मंगलवार, 5 नवंबर 2013

कैंसर में कारगर है करेले का ज्यूस

करेला प्राचीनकाल से भारतीय भोजन का एक घटक बना हुआ है। मधुमेह सहित कई रोगों में भी इसे मुफीद माना जाता है। अब कोलाराडो यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन में पता चला है कि यह अग्नाशय (पैनक्रियाज) के कैंसर को ठीक करने में भी कारगर है। कैंसर के एक जर्नल में प्रकाशित शोध के अनुसार करेले का ज्यूस पैनक्रियाज में कैंसर की ग्रोथ को रोक देता है। करेले के ज्यूस से कैंसर की कोशिका की वृद्धि रुक जाती है। तीन वर्ष पहले शोधकर्ताओं ने करेले के ज्यूस का प्रयोग ब्रेस्ट कैंसर कोशिकाओं पर किया था। अब उस अध्ययन को और आगे बढ़ाया है। अध्ययन में कहा गया है कि एशियाई मुल्कों में करेला लोगों के आहार का एक अंग है। इसे बड़े पैमाने पर सब्जी और अन्य रूपों में इस्तेमाल किया जाता है। भारतवंशी डॉ. राजेश अग्रवाल इस अध्ययन दल के उपनेता हैं। स्केग्स स्कूल ऑफ फार्मेसी में प्रोफेसर भी हैं। डॉ.अग्रवाल के अनुसार करेला ग्लुकोज मेटाबालिज्म को प्रभावित कर पैनक्रियाज के कैंसर सेल्स को नष्ट कर देता है। करेले का इस्तेमाल टाइप 2 डायबिटिज के नियंत्रण में भारत व चीन में नानी-दादी के नुस्खों के रूप में वर्षों से किया जा रहा है। इसी आधार पर डॉ.अग्रवाल और उनकी टीम ने कैंसर पर इसके शोध को आगे बढ़ाया। पहले इसका प्रयोग चूहों पर किया गया। जिन चूहों को यह ज्यूस दिया गया, उनमें कैंसर सेल्स के विकास में 60 प्रतिशत तक कमी पाई गई। अर्थात नतीजे उत्साहवर्धक मिले। अब करेले का सत निकालकर कैंसर  की दवा बनाने में इसका प्रयोग किया जाएगा। 

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