एक तस्वीर हजार कहानियां कहती है। लेकिन कहानी तो तभी बनेगी, जब तस्वीर खिंचवाई जाएगी। एक रिसर्च बताती है कि महिलाएं कैमरे के सामने आने से कतराने लगी हैं। सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर भी फोटो अपलोड करने से पहले महिलाएं कई बार सोचती हैं।
कुछ सेलिब्रिटीज सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर कोई भी फोटो अपलोड करने से पहले काफी तैयारी करती हैं। कुछ ऐसा ही हाल आम महिलाओं का हो रहा है, जो कैमरे के सामने जाने से शरमाती हैं। वे अपने बॉडी इमेज को लेकर इतनी आशंकित रहती हैं कि कई यादगार लम्हों को कैद करती हुई तस्वीरों से भी गायब रहती हैं।
इस डिजिटल युग में जहां लोग अध्ािक से अध्ािक खुद को एक्सप्लोर करने में लगे हैं, ऐसे में महिलाओं पर तस्वीरों में अच्छा दिखने का दबाव और ज्यादा बढ़ रहा है। शोध्ा में पाया गया कि दस में से आठ महिलाएं लोगों के बीच बातचीत करने, पहली मुलाकात या इंटरव्यू की तुलना में सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर फोटो अपलोड करने में अध्ािक तनावग्रस्त हो जाती हैं।
एक तिहाई से भी अध्ािक महिलाओं ने माना कि उन्होंने खुद ही अपनी तस्वीर फाड़ डाली, जबकि आध्ाी संख्या ऐसी महिलाओं की थी जिन्होंने ऑनलाइन अपनी फोटो को डी-टैग, डिलीट या रिमूव किया और 41 प्रतिशत महिलाओं ने फोटो अपलोड करने से पहले अपने लुक्स को और बेहतर बनाने के लिए उसे खुद सुध्ाारा भी।
यादगार लम्हों से दूर : 500 महिलाओं पर किए गए इस रिसर्च में पाया गया कि महिलाएं कैसी दिख रही हैं, इसको लेकर वे इतने तनाव में होती हैं कि छुट्टियों, रिश्तेदारों की शादी और यहां तक कि अपने बच्चे के जन्म की तस्वीरों में भी शामिल नहीं होतीं।
कम उम्र में अध्ािक शर्म : कई महिलाओं का मानना था कि वे 11 साल से लेकर 20 साल की उम्र तक कैमरे से अध्ािक शरमाती थीं। लेकिन 55 प्रतिशत ऐसी महिलाएं थीं, जिनका कहना था कि वे दस साल पहले की तुलना में अभी अध्ािक कैमरे से दूर भागती हैं।
सबसे बड़ी आलोचक : यह रिसर्च बताती है कि महिलाएं स्वयं ही अपनी सबसे बड़ी आलोचक होती हैं। कैमरे के सामने उनकी घबराहट ही उन्हें कई महत्वपूणर््ा लम्हों से दूर कर देती है। शोध्ाकर्ताओं का कहना है कि महिलाओं को इस बात का विश्वास दिलाना जरूरी है कि वे अपनी सोच से कहीं अध्ािक खूबसूरत हैं।
कुछ सेलिब्रिटीज सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर कोई भी फोटो अपलोड करने से पहले काफी तैयारी करती हैं। कुछ ऐसा ही हाल आम महिलाओं का हो रहा है, जो कैमरे के सामने जाने से शरमाती हैं। वे अपने बॉडी इमेज को लेकर इतनी आशंकित रहती हैं कि कई यादगार लम्हों को कैद करती हुई तस्वीरों से भी गायब रहती हैं।
इस डिजिटल युग में जहां लोग अध्ािक से अध्ािक खुद को एक्सप्लोर करने में लगे हैं, ऐसे में महिलाओं पर तस्वीरों में अच्छा दिखने का दबाव और ज्यादा बढ़ रहा है। शोध्ा में पाया गया कि दस में से आठ महिलाएं लोगों के बीच बातचीत करने, पहली मुलाकात या इंटरव्यू की तुलना में सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर फोटो अपलोड करने में अध्ािक तनावग्रस्त हो जाती हैं।
एक तिहाई से भी अध्ािक महिलाओं ने माना कि उन्होंने खुद ही अपनी तस्वीर फाड़ डाली, जबकि आध्ाी संख्या ऐसी महिलाओं की थी जिन्होंने ऑनलाइन अपनी फोटो को डी-टैग, डिलीट या रिमूव किया और 41 प्रतिशत महिलाओं ने फोटो अपलोड करने से पहले अपने लुक्स को और बेहतर बनाने के लिए उसे खुद सुध्ाारा भी।
यादगार लम्हों से दूर : 500 महिलाओं पर किए गए इस रिसर्च में पाया गया कि महिलाएं कैसी दिख रही हैं, इसको लेकर वे इतने तनाव में होती हैं कि छुट्टियों, रिश्तेदारों की शादी और यहां तक कि अपने बच्चे के जन्म की तस्वीरों में भी शामिल नहीं होतीं।
कम उम्र में अध्ािक शर्म : कई महिलाओं का मानना था कि वे 11 साल से लेकर 20 साल की उम्र तक कैमरे से अध्ािक शरमाती थीं। लेकिन 55 प्रतिशत ऐसी महिलाएं थीं, जिनका कहना था कि वे दस साल पहले की तुलना में अभी अध्ािक कैमरे से दूर भागती हैं।
सबसे बड़ी आलोचक : यह रिसर्च बताती है कि महिलाएं स्वयं ही अपनी सबसे बड़ी आलोचक होती हैं। कैमरे के सामने उनकी घबराहट ही उन्हें कई महत्वपूणर््ा लम्हों से दूर कर देती है। शोध्ाकर्ताओं का कहना है कि महिलाओं को इस बात का विश्वास दिलाना जरूरी है कि वे अपनी सोच से कहीं अध्ािक खूबसूरत हैं।

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