अक्सर यह कहा जाता है कि मांसाहार खाने से इंसान कई तरह की बीमारियों से ग्रस्त हो जाता है। लेकिन लंदन में हुए एक शोध्ा में साबित हुआ है कि मछली खाने से मुंह व त्वचा के कैंसर की रोकथाम हो सकती है।
यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन, क्वीन मैरी के वैज्ञानिकों ने एक शोध्ा के जरिए इस बात का पता लगाया है कि सालमन और ट्राउट जैसी ऑयली मछलियों को खानेे से मंुह और त्वचा के कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इनमें मौजूद ओमेगा 3 फैटी एसिड मलिग्नंेट और प्री मलिग्नेंट कैंसर कोशिकाओं को मारता है। इस शोध्ा से पता चलता है कि इन मछलियों से न केवल मुंह और त्वचा के कैंसर में बचाव किया जा सकता है, बल्कि उनके इलाज में भी कारगर है।
ओमेगा 3 पॉलीसेचुरेटड फैटी एसिड्स का निर्माण मानव शरीर में पर्याप्त मात्रा में नहीं होता है और इसकी कमी को भोजन के जरिए पूरा किया जाता है। वैज्ञानिक मुख्य रूप से स्क्वेमस सेल कार्सिनोमा या एससीसी नामक कैंसर पर शोध्ा कर रहे थे। दरअसल स्क्वेमस कोशिकाएं त्वचा की बाहरी परत का अहम हिस्सा होती हैं और एससीसी एक प्रमुख त्वचा संबंधी कैंसर है। हालांकि स्क्वेमस कोशिकाएं पाचन तंत्र के बाहरी हिस्सों, फेफड़ों और अन्य अंगों तक फैली होती है। ओरल स्क्वेमस सेल कार्सिनोमस पूरे विश्व में होने वाले मुंह के कैंसर में सबसे अध्ािक जटिल और इलाज में सबसे अध्ािक महंगा है।
शोध्ा के दौरान वैज्ञानिकों ने अलग-अलग कोशिकाओं के जरिए प्रयोगशाला में सेल कल्चर विकसित किया, इस प्रक्रिया के दौरान फैटी एसिड का इस्तेमाल किया गया था। इस प्रयोग के लिए मेलिग्नेंट ओरल और स्किन सेल्स, प्री-मेलिग्नेंट सेल्स और नॉर्मल स्किन व ओरल सेल्स को लिया गया था। शोध्ाकर्ता कैनेथ पार्किंसन ने बताया कि ओमेगा 3 फैटी एसिड अन्य कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाए बिना मेलिग्नेंट और प्री-मेलिग्नेंट कोशिकाओं को बढ़ने से रोक रहा था। इससे यह पता चलता है कि किस प्रकार फैटी एसिड मुंह और त्वचा के कैंसर को रोकने में मददगार हो सकता है।
यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन, क्वीन मैरी के वैज्ञानिकों ने एक शोध्ा के जरिए इस बात का पता लगाया है कि सालमन और ट्राउट जैसी ऑयली मछलियों को खानेे से मंुह और त्वचा के कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इनमें मौजूद ओमेगा 3 फैटी एसिड मलिग्नंेट और प्री मलिग्नेंट कैंसर कोशिकाओं को मारता है। इस शोध्ा से पता चलता है कि इन मछलियों से न केवल मुंह और त्वचा के कैंसर में बचाव किया जा सकता है, बल्कि उनके इलाज में भी कारगर है।ओमेगा 3 पॉलीसेचुरेटड फैटी एसिड्स का निर्माण मानव शरीर में पर्याप्त मात्रा में नहीं होता है और इसकी कमी को भोजन के जरिए पूरा किया जाता है। वैज्ञानिक मुख्य रूप से स्क्वेमस सेल कार्सिनोमा या एससीसी नामक कैंसर पर शोध्ा कर रहे थे। दरअसल स्क्वेमस कोशिकाएं त्वचा की बाहरी परत का अहम हिस्सा होती हैं और एससीसी एक प्रमुख त्वचा संबंधी कैंसर है। हालांकि स्क्वेमस कोशिकाएं पाचन तंत्र के बाहरी हिस्सों, फेफड़ों और अन्य अंगों तक फैली होती है। ओरल स्क्वेमस सेल कार्सिनोमस पूरे विश्व में होने वाले मुंह के कैंसर में सबसे अध्ािक जटिल और इलाज में सबसे अध्ािक महंगा है।
शोध्ा के दौरान वैज्ञानिकों ने अलग-अलग कोशिकाओं के जरिए प्रयोगशाला में सेल कल्चर विकसित किया, इस प्रक्रिया के दौरान फैटी एसिड का इस्तेमाल किया गया था। इस प्रयोग के लिए मेलिग्नेंट ओरल और स्किन सेल्स, प्री-मेलिग्नेंट सेल्स और नॉर्मल स्किन व ओरल सेल्स को लिया गया था। शोध्ाकर्ता कैनेथ पार्किंसन ने बताया कि ओमेगा 3 फैटी एसिड अन्य कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाए बिना मेलिग्नेंट और प्री-मेलिग्नेंट कोशिकाओं को बढ़ने से रोक रहा था। इससे यह पता चलता है कि किस प्रकार फैटी एसिड मुंह और त्वचा के कैंसर को रोकने में मददगार हो सकता है।
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