सर्दियों की गुनगुनी धूप में बैठना किसे अच्छा नहीं लगता होगा। कड़ाके की सर्दी में थोड़ी-सी भी धूप के आते ही मन बेहद सुकून पाता है। उस प्राकृतिक गर्मी से ठंड तो एक ही पल में भाग जाती है। केवल यही नहीं धूप को विटामिन 'डी" का सबसे उत्तम स्रोत माना जाता है। धूप में उचित समय बिताने से न सिर्फ हमारी हड्डियां मजबूत होती हैं बल्कि हम भी पूरी तरह से स्वस्थ रहते हैं। प्रकृति की इस देन को जादू कहना गलत न होगा क्योंकि सूर्य की रश्मियों से मिलने वाली ऊर्जा लोगों को ऊर्जावान बनाती है। पेड़-पौधे, खेत-खलिहान, जीव-जंतु सबके जीवन के लिए यह बेहद जरूरी है।
धूप से शरीर को कई सारे पोषक तत्व मिलते हैं इसमें कोई दो राय नहीं है। मगर हाल ही में किए ताजा अध्ययन में शोधकर्ताओं ने धूप और मानसिक स्वास्थ्य के संबंधों को जानने की कोशिश की है। जिसमें उन्होंने धूप के इंसानी दिमाग पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में बताया है। शोधकर्ताओं के अनुसार सर्दियों में ली गई धूप मानसिक रोगों से बचाव करती है। सर्दियों में सूरज की रोशनी से कई मानसिक रोगों का खतरा कम हो जाता है। लेकिन अधिकतर लोगों के लिए इस धूप का आनंद और लाभ लेना मुमकिन ही नहीं हो पाता। वे धूप निकलने से पहले ही दफ्तर चले जाते हैं और फिर शाम को भी धूप ढलने के बाद ही दफ्तर से निकल पाते हैं।
*सैड से पीड़ित होने का खतरा :
शोधकर्ताओं के मुताबिक इस कारण लोग धूप के संपर्क में नहीं आ पाते और उनको मानसिक रोग होने का खतरा बढ़ जाता है। शोधकर्ताओं ने इस डिस्ऑर्डर को 'सीजनल अफेक्टिव डिस्ऑर्डर" (सैड) नाम दिया है। सैड नामक इस डिस्ऑर्डर की वजह से लोगों को बैचेनी और डिप्रेशन जैसी समस्याओं से दो-चार होना पड़ रहा है।
*2000 वयस्कों से बातचीत :
शोधकर्ताओं ने एक सर्वे के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला। इस सर्वे में तकरीबन 2000 वयस्कों से बातचीत की और उनसे पूछा गया कि पूरे दिन में वह कितनी बार सूरज की रोशनी में आ पाते हैं। इनमें से अधिकांश लोगों ने बताया कि उन्हें ऑफिस के चलते सारा दिन धूप नसीब नहीं होती।
यही वजह है आज के युवाओं में विटामिन 'डी" की डेफिशिएन्सी ज्यादा देखी जा रही है। ऑफिसों में पूरे समय एयर कंडीशनर में बैठे रहने के कारण प्राकृतिक माहौल से कर्मचारी वैसे ही दूर हो जाते हैं। ऊपर से आज का खानपान उन्हें कई तरह की समस्याओं से ग्रस्त कर रहा है।
*थोड़ा समय निकालें :
शोधकर्ताओं का कहना है कि भले ही पूरा दिन काम की व्यस्तता में चला जाए लेकिन पूरे दिन में 10 से 15 मिनट धूप में बैठना शरीर को ऊर्जावान बनाने के लिए जरूरी है। ऐसा करते हुए हम अपनी रोग-प्रतिरोधक क्षमता आसानी से बढ़ा सकते हैं और स्वस्थ रह सकते हैं।
धूप से शरीर को कई सारे पोषक तत्व मिलते हैं इसमें कोई दो राय नहीं है। मगर हाल ही में किए ताजा अध्ययन में शोधकर्ताओं ने धूप और मानसिक स्वास्थ्य के संबंधों को जानने की कोशिश की है। जिसमें उन्होंने धूप के इंसानी दिमाग पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में बताया है। शोधकर्ताओं के अनुसार सर्दियों में ली गई धूप मानसिक रोगों से बचाव करती है। सर्दियों में सूरज की रोशनी से कई मानसिक रोगों का खतरा कम हो जाता है। लेकिन अधिकतर लोगों के लिए इस धूप का आनंद और लाभ लेना मुमकिन ही नहीं हो पाता। वे धूप निकलने से पहले ही दफ्तर चले जाते हैं और फिर शाम को भी धूप ढलने के बाद ही दफ्तर से निकल पाते हैं।
*सैड से पीड़ित होने का खतरा :
शोधकर्ताओं के मुताबिक इस कारण लोग धूप के संपर्क में नहीं आ पाते और उनको मानसिक रोग होने का खतरा बढ़ जाता है। शोधकर्ताओं ने इस डिस्ऑर्डर को 'सीजनल अफेक्टिव डिस्ऑर्डर" (सैड) नाम दिया है। सैड नामक इस डिस्ऑर्डर की वजह से लोगों को बैचेनी और डिप्रेशन जैसी समस्याओं से दो-चार होना पड़ रहा है।
*2000 वयस्कों से बातचीत :
शोधकर्ताओं ने एक सर्वे के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला। इस सर्वे में तकरीबन 2000 वयस्कों से बातचीत की और उनसे पूछा गया कि पूरे दिन में वह कितनी बार सूरज की रोशनी में आ पाते हैं। इनमें से अधिकांश लोगों ने बताया कि उन्हें ऑफिस के चलते सारा दिन धूप नसीब नहीं होती।
यही वजह है आज के युवाओं में विटामिन 'डी" की डेफिशिएन्सी ज्यादा देखी जा रही है। ऑफिसों में पूरे समय एयर कंडीशनर में बैठे रहने के कारण प्राकृतिक माहौल से कर्मचारी वैसे ही दूर हो जाते हैं। ऊपर से आज का खानपान उन्हें कई तरह की समस्याओं से ग्रस्त कर रहा है।
*थोड़ा समय निकालें :
शोधकर्ताओं का कहना है कि भले ही पूरा दिन काम की व्यस्तता में चला जाए लेकिन पूरे दिन में 10 से 15 मिनट धूप में बैठना शरीर को ऊर्जावान बनाने के लिए जरूरी है। ऐसा करते हुए हम अपनी रोग-प्रतिरोधक क्षमता आसानी से बढ़ा सकते हैं और स्वस्थ रह सकते हैं।
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