रविवार, 27 अक्टूबर 2013

खून की कमी से डिमेंशिया का खतरा ज्यादा

 एनीमिया या शरीर में रेड ब्लड सेल्स का लो लेवल डिमेंशिया के खतरे को बढ़ा सकता है। एक नए अध्ययन में यह खुलासा हुआ है। अमेरिकी शोधकर्ताओं ने 70 से 79 के 2,552 ओल्डर एडल्ट्स पर किए अध्ययन में
यह तथ्य पाया। इतना ही नहीं इस प्रतिभागियों का मेमरी और थिंकिंग टेस्ट पूरे 11 साल तक चलता रहा।
खतरा 41 प्रश तक ज्यादा
शोध के प्रारंभ में इनमें से 393 में एनीमिया देखा गया। वहीं अध्ययन के अंत में तकरीबन 445 यानी लगभग 18 प्रतिशत प्रतिभागियों में डिमेंशिया के लक्षण देखे गए। शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग अध्ययन के प्रारंभ में एनीमिया से ग्रस्त थे, उनमें डिमेंशिया के बढ़ने का खतरा 41 प्रतिशत ज्यादा पाया गया। इसके विपरीत जो एनीमिक नहीं थे, उनमें डिमेंशिया के लक्षण बिल्कुल नहीं पाए गए। हालांकि शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि इसका संबंध उम्र, लिंग और शिक्षा सभी से जुड़े पहलुओं के आधार पर भी देखा गया और फिर किसी तरह के नतीजे पर पहुंचा गया।
एनीमिया सामान्य लक्षण 
शोध में पाया गया कि बढ़ती उम्र में एनीमिया एक सामान्य लक्षण होता है। जो अधिकांश 65 या इससे अधिक की उम्र में देखा जाता है। अध्ययन के
प्रमुख शोधकर्ता कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के क्रिस्टीन याफे ने सैन फ्रांसिस्को और अमेरिकन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी के सदस्यों के साथ मिलकर यह शोध किया और फिर यह निष्कर्ष निकाला।
एनीमिया से संबंध क्यों?
शोध में एनीमिया का संबंध डिमेंशिया से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण तथ्य यह बताया गया है कि एनीमिया से शरीर में खून में ऑक्सीजन का स्तर भी कम होता जाता है, जिसकी वजह से ब्रेन तक प्रॉपर सिग्नल्स नहीं पहुंच पाते हैं और यह डिमेंशिया का मुख्य कारण बनता है। ब्रेन में ऑक्सीजन की कमी होने से मेमरी और थिंकिंग एबिलिटी का ह्रास होता है क्योंकि इसकी वजह से न्यूरॉन्स का डैमेज बहुत ज्यादा होता है। यह अध्ययन 'जर्नल ऑफ अमेरिकन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी" में प्रकाशित किया गया है।  

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