बुधवार, 6 नवंबर 2013

दिन में सपने यानी याददाश्त में इजाफा!

वैसे तो किंवदंती के आधार पर अक्सर घर के बड़े-बुजुर्गों द्वारा कहा जाता है कि दिन में सपने देखने से मामा रास्ता भूल जाते हैं। हालांकि यह बात किस हद तक सच है ये तो नहीं कहा जा सकता। मगर यदि आप भी दिन में कुछ देर के लिए झपकते ही सपनों में खो जाते हैं, तो कोई बात नहीं। वैज्ञानिकों द्वारा किए नए शोध में पाया गया है कि दिन में सपने देखने से याददाश्त मजबूत होती है। जी हां, नए शोध से यह बात सामने आई है कि जो लोग दिन के समय सपने देखते हैं उनकी मेमोरी अन्य लोगों के मुकाबले अच्छी होती है। यह शोध 'जर्नल ऑफ साइकोलॉजिकल साइंस" में प्रकाशित हो चुका है। शोध से पता चला है कि दिन में सपने देखने वालों की एकाग्रता अधिक होती है और उन्हें मल्टीटास्किंग में भी आसानी होती है।
हालांकि इसे एक अलग एंगल से भी लिया गया है क्योंकि अधिकांश कामकाजी लोगों के पास दिन में झपकी लेने का समय नहीं होता। मगर शोधकर्ताओं का कहना है कि यह उन लोगों पर पूरी तरह से लागू होता है, जो  बैठे-बैठे भी सपनों की दुनिया में पहुंच जाते हैं। जी हां, यानी खुली आंखों से सपने देखना। फिर वह सपने भले ही उनके करियर के लक्ष्य को लेकर हों चाहें लाइफ के फ्यूचर के बारे में। मगर इस दौरान उनका मस्तिष्क काफी एक्टिव होता है, जो उनकी याददाश्त को भी मजबूत करने में सहायक सिद्ध होता है।


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