सोमवार, 20 जनवरी 2014

आंखों से नींद चुरा लेता है वाई-फाई

डेनमार्क की स्कूली छात्राओं के दल ने एक हैरतअंगेज वैज्ञानिक तथ्य का खुलासा किया है। इन्होंने अपने साधारण वैज्ञानिक प्रयोग के जरिए यह साबित किया है कि वाई-फाई उपकरण इंसान की सेहत पर बुरा असर डालते हैं। इससे निकलने वाली रेडियो तरंगों से नींद तक उचट जाती है। डेनमार्क के हेलर्प स्कूल की इन छात्राओं का कहना है कि सोते समय मोबाइल फोन पास रखने से उन्हें पूरे दिन क्लास में ध्यान केंद्रित करने में परेशानी हुई। कुछ छात्राओं की तो नींद भी बाधित हुई।
*पौधों पर किया प्रयोग :
छात्राओं ने यह प्रयोग पौधों पर भी किया। उन्होंने वायरलैस रूटर का इस्तेमाल किया, जिनसे मोबाइल जैसी ही रेडियो तरंगें निकलती हैं। छात्राओं ने वाई-फाई रूटर के बगल में रखकर जब पौधे उगाने की कोशिश की तो अधिकतर बीज मर गए। इसके लिए उन्होंने कमरे में छह पौधों की ट्रे रखी, जहां वाई-फाई रूटर या मोबाइल नहीं था। वहीं दूसरे कमरे में वाई-फाई रूटर के साथ पौधों की छह ट्रे रखीं। देखा कि 12 दिनों में वाई-फाई रूटर के कमरे में रखे गए पौधे के बीज मर गए जबकि दूसरे कमरे के बीज अंकुरित हो गए थे।
इससे पहले अध्ययन में यह कहा गया था कि वायरलेस रेडियो सिग्नल के पास उगे पेड़ों के पत्ते सूख जाते हैं। यहां यह बात ध्यान देने वाली है कि एक वर्ष तक वाई-फाई रूटर के नजदीक रहने पर कोई व्यक्ति उतनी ही रेडियो तरंगें झेलता है, जितना 20 मिनट के फोन कॉल से निकलती हैं। इसके अलावा वाई-फाई रूटर से घर में इस्तेमाल होने वाले माइक्रोवेव के मुकाबले एक लाख गुना हानिकारक तरंगें निकलती हैं।
*ये सावधानियां भी बरतें :
वायरलेस रेडियो तरंगें कुछ दूरी के बाद खत्म हो जाती हैं। वाई-फाई तरंगों के प्रभाव से बचने के लिए लैपटॉप को मेज पर रखकर काम करना बेहतर होगा न कि गोद में। इसके अलावा रूटर से तीन फुट की दूरी भी अच्छी रहेगी।  

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