घर बच्चों की पहली पाठशाला है। बच्चे घर में जो भी माहौल देखते हैं, उसका उन पर गहरा असर होता है। यही वजह है कि घर में बच्चों को अनुकूल माहौल देने की हिदायत दी जाती है ताकि उनकी परवरिश का असर उनकी अच्छी आदतों के रूप में दिखाई दे। सबसे पहले माता-पिता के साथ से ही बच्चा खानपान, बोलचाल और रहन-सहन सीखता है। पैरेन्ट्स को देखते-देखते बच्चे कब उनकी आदतें स्वत: एडॉप्ट करने लगते हंै, पता ही नहीं चलता।
एक नए शोध में यह बात सामने आई है कि पैरेन्ट्स की बैड हैबिट्स जैसे शराब पीना, स्मोकिंग, झूठ बोलने की आदतों को बच्चे जल्दी ग्राह्य कर लेते हैं। इसलिए बच्चों की आदतें बिगड़ें न, इसके लिए पैरेन्ट्स को अपने बच्चों के सामने गलत आदतों को छोड़ना ही बेहतर रहेगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि पैरेन्ट्स की आदतों से बच्चों के प्रभावित होने की संभावना ज्यादा होती है। शोध में कहा गया है कि जिन घरों में माता या पिता बच्चों के सामने शराब का सेवन या स्मोकिंग करते हैं, उनके घर के बच्चों में इस तरह की आदतें जल्दी पड़ जाती हैं।
ब्रिटिश अखबार 'टेलीग्राफ" की रिपोर्ट के अनुसार ब्रिटेन में स्थित 'डेमोस सिटीजन प्रोग्राम नामक थिंक टैंक" ने तीन दशक तक कुल मिलाकर 18 हजार लोगों पर सर्वेक्षण किया। इस सर्वेक्षण में पाया गया कि 16 साल की उम्र तक यदि बच्चे घर में भी शराब सेवन और स्मोकिंग की आदतों को देखते हैं तो वयस्कता की उम्र तक वे अपने दोस्तों और सहपाठियों के साथ इस आदत को शेयर करने के लिए तैयार हो जाते हैं। जिसका खामियाजा बाद में पैरेन्ट्स को ही भुगतना पड़ता है। बाद में इन आदतों को बच्चों से छुड़ाना बहुत मुश्किल हो जाता है।
प्रेग्नेंसी में शराब, बच्चे के लिए घातक
एक अन्य शोध में इस बात का खुलासा हुआ है कि जो मां प्रेग्नेंसी के दौरान शराब का सेवन करती हैं, उनके शिशु पर इसका खतरनाक प्रभाव पड़ता है। कई मामलों में यह आदत गर्भस्थ शिशु की मौत का कारण भी बनती है। शोध में पाया गया कि 6 में से एक गर्भस्थ शिशु की मौत मां द्वारा अत्यधिक शराब के सेवन से होती है। 'द यूएस सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेन्शन" (सीडीसी) ने सडन इंफेंट डेथ सिंड्रोम (एसआईडीएस) के बारे में यह रिपोर्ट पेश की है। जिसमें प्रेग्नेंसी के दौरान शराब पीने की आदत को शिशु के लिए नुकसानदायक बताया गया है। यही बात स्मोकिंग के मामले में भी होती है। स्मोकिंग का असर भी गर्भस्थ शिशु की मौत का कारण बन सकता है।
एक नए शोध में यह बात सामने आई है कि पैरेन्ट्स की बैड हैबिट्स जैसे शराब पीना, स्मोकिंग, झूठ बोलने की आदतों को बच्चे जल्दी ग्राह्य कर लेते हैं। इसलिए बच्चों की आदतें बिगड़ें न, इसके लिए पैरेन्ट्स को अपने बच्चों के सामने गलत आदतों को छोड़ना ही बेहतर रहेगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि पैरेन्ट्स की आदतों से बच्चों के प्रभावित होने की संभावना ज्यादा होती है। शोध में कहा गया है कि जिन घरों में माता या पिता बच्चों के सामने शराब का सेवन या स्मोकिंग करते हैं, उनके घर के बच्चों में इस तरह की आदतें जल्दी पड़ जाती हैं।
ब्रिटिश अखबार 'टेलीग्राफ" की रिपोर्ट के अनुसार ब्रिटेन में स्थित 'डेमोस सिटीजन प्रोग्राम नामक थिंक टैंक" ने तीन दशक तक कुल मिलाकर 18 हजार लोगों पर सर्वेक्षण किया। इस सर्वेक्षण में पाया गया कि 16 साल की उम्र तक यदि बच्चे घर में भी शराब सेवन और स्मोकिंग की आदतों को देखते हैं तो वयस्कता की उम्र तक वे अपने दोस्तों और सहपाठियों के साथ इस आदत को शेयर करने के लिए तैयार हो जाते हैं। जिसका खामियाजा बाद में पैरेन्ट्स को ही भुगतना पड़ता है। बाद में इन आदतों को बच्चों से छुड़ाना बहुत मुश्किल हो जाता है।
प्रेग्नेंसी में शराब, बच्चे के लिए घातक
एक अन्य शोध में इस बात का खुलासा हुआ है कि जो मां प्रेग्नेंसी के दौरान शराब का सेवन करती हैं, उनके शिशु पर इसका खतरनाक प्रभाव पड़ता है। कई मामलों में यह आदत गर्भस्थ शिशु की मौत का कारण भी बनती है। शोध में पाया गया कि 6 में से एक गर्भस्थ शिशु की मौत मां द्वारा अत्यधिक शराब के सेवन से होती है। 'द यूएस सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेन्शन" (सीडीसी) ने सडन इंफेंट डेथ सिंड्रोम (एसआईडीएस) के बारे में यह रिपोर्ट पेश की है। जिसमें प्रेग्नेंसी के दौरान शराब पीने की आदत को शिशु के लिए नुकसानदायक बताया गया है। यही बात स्मोकिंग के मामले में भी होती है। स्मोकिंग का असर भी गर्भस्थ शिशु की मौत का कारण बन सकता है।

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