मंगलवार, 4 फ़रवरी 2014

चेहरे पर छह नहीं महज चार भाव ही आते हैं

लंदन, प्रेट्र : आम धारण्ाा के विपरीत मनुष्य के चेहरे पर छह नहीं महज चार भाव ही आते हैं। हालिया श्ाोध के तहत यह दावा किया गया है। अब तक समझ्ाा जाता रहा है कि मनुष्य अपने चेहरे की भाव भंगिमाओं के जरिए खुश्ाी, दुख, भय, गुस्सा, आश्चर्य और अप्रसन्न्ता के भावों को प्रकट कर सकता है।
डॉक्टर पॉल एक्समन के मुताबिक, दुनियाभर में समान रूप से पहचाने जाने वाले छह तरह के भाव हैं, जिन्हें चेहरे की कुछ खास भाव भंगिमाओं के जरिए पेश्ा किया जाता है। इन पर धर्म, भाषा और संस्कृति का प्रभाव नहीं पड़ता। जबकि यूनिवर्सिटी ऑफ ग्लासगो ने इस सूची को छह से घ्ाटा कर चार कर दिया है। श्ाोधकर्ताओं ने भय और आश्चर्य के भावों को एक साथ मिलाने का फैसला किया है क्योंकि इन दोनों ही भावों में आंखें फैल जाती हैं। वहीं गुस्से और अप्रसन्न्ता के भावों में नाक सिकुड़ जाती है और इस पर झ्ाुर्रियां आ जाती हैं।
यह अपनी तरह का पहला अध्ययन है जिसमें विभिन्न् हरकतों और भावों के प्रदशर््ान के दौरान चेहरे की विभिन्न् मांसपेश्ाियों का अध्ययन किया गया। इसके लिए एक अनोखे जनरेटिव फेस ग्र्रामर प्लेटफॉर्म की मदद ली गई। श्ाोधकर्ताओं के मुताबिक, खुश्ाी और गम के समय चेहरे पर आने वाले भाव एक दूसरे से बिल्कुल अलग होते हैं। जबकि भय और आश्चर्य, गुस्से और अप्रसन्न्ता के भाव बिल्कुल एक जैसे ही होते हैं। जनरेटिव फेस ग्र्रामर प्लेटफार्म के तहत विभिन्न् भाव भंगिमाओं में चेहरे की थ्रीडी फोटो ली जाती है और उसका अध्ययन किया जाता है। यह श्ाोध जर्नल करंट बायोलॉजी में प्रकाश्ाित हुआ है। 

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