गर्भ निरोधक दवाओं का नियमित रूप से सेवन महिलाओं की सेहत के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के शोध का दावा है कि जो महिलाएं नियमित तौर पर इन दवाओं का सेवन करती हैं, उनमें ब्रेस्ट कैंसर का खतरा ज्यादा होता है। शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन के आधार पर दावा किया है कि जो महिलाएं नियमित तौर पर गर्भ निरोधक दवाएं लेती हैं उन्हें दूसरों की अपेक्षा ब्रेस्ट कैंसर का खतरा 9.5 गुना अधिक होता है। शोध के अनुसार महिलाओं में बढ़ते ब्रेस्ट कैंसर के मामलों के पीछे गर्भ निरोधक गोलियों के अलावा, जल्दी मासिक चक्र का शुरू होना, देर से शादियां और कम समय तक ब्रेस्ट फीडिंग जैसे कारण भी माने गए हैं। शोध के दौरान 640 महिलाओं का परीक्षण किया गया, जिसमें 320 महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर की मरीज हैं। शोधकर्ता डॉ. उमेश कपिल के अनुसार शोध में हमने पाया कि लंबे समय तक गर्भ निरोधक गोलियों के सेवन से महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा सबसे अधिक बढ़ा, जो 11.0 प्रतिशत है। उनका मानना है कि इन दवाओं में मौजूद एस्ट्रोजन व प्रोजेस्टेरॉन को लंबे समय तक लेने से शरीर में हार्मोनल असंतुलन होता है जिसकी वजह से ब्रेस्ट कैंसर की आशंका बढ़ जाती है।
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