लंदन, प्रेट्र : भविष्य में भेड़ या इससे भी बड़े आकार के चूहे पृथ्वी पर घूम सकते है। इन्हें बड़े स्तनपायियों के लुप्त होने का लाभ मिलेगा। इन चूहों का वजन 50 से 80 किग्र्रा तक हो सकता है। हाल ही में श्ाोधकर्ताओं ने यह अनुमान लगाया है।
ब्रिटेन की लीसेस्टर यूनिवर्सिटी के श्ाोधकर्ताओं के मुताबिक, ईको स्पेस (पारिस्थितिकीय क्षेत्र) में बदलाव के कारण्ा चूहों का आकार लगातार बढ़ता चला जाएगा। बड़े स्तनपायियों के लुप्त होने से इनकी संख्या बड़ी तेजी से बढ़ेगी। यूनिवर्सिटी में भू-विज्ञान विभाग के डॉक्टर जान जालाविक के मुताबिक, लोगों को अपने आस पास चूहे देखने की आदत हो चुकी है। भविष्य में इनका वैश्विक प्रभाव बढ़ेगा। इस समय तक चूहों का आकार भेड़ या इससे भी बड़ा हो सकता है।
जालाविक ने कहा, 'चूहे अपने आस पास के माहौल के हिसाब से आसानी से ढल जाते हैं। ये दुनियाभर के ज्यादातर द्वीपों पर पाए जाते हैं। ये ऐसे द्वीपों पर भी फैल गए हैं जहां ये पहले नहीं थे। चूहों ने अन्य प्रजातियों के जानवरों की संख्या को भी कम कर दिया है। इससे ईकोस्पेस में उनके लिए स्थान बढ़ता जा रहा है। इससे निकट भविष्य में उनका आकार बड़ी तेजी से बढ़ सकता है।
ब्रिटेन की लीसेस्टर यूनिवर्सिटी के श्ाोधकर्ताओं के मुताबिक, ईको स्पेस (पारिस्थितिकीय क्षेत्र) में बदलाव के कारण्ा चूहों का आकार लगातार बढ़ता चला जाएगा। बड़े स्तनपायियों के लुप्त होने से इनकी संख्या बड़ी तेजी से बढ़ेगी। यूनिवर्सिटी में भू-विज्ञान विभाग के डॉक्टर जान जालाविक के मुताबिक, लोगों को अपने आस पास चूहे देखने की आदत हो चुकी है। भविष्य में इनका वैश्विक प्रभाव बढ़ेगा। इस समय तक चूहों का आकार भेड़ या इससे भी बड़ा हो सकता है।
जालाविक ने कहा, 'चूहे अपने आस पास के माहौल के हिसाब से आसानी से ढल जाते हैं। ये दुनियाभर के ज्यादातर द्वीपों पर पाए जाते हैं। ये ऐसे द्वीपों पर भी फैल गए हैं जहां ये पहले नहीं थे। चूहों ने अन्य प्रजातियों के जानवरों की संख्या को भी कम कर दिया है। इससे ईकोस्पेस में उनके लिए स्थान बढ़ता जा रहा है। इससे निकट भविष्य में उनका आकार बड़ी तेजी से बढ़ सकता है।
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