कहते हैं हैंडराइटिंग व्यक्तित्व का आइना होते हंै। आपकी लिखावट इस बात को आसानी से बता सकती है कि वाकई आप क्या हैं। व्यक्ति के रहन-सहन, आदतें, व्यवहार, विचारधारा एवं जीवन मूल्यों के संबंध में हैंडराइटिंग के जरिए आसानी से जाना जा सकता है। यही वजह है कि आजकल बड़ी-बड़ी कंपनियों में हैंडराइटिंग एक्सपटर््स को रखा जाता है, ताकि एम्प्लाईज् की नियुक्ति ठीक-ठाक तरीके से हो सके।
विशाखापत्तनम् में हैंडराइटिंग एनालिसिस इंडिया के अध्यक्ष मणिकांत का कहना है कि हम किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व के बारे में जानकर यह तय कर सकते हैं कि वह कैसा है। किसी व्यक्ति की लिखावट उसकी पर्सनालिटी और चरित्र के बारे में सब बताती है। वह कैसे लिखता है, कितना दबा-दबाकर लिखता है, अक्षर किस ओर झुके होते हैं, उनका आकार कैसा होता है, हाशिया कितना छोड़ता है, इन सभी से पता चलता है कि उसके व्यक्तित्व की क्या विशेषताएं हैं। उनका कहना है कि ग्रैफोलॉजी 90 से 95 प्रतिशत की एक्युरेसी का दावा करता है।
*सब कुछ जाना जा सकता है :
भले ही लोग इस बात को मजाक समझे मगर यह सच है कि राइटिंग व्यक्ति का कॉन्फिडेंस लेवल, इंसपिरेशनल लेवल सब कुछ आसानी से बता सकती है। यही वजह है कि आजकल ग्रैफोलॉजी की मदद से रिलेशनशिप और वैवाहिक काउंसलिंग भी की जा रही है। केवल इतना ही नहीं बच्चों के विकास और जीवनसाथी को चुनने में भी ग्रैफोलॉजी काफी हद तक मदद करती है।
*इलाज में भी मददगार :
कई प्रसिद्ध ग्रैफोलॉजिस्ट का कहना है कि ग्रैफोथैरेपी विज्ञान का एक नायाब तरीका है। यह लोगों के इलाज में भी मदद कर सकती है। इसकी मदद से व्यक्ति के बारे में जानकर उसके नेगेटिव बिहेवियर को भी सुधारा जा सकता है।
कैसे जाना जा सकता है
* लिखावट में यदि ऊपरी भाग के अक्षरों का आकार छोटा होता है तो व्यक्ति में उत्साह की कमी होती है।
हर किसी के अक्षरों में भिन्नाता
जैसे किन्हीं भी दो लोगों का व्यक्तित्व एक-दूसरे से भिन्ना होता है वैसे ही प्रत्येक व्यक्ति की लिखावट भी एक-दूसरे से भिन्ना होती है। इसलिए इसके जरिए व्यक्ति का नेचर जानने में आसानी होती है। लिखावट में न तो भाषा का कोई महत्व है और न ही शब्दों का। लिखावट की बनावट ही सबकुछ होती है। हर लिखावट में कुछ विशेषता होती है जिसके कारण वह अन्य लिखावटों से भिन्ना दिखाई देती है।
सुधार भी किया जा सकता है
केवल इतना ही नहीं लिखावट में सुधार भी किया जा सकता है। तभी तो छोटे बच्चों को प्रारंभ से ही पाठ नकल करने के लिए कहा जाता है ताकि वे लगातार प्रैक्टिस से अपनी राइटिंग में सुधार करें। राइटिंग के सुधरने का असर व्यक्ति के स्वभाव पर भी आसानी से देखा जा सकता है।
विशाखापत्तनम् में हैंडराइटिंग एनालिसिस इंडिया के अध्यक्ष मणिकांत का कहना है कि हम किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व के बारे में जानकर यह तय कर सकते हैं कि वह कैसा है। किसी व्यक्ति की लिखावट उसकी पर्सनालिटी और चरित्र के बारे में सब बताती है। वह कैसे लिखता है, कितना दबा-दबाकर लिखता है, अक्षर किस ओर झुके होते हैं, उनका आकार कैसा होता है, हाशिया कितना छोड़ता है, इन सभी से पता चलता है कि उसके व्यक्तित्व की क्या विशेषताएं हैं। उनका कहना है कि ग्रैफोलॉजी 90 से 95 प्रतिशत की एक्युरेसी का दावा करता है।
*सब कुछ जाना जा सकता है :
भले ही लोग इस बात को मजाक समझे मगर यह सच है कि राइटिंग व्यक्ति का कॉन्फिडेंस लेवल, इंसपिरेशनल लेवल सब कुछ आसानी से बता सकती है। यही वजह है कि आजकल ग्रैफोलॉजी की मदद से रिलेशनशिप और वैवाहिक काउंसलिंग भी की जा रही है। केवल इतना ही नहीं बच्चों के विकास और जीवनसाथी को चुनने में भी ग्रैफोलॉजी काफी हद तक मदद करती है।
*इलाज में भी मददगार :
कई प्रसिद्ध ग्रैफोलॉजिस्ट का कहना है कि ग्रैफोथैरेपी विज्ञान का एक नायाब तरीका है। यह लोगों के इलाज में भी मदद कर सकती है। इसकी मदद से व्यक्ति के बारे में जानकर उसके नेगेटिव बिहेवियर को भी सुधारा जा सकता है।
कैसे जाना जा सकता है
* लिखावट में यदि ऊपरी भाग के अक्षरों का आकार छोटा होता है तो व्यक्ति में उत्साह की कमी होती है।
- अक्षरों का ऊपर से टूटा हुआ होना बताता है कि व्यक्ति के शरीर के ऊपरी भाग में कोई बड़ी बीमारी अपनी जगह बना रही है
- व्यक्ति की लिखावट का मध्य भाग यदि औसत आकार का है, तो वह व्यक्ति साधारण है और मानसिक रूप से संतुलित है।
- लिखावट में यदि मध्य भाग के अक्षर छोटे-बड़े आकार में लिखे गए हैं, तो यह समझना चाहिए कि उसकी निर्णय लेने की क्षमता ठीक नहीं है।
- लिखावट में अक्षरों का निचला भाग व्यक्ति के प्राकृतिक स्वभाव को बताता है तथा इस बात का भी सूचक है कि वह अपनी निजी जिंदगी में कितनी रूचि लेता है।
- लिखावट में निचले भाग में लिखे गए अक्षर यदि नुकीले हैं तो व्यक्ति के प्राकृतिक स्वभाव में कोई बड़ा अवरोध है।
हर किसी के अक्षरों में भिन्नाता
जैसे किन्हीं भी दो लोगों का व्यक्तित्व एक-दूसरे से भिन्ना होता है वैसे ही प्रत्येक व्यक्ति की लिखावट भी एक-दूसरे से भिन्ना होती है। इसलिए इसके जरिए व्यक्ति का नेचर जानने में आसानी होती है। लिखावट में न तो भाषा का कोई महत्व है और न ही शब्दों का। लिखावट की बनावट ही सबकुछ होती है। हर लिखावट में कुछ विशेषता होती है जिसके कारण वह अन्य लिखावटों से भिन्ना दिखाई देती है।
सुधार भी किया जा सकता है
केवल इतना ही नहीं लिखावट में सुधार भी किया जा सकता है। तभी तो छोटे बच्चों को प्रारंभ से ही पाठ नकल करने के लिए कहा जाता है ताकि वे लगातार प्रैक्टिस से अपनी राइटिंग में सुधार करें। राइटिंग के सुधरने का असर व्यक्ति के स्वभाव पर भी आसानी से देखा जा सकता है।

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