बुधवार, 6 नवंबर 2013

मिल गया लंबी उम्र का राज!

वैज्ञानिकों ने लंबी उम्र का राज खोज लिया है। उन्होंने कोल्ड एन्वॉयर्नमेंट्स में रहने वाले केंचुओं की लंबी उम्र के पीछे छुपे जेनेटिक प्रोग्राम की पहचान की है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह मैकेनिज्म इंसान सहित वार्म-ब्लडेड (गरम खून वाले) एनिमल्स में भी काम करता है।
यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन लाइफ साइंस इंस्टीट्यूट के अनुसंधान शॉन झु का कहना है कि इस खोज ने इस बात की संभावना बढ़ा दी है कि कोल्ड एयर के संपर्क में आने अथवा कोल्ड-सेंसिटिव जेनेटिक प्रोग्राम के फार्माकोलॉजिकल स्टीमुलेशन से स्तनपायियों, जिनमें इंसान भी शामिल हैं, की जीने की उम्र को लंबा किया जा सकता है। लगभग एक सदी से अनुसंधानकर्ता इस बात को जानते हैं कि केंचुआ, मछली जैसे कोल्ड-ब्लडेड एनिमल्स कोल्ड एन्वॉयर्नमेंट्स में ज्यादा लंबे जीते हैं लेकिन इसका वास्तविक कारण वे नहीं जान पाए।
यह है कारण
ऐसा माना जाता है कि कोल्ड एन्वॉयर्नमेंट्स में एनिमल्स पेसिव थर्मोडायनेमिक प्रोसेस के कारण लंबे जीते हैं। इसका कारण यह है कि कम तापमान में केमिकल रिएक्शन की दर घट जाती है और इससे शरीर के बूढ़ा होने की गति कम हो जाती है।
लेकिन अब नया फंडा 
शॉन झु के अनुसार लेकिन अब कम से कम केंचुओं में लंबी उम्र की वजह मात्र केमिकल रिएक्शन की दर घटना नहीं है बल्कि एक एक्टिव प्रोसेस है, जो जीन से रेग्युलेट होती है। झु ने पाया कि कोल्ड एयर नर्व में पाए जाने वाली टीआरपीए वन चैनल नाम के रिसेप्टर और नेमाटोड्स में पाई जाने वाली फैट सेल्स एक्टिवेट करती है। रिजल्टिंग चेन ऑफ सिग्नेलिंग अल्टीमेटली लंबी उम्र से जुड़े जीन डीएएफ-16/फोक्सो तक पहुंचती है। जिन केंचुओं में टीआरपीए वन नहीं पाया गया, उनमें कम तापमान पर लंबी उम्र नहीं देखी गई।
कैल्सियम की भी भूमिका
अध्ययन में पहली बार पाया गया कि कैल्सियम लंबी उम्र की ओर संकेत करता है और यह फैट टिश्यू और टेम्प्रेचर रिस्पांस के बीच नॉवेल कनेक्शन बनाता है।
इंसानों पर भी लागू
चूंकि शॉन झु और और सहयोगियों द्वारा पहचाना गया मैकेनिज्म इंसानों समेत अन्य स्तनपायियों में भी पाया गया है इसलिए कम तापमान में इंसानों के अधिक जीने की संभावनाएं प्रबल हैं।
ज्यादा जी सकते हैं...
अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि चूहों जैसे वार्म-ब्लडेड एनिमल्स का बॉडी टेम्प्रेचर अगर कम कर दिया जाए तो उनके जीने की उम्र 20 प्रतिशत तक बढ़ सकती है लेकिन यह इंसानों का बॉडी टेम्प्रेचर कम करना प्रैक्टिकल नहीं होगा। लेकिन इंसानों में एजिंग प्रोसेस के कुछ पहलुओं को स्किन और नेमाटोड्स में पाए जाने वाला फैट टिश्यू में प्रयोग किए जा सकते हैं। यह स्टडी जर्नल सेल में प्रकाशित हुई है। 

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