गई, जबकि जो लोग मेडिटेशन नहीं करते थे, उनमें यह जज्बा मात्र 15 प्रतिशत तक ही पाया गया। यह शोध 'जर्नल साइकोलॉजी साइंस" में प्रकाशित किया गया है।

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