अगर आपको बचपन से पियानो या अन्य कोई म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स बजाने का शौक रहा है तो यकीन मानिए इससे आपको फायदा ही हुआ है। इतना ही नहीं यह आपकी बढ़ती उम्र में भी आपके लिए फायदेमंद सिद्ध होगा।एक नए शोध में यह बात सामने आई है कि बचपन में संगीत सीखने से बुढ़ापे में दिमाग और सुनने की क्षमता तेज बनी रहती है। यहां तक कि 40 वर्ष की उम्र पार कर चुके वयस्कों, जिन्होंने बरसों से संगीत उपकरण नहीं बजाया, को भी बचपन में की गई इस मेहनत का लाभ होता है।
क्या कहता है शोध
शोधकर्ताओं का कहना है कि म्यूजिक किसी औषधि से कम नहीं है। यदि आप इसे बचपन में भी ले लें तो यह लॉन्ग लाइफ तक आपका इलाज करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा। इसलिए कहा जाता है कि बचपन में ली गई संगीत की शिक्षा बुढ़ापे तक लाभ देने में मदद करती है।
ब्रेन समझता है स्वर ध्वनियां
इस शोध में यह बात साबित हुई है कि ब्रेन कितनी तेजी से स्वर ध्वनियों को समझता है। हालांकि हम यही समझते हैं कि बहरेपन की शुरुआत कानों से होती है लेकिन मस्तिष्क भी हमें सब चीजें साफ-साफ सुनने में मदद करता है। अगर आवाज बहुत धीमे-धीमे आए तो शोर-शराबे वाली जगह पर उसे सुन पाना काफी मुश्किल होता है।
कैसे किया अध्ययन
अमेरिका के इलिनोइस स्थित नार्थवेस्टन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने 'डा" ध्वनि सुनाने के बाद 44 स्वस्थ विशेषज्ञों के मस्तिष्क का निरीक्षण किया। जितने वर्ष महिलाओं अथवा पुरुषों ने संगीत सीखने में बिताए थे, उतनी ही तेजी से उनके मस्तिष्क की कोशिकाएं और न्यूरॉन ने उस ध्वनि पर प्रतिक्रिया की।
वे लोग जिन्होंने कम से कम पांच वर्ष सं
गीत का अभ्यास किया था, उनका मस्तिष्क उन लोगों के मुकाबले जिन्होंने कभी संगीत नहीं सीखा, उस ध्वनि पर प्रतिक्रिया देने में सेकंड के हजारवें हिस्से जितना तेज था। 'न्यूरोसाइंस जर्नल" में प्रकाशित हुई इस रिपोर्ट में बताया गया कि पियानो व अन्य उपकरणों की अपनी भूमिका होती है।
मस्तिष्क का निवेश देता है लाभ
टेक्सॉस यूनिवर्सिटी के ब्रेन साइंटिस्ट माइकल किलगार्ड का कहना है कि एक मिलीसेकंड तेज होना भले ही बहुत ज्यादा न लगे लेकिन मस्तिष्क समय को लेकर काफी संवेदनशील होता है। और लाखों न्यूरॉन्स के बीच एक मिलीसेकंड तेज होना वयस्कों के जीवन में वास्तविक अंतर पैदा कर सकता है। इस शोध से यह बात साबित होती है कि अपने मस्तिष्क में जो निवेश हम शुरुआती जीवन में करते हैं, उसके लाभ हमें जीवन में बाद में मिलते रहते हैं।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें