मोटापे के कारण पनपने वाले कई रोगों जैसे डायबिटीज और हृदय रोग के बारे में अधिकांश लोगों को ही पता है। लेकिन इसके बावजूद कभी-कभी मोटापे पर ध्यान नहीं दिया जाता है। मगर नया अध्ययन बताता है कि मोटापा सिर्फ इतना ही नुकसान नहीं करता बल्कि यह सुनने की क्षमता को भी प्रभावित करता है। विशेषकर यह खतरा महिलाओं को ज्यादा होता है। वहीं दूसरी ओर महिलाओं में मोटापा ब्रेस्ट कैंसर का कारण भी बनता है। हाल ही में हुए शोध से पता चला है कि मोटापे से महिलाओं की सुनने की क्षमता भी कम होती है जबकि व्यायाम से यह खतरा काफी कम होता है। शोध में पाया गया कि हाई बीएमआई (बॉडी मास इंडेक्स) और ज्यादा वजन, सुनने की क्षमता कम होने से जुड़ा हुआ है। वैज्ञानिकों ने अध्ययन में यह भी पाया कि यदि महिलाएं शारीरिक व्यायाम करती हैं तो इससे कानों की क्षमता प्रभावित होने का खतरा कम रहता है।
बर्मिंघम एंड विमन्स हॉस्पिटल की प्रमुख शोधकर्ता शेरोन कुरहन ने बताया कि आमतौर पर हम यह सोचते हैं कि सुनने की क्षमता कम होना, उम्र के साथ होने वाली समस्या है। उन्होंने कहा कि अब शोध से यह स्पष्ट हुआ है कि शरीर का ज्यादा वजन और शारीरिक व्यायाम न करना कानों की सुनने की शक्ति पर असर डालता है। अगर महिलाएं अपनी फिटनेस पर ध्यान दें तो उन्हें बहरेपन की समस्या से बचने में मदद मिल सकती है।
खतरा है 17 प्रतिशत अधिक
शोध के दौरान वर्ष 1998 से 2009 तक के 68, 421 महिलाओं की मेडिकल हिस्ट्री पर अध्ययन किया गया है। शोधकर्ताओं ने पाया कि 30 से 34 बीएमआई वाली महिलाओं को बहरेपन का खतरा 17 प्रतिशत अधिक होता है जबकि 40 से अधिक बीएमआई वाली महिलाओं को यह रिस्क 25 प्रतिशत अधिक होता है।
दो घंटे की सैर फायदेमंद
शोधकर्ताओं ने यह भी माना कि हफ्ते में दो घंटे भी सैर करें तो महिलाओं में बहरेपन की रिस्क को 15 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। यह शोध 'अमेरिकन जर्नल ऑफ मेडिसिन" में प्रकाशित हुआ है।
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