मरीज के शरीर की चर्बी से लिए गए स्टेमसेल्स ब्रेन ट्यूमर में कैंसर सेल्स को नष्ट करने में कारगर पाए गए हैं। जॉन हॉकिन्स के शोधकर्ताओं ने हाल ही एक अध्ययन में इसका खुलासा किया है। ब्रेन ट्यूमर के एक प्रकार ग्लीओब्लास्टोमा में शोधकर्ताओं ने यह प्रयोग किया है। पहले सर्जरी द्वारा ट्यूमर को हटा दिया गया, उसके पश्चात उपचार के तौर पर पीड़ित की चर्बी से ही निकाले गए स्टेमसेल्स सीधे ब्रेन में पहुंचाए गए। शोधकर्ताओं के अनुसार मेसेन्चाइमल स्टेमसेल्स (एमएससीएस) कैंसर रोगी में क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को हटाने में असाधारण रूप से कारगर होते हैं। ये ब्रेन में छुपे कैंसर सेल्स तक पहुंचकर उनकी वृद्धि को रोकते हैं। चर्बी से स्टेमसेल्स निकालना अधिक सुगम और सस्ता होता है, अपेक्षाकृत बोनमेरो के। जान हॉकिन्स के इस शोध को जर्नल प्लास वन में ऑनलाइन जारी किया गया है। ब्रेन कैंसर में सबसे बड़ी चुनौती कैंसर सेल्स के माइग्रेशन की होती है। जब सर्जरी द्वारा ब्रेन ट्यूमर को हटाया जाता है तो कुछ कैंसर सेल्स छूट जाते हैं। ये किसी अन्य स्थान पर सक्रिय होकर पुन: ट्यूमर की अवस्था निर्मित कर देते हैं। इस रिसर्च टीम के लीडर हैं जान हॉकिन्स यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के प्रोफेसर अल्फ्रेडो क्विनोन्स हिनोजोसा, जो न्यूरोसर्जरी, आन्कोलाजी और न्यूरोसाइंस विभाग के भी प्रभारी हैं। प्रो.अल्फ्रेडो के अनुसार इस नए शोध से हमें यह राह मिली है कि पेशेंट्स के हेल्दी सेल्स से ही कैंसर सेल्स का पीछा कर उनका खात्मा किया जा सकता है।

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