शनिवार, 20 अप्रैल 2013

ये हैं जिताऊ उम्मीदवार (व्यंग्य)


धर्मेंद्र सिंह राजावत
अपने सहयोगी दलों के मुखिया मुलायम और माया के बयानों से आखिर मैडम डर ही गईं और उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं को 2014 का इंतजार करने के बजाय तैयारी में जुट जाने का संदेश सुना दिया। इसके साथ ही उन्होंने अपने रणनीतिकारों के साथ बैठक भी की। भ्रष्टाचार के लिए अभी तक की सबसे कुख्यात रही सरकार की अगुवाकार ने बैठक में सभी को ऐसे पैमानों की लिस्ट तैयार करने को कहा, जिस पर खरे उतरने वाले को ही चुनाव में टिकट दिया जाए। मतलब, जिताऊ उम्मीदवार।
अहमद जी ने उम्मीदवार की कई खूबियों के साथ उसके भ्रष्टाचारी होने की खूबी को खासी तवज्जो दी। इसके साथ ही तर्क दिया कि 'आप" जैसों से निपटने के लिए ये काबिलीयत काफी जरूरी है। द्विवेदीजी ने अन्ना के आंदोलन रूपी ज्वारभाटा (जो कभी भी फट सकता है।) की याद दिलाकर खूसखोर को अपनी लिस्ट में सबसे ऊपर रखा। समिति के अन्य सदस्यों ने भी अपने-अपने तर्कों के साथ पैमाने पेश किए।
मैडम ने सभी की लिस्ट देखकर कहा, ' नहीं-नहीं। यह सब नहीं चलेगा। देश की जनता का रुख समझो। अपनी सरकार की वैसे ही काफी बदनामी हो चुकी है। मैं इस बार कोई रिश्क नहीं लेना चाहती। दिग्गी आप ही बताओ क्या सही रहेगा?"
दिग्गी, 'मैडम ! लिस्ट क्या बनाना। जिताऊ उम्मीदवार की क्या खूबियां होनी चाहिए यह हमें भी मालूम है और आपको भी। दूसरी बात, पीएम बाबा बनेंगे तो फिर आप क्यों इतनी चिंतित हो रही हैं। हम उनके साथ मिलकर काबिल उम्मीदवारों की लिस्ट तैयार कर लेंगे। इस बार मुकाबला बड़ा है। सरकार बनाना दूसरी बात, पहले प्राथमिकता तो नमो को नाक रगड़वानी है। इसलिए हम सभी सोच-विचार कर ही निर्णय लेंगे"
दिग्गी राजा ने कुछ दिनों बाद बाबा से मुलाकात की और उम्मीदवारों की लिस्ट के बारे में बात कही।
बाबा, 'ठीक है, किस तरह के उम्मीदवार जीत सकते हैं, इस बारे में तय हो जाना चाहिए। मैं किसी तरह का रिश्क नहीं लेना चाहता। वैसे भी इस बार सभी ने बच्चे का मुकाबला महावली से करवा दिया है।"
दिग्गी, 'जीत उसी की होती है, जोकि साम-दाम-दंड-भेद सब आजमाता है। इसलिए टिकट का पैमाना सोच-समझ कर तय होना चाहिए। मेरी व्यक्तिगत राय मानें तो भ्रष्टाचारी, क्रिमनल, मौका परस्त और चरित्रहीन से अच्छे उम्मीदवार नहीं हो सकते हैं।"
दिग्गी की बात सुन बाबा भड़क गए।
बाबा, 'नहीं, नहीं। यह सब अब किसी भी हाल में नहीं चलेगा। वैसे ही कुछ कम बदनामी हो चुकी है सरकार की। टू-जी और कोयला से लेकर खेल तक कुछ बाकी रहा, जो अब  आप रही-सही कसर पूरी करने की तैयारी करवा रहे हो। "
दिग्गी, 'सोच लो। मैं तो कहता हूं कि जो मैं कह रहा हूं वही सही है। फिर आपकी मर्जी।"
बाबा, 'इस बार देश के हालात कुछ और हैं। ऐसे में जोखिम लेना ठीक नहीं है।"
दिग्गी, 'इसीलिए तो कहता रहा हूं। अच्छा! आप ही बताइए? क्या ईमानदारी से कोई उम्मीदवार अपनी सीट जीत सकता है? नहीं न। इसीलिए कह रहा हूं सोच-समझकर निर्णय लो। भावनाओं में मत बहो।"
बाबा, 'अच्छा ठीक है, मगर यह तो बताओ की जब देश में भ्रष्टाचार मुक्त और ईमानदार सरकार की मांग जोरों पर है तो आपके भ्रष्ट, क्रिमनल और चरित्रहीन उम्मीदवार को कोई क्यों वोट देगा?"
