अचानक पेट दर्द और उल्टी के साथ डायरिया शुरू हो जाए तो समझिए आपको फूड पॉइजनिंग की शिकायत है। जहां बेहतर साफ-सफाई रख आप इससे आसानी से बच सकते हैं, वहीं थोड़ी-सी लापरवाही आपको मुश्किल में डाल सकती है। डालते हैं एक नजर, फूड पॉइजनिंग, उसके लक्षण और उससे बचने के उपायों पर...
फूड पॉइजनिंग क्या है
यदि भोजन करने के बाद सेहत से जुड़ी कोई परेशानी होती है, तो उसे फूड पॉइजनिंग कहते हैं। जब खाद्य पदार्थ बैक्टीरिया या कीटाणुओं के कारण संक्रमित हो जाता है और उस संक्रमित खाने के बाद अपच की समस्या हो जाए तो उससे शुरू होती है फूड पॉइजनिंग की समस्या। डॉक्टर्स के मुताबिक फूड पॉइजनिंग के लक्षण कभी कुछ घंटों में ही दिखने शुरू हो जाते हैं तो कभी एक से दो दिन बाद इसके लक्षण दिखाई देते हैं।
* क्या हैं इसके लक्षण :
फूड पॉइजनिंग के दौरान आपको डायरिया के साथ उल्टी शुरू हो सकती है। इसके अलावा बुखार, सिरदर्द, पेट में मरोड़ें भी हो सकती हंै।
* किस प्रकार की फूड पॉइजनिंग :
अधपके नॉन-वेजिटेरियन फूड या रेडी टू ईट फूड जैसे कुक्ड स्लाइस मीट, सॉफ्ट ची और प्री-पैक्ड सैंडविचेस् भी फूड पॉइजनिंग के लिए जिम्मेदार होते हैं। बाजार में खुले रखे गोल गप्पे या चाट और पकौड़े खाने से भी फूड पॉइजनिंग हो सकती है। इसके अलावा डेयरी प्रोडक्ट्स को फ्रेश नहीं खाया गया तो इनसे भी फूड पॉइजनिंग के चांसेस् बने रहते हैं।
* किन्हें होता है अधिक खतरा :
छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्ग फूड पॉइजनिंग की चपेट में आसानी से आ सकते हैं क्योंकि इनकी इम्यूनिटी थोड़ी कमजोर होती है, इसलिए इन्हें ज्यादा अलर्ट रहने की जरूरत है। इसके अलावा डायबिटीज, कैंसर के मरीजों या कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को भी फूड पॉइजनिंग को लेकर अलर्ट रहना चाहिए।
* इलाज क्या है :
ज्यादातर लोग जिन्हें फूड पॉइजनिंग होता है, वे बिना इलाज के भी ठीक हो जाते हैं। फूड पॉइजनिंग के बाद घरेलू इलाज के तौर पर सबसे पहले शरीर की नमी बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए। इसके लिए हर थोड़ी-थोड़ी देर में इलेक्ट्रॉल या ग्लूकोज पीते रहें। जब तक आप बेहतर महसूस ना करें तब तक आप आसानी से पचने वाला खाना खाएं। बेहतर होगा कि दिनभर में तीन बार अधिक खाने की बजाय दो बार थोड़े-थोड़े अंतराल पर खाएं। डायरिया ठीक होने के तुरंत बाद भी कोई ठोस चीज न खाएं। अगर डायरिया दो दिन से ज्यादा हो गया तो तीसरे दिन ब्लीडिंग की आशंका हो सकती है। दवा के असर ना होने पर भी बिना डॉक्टर से कंसल्ट किए न तो दवा बंद करें ना ही दवा में कोई परिवर्तन करें।
* पकाते समय बरतें सावधानी :
-किसी भी खाने को पकाते वक्त तापमान कम से कम 100 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए।
-पके हुए भोजन को गर्म करते वक्त भी तापमान 63 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा होना चाहिए। इससे नीचे के तापमान का बैक्टीरिया पर कोई असर नहीं होगा।
- कमरे के सामान्य तापमान पर रखे कच्चे या पके खाद्य पदार्थ में बैक्टीरिया तेजी से पनपता है।
- किसी भी फूड को बैक्टीरिया से बचाने के लिए फ्रिज में रखते वक्त फ्रिज का तापमान 8 से 4 डिग्री सेल्सियस या इससे नीचे रखें।
- फूड पॉइजनिंग के बाद अगर उल्टी और डायरिया की समस्या बनी रहे तो घरेलू इलाज आजमाने से बचें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
* असरदार लहसुन :
वाशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी में हाल ही में हुई एक स्टडी के मुताबिक फूड पॉइजनिंग के मुख्य कारकों में शामिल बैक्टीरिया से लड़ने में लहसुन दूसरे अन्य एंटीबायटिक्स की तुलना में 100 गुना अधिक कारगर है।
