सिगरेट पीने से सेहत को होने वाले नुकसान के बारे में तो सभी को पता है। यह भी पता है कि इससे सिर्फ पीने वाले का ही नुकसान नहीं होता साथ रहने वालों का भी होता है। बावजूद इसके सिगरेट के आशिकों का यह चस्का छूटने का नाम नहीं लेता। दक्षिण कोरिया में किए गए एक ताजा शोध में बताया गया है कि सिगरेट के धुएं का जहरीला असर काफी दूर तलक जाता है। न सिर्फ पीने वाले के निकटवर्ती बल्कि दूर बैठे लोगों के लिए ज्यादा खतरनाक होता है।
क्या कहता है अध्ययन
नए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि सिगरेट पीने वाले के 30 फीट के दायरे में आने वाले लोगों पर भी धुएं का असर हो सकता है।
फेफड़ों का दुश्मन
सड़क पर चलने के दौरान या ऑफिस अथवा घर के दरवाजों को छूने पर सिगरेट नहीं पीने वाले लोग आमतौर पर पैसिव स्मोकिंग के संपर्क में आते हैं। सिगरेट पीने वाले भी इन चीजों को छूते हैं, जिनके संपर्क में आने पर लोगों को धूम्रपान के खतरों से गुजरना पड़ता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति सिगरेट पीने वाले व्यक्ति के आसपास से गुजरता है तो सामान्य के मुकाबले 100 गुना अधिक धुआं उसके फेफड़े में समा जाता है।यही वजह है कि इस समस्या से निपटने के लिए दफ्तरों में सिगरेट पीने पर रोक लगा दी गई है। विशेषज्ञ बताते हैं कि इससे अन्य सार्वजनिक स्थलों पर पैसिव स्मोकिंग की गिरफ्त में आने का खतरा बढ़ जाता है।
ऐसे निकाला निष्कर्ष
दक्षिण कोरिया स्थित सोल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने हवा के प्रति घन मीटर में मौजूद दूषित कणों की जांच की। सिगरेट जलते वक्त व पश्चात हवा में काफी दूषित कण पाए गए। अर्थात सिगरेट पीने वालों द्वारा छोड़ा गया धुआं काफी समय तक वातावरण में रहता है और इसका असर दूसरे व्यक्तियों पर पड़ता है।
अन्य अध्ययन यह कहते हैं
क्या कहता है अध्ययन
नए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि सिगरेट पीने वाले के 30 फीट के दायरे में आने वाले लोगों पर भी धुएं का असर हो सकता है।
फेफड़ों का दुश्मन
सड़क पर चलने के दौरान या ऑफिस अथवा घर के दरवाजों को छूने पर सिगरेट नहीं पीने वाले लोग आमतौर पर पैसिव स्मोकिंग के संपर्क में आते हैं। सिगरेट पीने वाले भी इन चीजों को छूते हैं, जिनके संपर्क में आने पर लोगों को धूम्रपान के खतरों से गुजरना पड़ता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति सिगरेट पीने वाले व्यक्ति के आसपास से गुजरता है तो सामान्य के मुकाबले 100 गुना अधिक धुआं उसके फेफड़े में समा जाता है।यही वजह है कि इस समस्या से निपटने के लिए दफ्तरों में सिगरेट पीने पर रोक लगा दी गई है। विशेषज्ञ बताते हैं कि इससे अन्य सार्वजनिक स्थलों पर पैसिव स्मोकिंग की गिरफ्त में आने का खतरा बढ़ जाता है।
ऐसे निकाला निष्कर्ष
दक्षिण कोरिया स्थित सोल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने हवा के प्रति घन मीटर में मौजूद दूषित कणों की जांच की। सिगरेट जलते वक्त व पश्चात हवा में काफी दूषित कण पाए गए। अर्थात सिगरेट पीने वालों द्वारा छोड़ा गया धुआं काफी समय तक वातावरण में रहता है और इसका असर दूसरे व्यक्तियों पर पड़ता है।
अन्य अध्ययन यह कहते हैं
- न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन में 12 से 19 साल के 1500 किशोरों पर अध्ययन में पाया गया कि सिगरेट के धुएं की जद में आए किशोरों में उंचा सुनने का खतरा अन्य लोगों के मुकाबले दोगुना होता है। अध्ययन कहता है कि सिगरेट का धुआं शरीर के उन हिस्सों में खून की आपूर्ति को प्रभावित करता है, जिससे व्यक्ति के लिए भाषा समझ पाना मुश्किल हो जाता है।
- धूम्रपान का असर दिल और फेफड़ों पर ही नहीं बल्कि किडनी पर भी पड़ता है। एक नया अध्ययन कहता है कि धूम्रपान न करने वाले पुरुषों की तुलना में धूम्रपान करने वाले पुरुषों के गुर्दों की कार्यक्षमता में एक तिहाई कमी आती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि सिगरेट का धुआं शरीर के अंदर रक्त प्रवाह पर बुरा असर डालता है। इसका सीधा असर किडनी के काम करने की क्षमता पर पड़ता है। स्मोकिंग से आर्टरीज सख्त हो जाती हैं और ब्लड वेसल्स भी संकुचित हो जाती हैं, जिससे किडनी के ब्लड सर्क्युलेशन में रूकावट पैदा होती है और उसके कार्य करने की क्षमता पर बुरा असर पड़ता है।

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