शोधकर्ताओं ने ऑरथ्राइटिस के दर्द से छुटकारा पाने के लिए एक नई जीन थैरेपी तकनीक का विकास करने का दावा गया है। इसमें दावा किया गया है कि इस प्रोटीन जीन को इंजेक्ट करने से जोड़ों के दर्द में राहत मिल सकती है। बेलोर कॉलेज ऑफ मेडिसिन में मॉलिक्यूलर एंड ह्यूमन जेनेटिक्स के प्रोफेसर डॉ. ब्रेंडेन ली के नेतृत्व में किए इस शोध में पाया गया है कि प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले प्रोटीन जिसे लुब्रिसिन या प्रोटिओग्लाइकेन 4 कहते हैं, यह ऑरथ्राइटिस के दर्द को हटाने में मदद कर सकता है । उन्होंने यह भी बताया कि यह प्रोटीन एजिंग के खिलाफ व्यक्ति की रक्षा करने के साथ-साथ पोस्ट-इंज्युरी संबंधित बदलावों में भी मदद करता है। प्रो. ली ने बताया कि यह प्रोटीन कार्टिलेज के मेटाबोलिज्म पर भी प्रभाव डालता है। यही वजह है कि इससे ऑरथ्राइटिस के दर्द से छुटकारा पाने का उपाय मिल गया है।
ली लैबोरेटरी की मैरी जेडसी रुआन ने एक विशेष इमेजिंग तकनीकी विकसित की है। जिसे फेज कॅन्ट्रास्ट अल्ट्रा-हाई रिजोल्यूशन माइक्रो-कम्प्यूटेड टोमोग्राफी (माइक्रो-सीटी कहते हंै। इससे शोधकर्ताओं को न सिर्फ छोटे से छोटे कार्टिलेज को देखने में मदद मिलेगी बल्कि वे इसकी कुल संख्या भी देख लेंगे। फिलहाल चूहों पर किए इस शोध में सफलता मिली है।
ली लैबोरेटरी की मैरी जेडसी रुआन ने एक विशेष इमेजिंग तकनीकी विकसित की है। जिसे फेज कॅन्ट्रास्ट अल्ट्रा-हाई रिजोल्यूशन माइक्रो-कम्प्यूटेड टोमोग्राफी (माइक्रो-सीटी कहते हंै। इससे शोधकर्ताओं को न सिर्फ छोटे से छोटे कार्टिलेज को देखने में मदद मिलेगी बल्कि वे इसकी कुल संख्या भी देख लेंगे। फिलहाल चूहों पर किए इस शोध में सफलता मिली है।

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