मंगलवार, 5 नवंबर 2013

एचआईवी के इलाज में मददगार होगा मधुमक्खी का विष

वैज्ञानिकों ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए पाया है कि मधुमक्खी में पाए जाने वाले विषयुक्त नैनोकण एचआईवी वायरस को नष्ट कर सकते हैं। इससे आसपास की कोशिकाओं को नुकसान नहीं पहुंचेगा। सेंट लुईस में वाशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसीन के शोधकर्ताओं ने कहा कि यह शोध योनि जेल को विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण  कदम है, जो ह्यूमन इम्यूनोडेफिश्ािएंसी वायरस (एचआईवी) को रोकने में मददगार होगा। इस वायरस के कारण ही एचआईवी फैलता है। शोधकर्ता जोश्ाुआ एल. हुड ने कहा, 'लोग इस जेल का इस्तेमाल प्रारंभिक संक्रमण को रोकने के उपाय के तौर पर कर सकते हैं।" मधुमक्खी के विष में श्ाक्तिशाली विष पाया जाता है जिसे मेलिटीन कहते हैं, यह एचआईवी वायरस के आसपास बनी जटिल जगहों पर छेद करने में सक्षम है। ज्यादा मात्रा में इसका इस्तेमाल खतरनाक हो सकता है। श्ाोध के मुताबिक नैनोकण्ाों में लगे मेलिटीन से सामान्य कोशिकाओं को नुकसान नहीं पहुंचता है। यह वायरस की संरचना के आवश्यक हिस्से पर हमला करते हैं, जबकि ज्यादातर एंटी एचआईवी दवाएं वायरस की क्षमता को बाधित करती हैं। यह शोध एंटीवायरल थैरेपी में प्रकाश्ाित हुआ है। 

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