बुधवार, 6 नवंबर 2013

ये बैक्टीरिया हैं फायदेमंद

बैक्टीरिया का खयाल आते ही दिमाग में बीमारियों के नाम आने लगते हैं। लेकिन सभी बैक्टीरिया सेहत के लिए हानिकारक नहीं होते। कुछ बैक्टीरिया बेहद मददगार भी होते हैं। यह बैक्टीरिया खाना पचाते हैं, विटामिन्स बनाते हैं और शरीर को इन्फेक्श्ान से बचाते हैं। इन सूक्ष्मजीवों को प्रो-बायोटिक कहा जाता है।
फायदे कौन-कौन से
पाचन और पोषण्ा में लाभदायक लैक्टोबेसिलस श्रेण्ाी के प्रो-बायोटिक्स पेट के लिए वरदान हैं। इनके बिना पाचन और पाचन तंत्र अधूरा रहता है। जीवधारियों के श्ारीर में भोजन को श्ारीर में अवश्ाोषित करने और पोषण्ा चक्र की अंतिम कड़ी तक बैक्टीरिया सक्रिय रहते हैं। इसलिए लंबे समय तक एंटीबायोटिक दवा देने के बाद डॉक्टर रोगी को प्रो-बायोटिक लेने की सलाह देते हैं।
झुर्रियां होंगी कम
लैक्टोबेसिली और बाइफिडो बैक्टीरिया श्ारीर में एंटीऑक्सीडेंट की भूमिका निभाते हैं। बुढ़ापे की सबसे प्रमुख वजह है-मुक्त कण्ा, जो तमाम मेटाबॉलिक प्रक्रियाओं, हानिकारक तत्वों और दिनचर्या की वजह से पैदा होते हैं। अच्छे बैक्टीरिया हानिकारक फ्री रेडिकल्स के प्रभाव को कम करने की श्ाक्ति रखते हैं।
एलर्जी कम करने में
ओसाका यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ मेडिसिन के अनुसार नाक और साइनस से संबंधित एलर्जी में प्रो-बायोटिक्स बेहद कारगर होते हैं। लैक्टोबेसिलस कैसेइ, लैक्टोबेसिलस पैराकैसेइ, लैक्टोबेसिलस सिडोफिलस और बायफिडोबैक्टेरियम लोंगम जैसे अच्छे बैक्टीरिया हानिकारक प्रभावों से मुकाबले में मददगार होते हैं।
वायरस से करते मुकाबला
इटली की स्पेंजा यूनिवर्सिटी के श्ाोधकर्ताओं ने प्रो-बॉयोटिक बैक्टीरिया में वायरस के मुकाबले की श्ाक्ति खोज निकाली है। श्ाोध के अनुसार लैक्टोबेसिलस ब्रेवी जैसे बैक्टीरिया हर्पीज जैसे वायरस का मुकाबला करते हैं और श्ारीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर उसे स्वस्थ रखते हैं।
नवजातों के लिए
यदि गर्भवती महिलाओं को प्रो-बायोटिक्स से भरपूर खुराक मिले तो दूध की मात्रा और गुण्ावत्ता दोनों बढ़ सकती है।




कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें