सोमवार, 4 नवंबर 2013

रसायन पर निर्भर है सुख-दुख

हमें सुख किससे मिलता है? परिवार से, पैसे से, प्यार से या फिर पेपटाइड से। पहली बार वैज्ञानिकों ने प्रसन्नाता और शरीर के रसायनों से अंतर संबंध जोड़ा है। इस शोध से मनोरोगों के उपचार में चिकित्सकों को काफी मदद मिलेगी।
न्यूरो केमिकल परिवर्तन का मनुष्य की भावनाओं और सामाजिक आचार व्यवहार पर क्या असर पड़ता है, यह अभी तक अज्ञात था। अब कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी लॉस एंजिल्स के वैज्ञानिकों ने पहली बार विशेष पेपटाइड के स्राव को मापा है। जब मनुष्य प्रसन्ना होता है, तो इसका स्राव अत्यधिक बढ़ जाता है और जब मन उदास होता है, तो स्राव घट जाता है।
शोध में कहा गया है कि हाइपोक्रेटिन के बढ़ने पर व्यक्ति का मूड और अलर्टनेस दोनों पर प्रभाव पड़ता है। साइंस डेली के अनुसार इससे अवसाद जैसे रोगों में ब्रेन केमेस्ट्री की असामान्य स्थिति को मापकर मनोचिकित्सकों को उपचार में सहूलियत होगी।
साथ ही अध्ययन में यह भी पता चला है कि मेलेनिन सम्पृक्त हार्मोन का स्राव जाग्रत अवस्था में घट जाता है लेकिन नींद के समय अत्यधिक बढ़ जाता है। इस पेपटाइड की मानव निद्रा में महत्वपूर्ण भूमिका पाई गई है। यह अध्ययन नेचर कम्युनिकेशन के ऑनलाइन एडिशन में प्रकाशित हुआ है। यह शोध नारकोलेप्सी स्लीपीनेस के साथ ही डिप्रेशन पर भी प्रकाश डालता है। साइकेट्री एण्ड स्लीप रिसर्च सेंटर के प्रोफेसर एवं वरिष्ठ लेखक जेरोम साइजेल के अनुसार इस शोध से डिप्रेशन में हाइपोक्रेटिन की कमी के असर का पता चलता है। 

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