संगीत मन को सुकून देता है, सुनने में यह बहुत अच्छा लगता है, तनाव को घटाने में मददगार है लेकिन अब अनुसंधानकर्ताओं ने यह भी पाया है कि संगीत इंसान को बौद्धिक रूप से स्मार्ट भी बनाता है। अनुसंधानकर्ताओं ने अपने अध्ययन में पाया है कि यंग एज में व्यक्ति संगीत का कोई भी इंस्ट्रुमेंट बजाना सीखे तो यह लाइफ में उसे अधिक स्मार्ट बनाने में काफी मददगार होता है। अगर सात साल की उम्र से बच्चे को म्यूजिक क्लास भेजा जाए तो इससे उसकी मोटर स्कील के विकास में चमत्कारिक तेजी आ जाती है। मोटर स्कील आपके ब्रेन का ही एक हिस्सा है जो योजनाएं बनाने और मूवमेंट को आगे बढ़ाने में सहायक होता है। अध्ययन में यह पाया गया है कि छह और आठ साल की उम्र के लर्निंग की स्पेशल विंडो होती है और उस समय म्यूजिक की ट्रेनिंग लेने के मोटर स्कील्स के डेवलपमेंट से सीधे तार जुड़े होते हैं और यह ब्रेन में लंबा बदलाव लेकर आता है।
यह है कारण
मांट्रियल, कनाडा स्थित कान्कोर्डिया यूनिवर्सिटी की प्रमुख अनुसंधानकर्ता वर्जीनिया पेन्हुन का कहना है कि संगीत का कोई भी इंस्ट्रुमेंट सीखने के लिए हाथों के साथ-साथ दिमाग और कानों व आंखों की एकाग्रता की जरूरत पड़ती है। महत्वपूर्ण बात यह है कि यंग एज में अगर संगीत सीखा जाए तो हाथ, दिमाग और कान व आंखों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी होती है। सात साल की उम्र से किसी इंस्ट्रुमेंट की प्रैक्टिस करने से मोटर और ब्रेन के सेंसरी रीजंस के बीच कनेक्शन को परिपक्व बनाने की संभावनाएं अधिक होती हैं। यह एक ऐसा फ्रेमवर्क है, जिस पर ट्रेनिंग को पुख्ता ढंग से लिया जा सकता है।
यह है कारण
मांट्रियल, कनाडा स्थित कान्कोर्डिया यूनिवर्सिटी की प्रमुख अनुसंधानकर्ता वर्जीनिया पेन्हुन का कहना है कि संगीत का कोई भी इंस्ट्रुमेंट सीखने के लिए हाथों के साथ-साथ दिमाग और कानों व आंखों की एकाग्रता की जरूरत पड़ती है। महत्वपूर्ण बात यह है कि यंग एज में अगर संगीत सीखा जाए तो हाथ, दिमाग और कान व आंखों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी होती है। सात साल की उम्र से किसी इंस्ट्रुमेंट की प्रैक्टिस करने से मोटर और ब्रेन के सेंसरी रीजंस के बीच कनेक्शन को परिपक्व बनाने की संभावनाएं अधिक होती हैं। यह एक ऐसा फ्रेमवर्क है, जिस पर ट्रेनिंग को पुख्ता ढंग से लिया जा सकता है।

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