बाबा के सवाल पर दिग्गी अपनी हंसी नहीं रोक पाए और फिर मजाकिया अंदाज में बोले, 'इसीलिए सभी आपको राजनीति का बच्चा कहते हैं।"
बाबा ने दिग्गी की ठिठोली पर नाखुसी जाहिर की। दिग्गी भी समझ गए और ज्यादा मजाक नहीं करने में ही अपनी भलाई समझी।
बाबा, 'हां! तो बताओ कैसे जितवाओगे चुनाव और कैसे बनवाओगे सरकार?"
दिग्गी, 'भ्रष्टाचारी और क्रिमनल होने का फायदा हमे चुनाव के दौरान मिलेगा, मगर मौका परस्त होने का फायदा सरकार चलाने के वक्त। हां! चरित्रहीन होने का उम्मीदवार का अपना फायदा है, मगर वक्त-बेवक्त जरूरत पड़ने पर आपको और हमें भी फायदा पहुंचा सकता है।
बाबा, 'क्या लोग भ्रष्टाचारी और क्रिमनल को चुनेंगे?"
दिग्गी, 'बिल्कुल। भ्रष्टाचारी और क्रिमनल को ही चुनेंगे।"
बाबा, 'कैसे। "
दिग्गी, 'व्यक्ति यदि भ्रष्टाचारी होगा तो निश्चित ही उसने जमकर धन कमाया होगा। चुनाव में सबसे बड़ी जरूरत धन की ही होती है। धन होगा तो मतदाताओं को शराब बांटी जा सकती है। जरूरत पड़ने पर नोट भी बांटे जा सकते हैं। अधिकारी, कर्मचारी, मुखिया और विपक्षी नेता खरीदे जा सकते हैं। क्या यह सभी ईमानदार कर सकता है। नहीं न।"
बाबा ने दिग्गी की बात को खामोश रह कर स्वीकृति दे तो दिग्गी ने बाकी पैमानों की खासीयत बतानी शुरू कर दी।
दिग्गी, 'यदि भ्रष्टाचारी व्यक्ति क्रिमनल होगा तो उसका चुनाव जीतना और आसान हो जाएगा। दरअसल, क्रिमनल व्यक्ति के खिलाफ बहुत कम लोग वोट करने का साहस करेंगे। दूसरा, जब बात बूथ कैप्चरिंग की आएगी तो वह सबसे आगे होगा। साफ-सुधरी छवि के उम्मीदवार में यह सब करने की हिम्मत नहीं होती है।"
बाबा, 'मौका परस्त उम्मीदवार हमारे किस काम का? वह तो हमेशा ही अपनी फिराक में रहेगा?"
दिग्गी, 'माना की वह अपनी फिराक में रहेगा, मगर हम तो उसकी इस फिदरत का फायदा उठाएंगे?"
बाबा, 'कैसे?"
दिग्गी, 'आरे भाई! हमारी सरकार पूर्ण बहुमत में होगी, इसकी संभावना कम ही है न। जब मिली-जुली सरकार बनेगी तो सभी दल अपने-अपने हित साधेंगे। मौका मिलते ही पाला और पैंतरा बदलेंगे। ऐसे में वही उम्मीदवार हमारे काम आएंगे। वह अपनी फितरत से यह आसानी से बता सकेंगे कि कौन सा दल क्या पैंतरा चलने वाला है। फिर हम उससे समय रहते डील कर सकते हैं। हालांकि, चरित्रहीन का क्या फायदा है, यह मैं पहले ही आपको बता चुका हूं, फिर भी आप कहें तो मैं फिर से बताऊं, क्योंकि इस कैटेगिरी के उम्मीदवार आपके लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकते हैं। खासकर, जब तक आप शादी नहीं करते।"
बाबा ने इसका कोई जवाब नहीं दिया, मगर बाकी के पैमानों पर अपनी सहमति देकर उम्मीदवारों की लिस्ट तैयार करने के लिए कह दिया। हां, अफसोस जरूर जाहिर किया। यह कह कर कि मैं फालतू में ही गरीबों के घर भटकता रहा। कहीं झोपड़ी में भोजन किया तो कहीं मजदूरी। मैं वाकई बच्चा हूं।
सहमति मिलते ही दिग्गी ने अपना काम शुरू कर दिया है। हां! आपमें यदि उक्त खूबि
यां हों तो दिग्गी राजा से संपर्क कर टिकट पा सकते हो। लेकिन, जल्दी करें, मौका सीमित समय के लिए है।  

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