घुटने की बढ़ती तकलीफ के मद्देनजर नी रिप्लेसमेंट सर्जरी कई लोगों के लिए शानदार विकल्प बनकर उभरी है। इस सर्जरी ने न केवल कई सारे लोगों को फिर से अपने पैरों पर खड़े होने की ताकत दी है बल्कि लोग दिनचर्या में होने वाली कठिनाई और दर्द से भी निजात पा सके हैं। मगर इसका एक पहलू और भी हैं। पिछले दिनों एक अध्ययन से यह साबित हुआ है कि इस सर्जरी के बाद कई लोगों का वजन बढ़ जाता है और इसकी वजह रोगी खुद ही होता है।
अध्ययन का कहना है कि असल में सर्जरी के पहले रोगी काफी हद तक दर्द की आदत बना चुका होता है। साथ ही वह रोजमर्रा के कामों और गतिविधियों में भी खुद को काफी नियंत्रित कर चुका होता है। ऐसे में सर्जरी के बाद जब उसे दर्द में राहत मिल जाती है और वह आराम से चल-फिर सकने की हालत में होता है, तब भी वह खुद को इस नियंत्रण से बहुत ज्यादा बरी नहीं कर पाता और ना ही अपनी पुरानी आदतों को बदलता है। नतीजा जहां वह नियमित एक्सरसाइज करके फिट रह सकता है लेकिन वह ऐसा नहीं करता और उसके वजन में वृद्धि होने लगती है। इसलिए डॉक्टर्स नी रिप्लेसमेंट सर्जरी के बाद कई सारे व्यायाम बताते हैं, जिनका पालन मरीज अस्पताल तक तो करता है लेकिन घर आकर उन्हें भूल जाता है। इस वजह से सर्जरी के बाद चार-पांच सालांे के भीतर ही मरीज अपना वजन बढ़ा लेता है और उसके हृदय रोग, डायबिटीज जैसी बीमारियों से ग्रस्त होने या इन बीमारियों से होने वाले खतरों की आशंका बढ़ जाती है। साथ ही वह फिर से चलने-फिरने में मुश्किल और दर्द भी महसूस कर सकता है। यह सर्जरी घुटनों के जवाब दे जाने पर अपनाए जा सकने वाले सबसे अच्छे विकल्पों में से एक हो सकती है, बशर्ते आप खुद इसका पूरा फायदा उठाना जानते हों।
अध्ययन का कहना है कि असल में सर्जरी के पहले रोगी काफी हद तक दर्द की आदत बना चुका होता है। साथ ही वह रोजमर्रा के कामों और गतिविधियों में भी खुद को काफी नियंत्रित कर चुका होता है। ऐसे में सर्जरी के बाद जब उसे दर्द में राहत मिल जाती है और वह आराम से चल-फिर सकने की हालत में होता है, तब भी वह खुद को इस नियंत्रण से बहुत ज्यादा बरी नहीं कर पाता और ना ही अपनी पुरानी आदतों को बदलता है। नतीजा जहां वह नियमित एक्सरसाइज करके फिट रह सकता है लेकिन वह ऐसा नहीं करता और उसके वजन में वृद्धि होने लगती है। इसलिए डॉक्टर्स नी रिप्लेसमेंट सर्जरी के बाद कई सारे व्यायाम बताते हैं, जिनका पालन मरीज अस्पताल तक तो करता है लेकिन घर आकर उन्हें भूल जाता है। इस वजह से सर्जरी के बाद चार-पांच सालांे के भीतर ही मरीज अपना वजन बढ़ा लेता है और उसके हृदय रोग, डायबिटीज जैसी बीमारियों से ग्रस्त होने या इन बीमारियों से होने वाले खतरों की आशंका बढ़ जाती है। साथ ही वह फिर से चलने-फिरने में मुश्किल और दर्द भी महसूस कर सकता है। यह सर्जरी घुटनों के जवाब दे जाने पर अपनाए जा सकने वाले सबसे अच्छे विकल्पों में से एक हो सकती है, बशर्ते आप खुद इसका पूरा फायदा उठाना जानते हों।
achhi jankari di aapne ...shukriya ji
जवाब देंहटाएंWelcome Upasna Ji
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