फूड पॉइजनिंग क्या है
यदि भोजन करने के बाद सेहत से जुड़ी कोई परेशानी होती है, तो उसे फूड पॉइजनिंग कहते हैं। जब खाद्य पदार्थ बैक्टीरिया या कीटाणुओं के कारण संक्रमित हो जाता है और उस संक्रमित खाने के बाद अपच की समस्या हो जाए तो उससे शुरू होती है फूड पॉइजनिंग की समस्या। डॉक्टर्स के मुताबिक फूड पॉइजनिंग के लक्षण कभी कुछ घंटों में ही दिखने शुरू हो जाते हैं तो कभी एक से दो दिन बाद इसके लक्षण दिखाई देते हैं।
* क्या हैं इसके लक्षण :
फूड पॉइजनिंग के दौरान आपको डायरिया के साथ उल्टी शुरू हो सकती है। इसके अलावा बुखार, सिरदर्द, पेट में मरोड़ें भी हो सकती हंै।
* किस प्रकार की फूड पॉइजनिंग :
अधपके नॉन-वेजिटेरियन फूड या रेडी टू ईट फूड जैसे कुक्ड स्लाइस मीट, सॉफ्ट ची और प्री-पैक्ड सैंडविचेस् भी फूड पॉइजनिंग के लिए जिम्मेदार होते हैं। बाजार में खुले रखे गोल गप्पे या चाट और पकौड़े खाने से भी फूड पॉइजनिंग हो सकती है। इसके अलावा डेयरी प्रोडक्ट्स को फ्रेश नहीं खाया गया तो इनसे भी फूड पॉइजनिंग के चांसेस् बने रहते हैं।
* किन्हें होता है अधिक खतरा :
छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्ग फूड पॉइजनिंग की चपेट में आसानी से आ सकते हैं क्योंकि इनकी इम्यूनिटी थोड़ी कमजोर होती है, इसलिए इन्हें ज्यादा अलर्ट रहने की जरूरत है। इसके अलावा डायबिटीज, कैंसर के मरीजों या कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को भी फूड पॉइजनिंग को लेकर अलर्ट रहना चाहिए।
* इलाज क्या है :
ज्यादातर लोग जिन्हें फूड पॉइजनिंग होता है, वे बिना इलाज के भी ठीक हो जाते हैं। फूड पॉइजनिंग के बाद घरेलू इलाज के तौर पर सबसे पहले शरीर की नमी बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए। इसके लिए हर थोड़ी-थोड़ी देर में इलेक्ट्रॉल या ग्लूकोज पीते रहें। जब तक आप बेहतर महसूस ना करें तब तक आप आसानी से पचने वाला खाना खाएं। बेहतर होगा कि दिनभर में तीन बार अधिक खाने की बजाय दो बार थोड़े-थोड़े अंतराल पर खाएं। डायरिया ठीक होने के तुरंत बाद भी कोई ठोस चीज न खाएं। अगर डायरिया दो दिन से ज्यादा हो गया तो तीसरे दिन ब्लीडिंग की आशंका हो सकती है। दवा के असर ना होने पर भी बिना डॉक्टर से कंसल्ट किए न तो दवा बंद करें ना ही दवा में कोई परिवर्तन करें।
* पकाते समय बरतें सावधानी :
-किसी भी खाने को पकाते वक्त तापमान कम से कम 100 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए।
-पके हुए भोजन को गर्म करते वक्त भी तापमान 63 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा होना चाहिए। इससे नीचे के तापमान का बैक्टीरिया पर कोई असर नहीं होगा।
- कमरे के सामान्य तापमान पर रखे कच्चे या पके खाद्य पदार्थ में बैक्टीरिया तेजी से पनपता है।
- किसी भी फूड को बैक्टीरिया से बचाने के लिए फ्रिज में रखते वक्त फ्रिज का तापमान 8 से 4 डिग्री सेल्सियस या इससे नीचे रखें।
- फूड पॉइजनिंग के बाद अगर उल्टी और डायरिया की समस्या बनी रहे तो घरेलू इलाज आजमाने से बचें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
* असरदार लहसुन :
वाशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी में हाल ही में हुई एक स्टडी के मुताबिक फूड पॉइजनिंग के मुख्य कारकों में शामिल बैक्टीरिया से लड़ने में लहसुन दूसरे अन्य एंटीबायटिक्स की तुलना में 100 गुना अधिक कारगर है।

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