धर्मेंद्र सिंह राजावत
विपक्ष सहित केजरीवाल के हमलों से परेशान मैडम ने कुछ दिनों पहले मंत्रियों की बैठक बुलाई। इसमें उन्होंने सभी से एक ही सवाल किया।
'भ्रष्टाचार और घोटालों से तो जनता को कोई खास सरोकार नहीं है, पर यह बताओ महंगाई और भुखमरी के मुद्दे पर उसको क्या जवाब दिया जाए?"
सभी मंत्री बगलें झांकने लगे। किसी को कोई जवाब ही नहीं सूझ रहा था।
ऐसे में हर बार की तरह इस बार भी संकट मोचन मनमोहन सिंह ने मोर्चा संभाला।
उन्होंने कहा, 'मैडम हम जनता को जवाब भी देंगे और अपनों की जेब भी भरेंगे।"
सिंह की बात सुन मैडम चौक गईं। बहुत ही आश्चर्य चकित होकर बोलीं। आरे! ऐसा कैसे हो सकता है?
सिंह बोले, 'जरूरी नहीं, जिसने कभी नुकसान पहुंचाया हो वह कभी भी अपने काम नहीं आएगा।"
मैडल बोलीं, 'मन तुम पहेलियां मत बुझाओ। सीधे सीधे बताओ जनता को क्या और कैसे जवाब दिया जाए।"
सिंह बोले, 'राजू को बुलाओ और उससे कहो कि देश में जिनते भी गरीब या भुखमरे दिखें उनको कपिल के ड्रीम प्रोजेक्ट से एक-एक टैबलेट दे दे। हां ! साथ में डेटा कार्ड जरूर दे, जिससे कि वह फेसबुक पर अपना अकाउंट खोल सकें।"
मैडम बोली, 'मन, मैं गंभीर मुद्दे पर बात कर रही हूं और तुम्हें मजाक सूझ रहा है। भुखमरी से टैबलेट का क्या संबंध।"
सिंह बोल, संबंध है मैडम। बहुत गहरा संबंध"
मैडम, कैसे?
सिंह, 'जब उसे फेसबुक का चस्का लगेगा तो वह भूख-प्यास सब भूल जाएगा। और जब उसे भूल लगेगी ही नहीं तो भुखमरी कहां से आएगी। दूसरा, जब लोग खाना ही नहीं खाएंगे तो खाद्य पदार्थों की कीमतें तो नीचे आएंगी ही। ऐसे महंगाई को भी अपन निपटा देंगे। फेसबुक ने हम-आपको बहुत जख्म दिए हैं, पर अब वह नमक का हक अदा करने को तैयार है।"
मैडम बोलीं, 'मन, यह बात तो आपने सौ टके की कही है। बड़े छुपे रुस्तम हैं आप। सच मैंने आपको ऐसे ही नहीं चुना।"
मैंडम ने फिर सवाल दागा, 'मगर यह तो बता कि इससे अपनों की जेबें कैसे भरेंगी?"
सिंह बोले, 'अरे, मैडम। आप समझी नहीं। अच्छा मुझे ये बताइए, क्या राजू अपने घर से टैबलेट देगा, नहीं न। सरकार खरीदकर देगी। और जब सरकार खरीदेगी तो जेब भरने का एक मौका और मिलेगा न।
मैडम मुस्कराईं और बोली, 'मन आप मेरे मन को ऐसे ही नहीं भाते।"
सिंह फिर बोले, 'मैडम मैं इसका एक और फायदा बताना तो भूल ही गया।"
मैडम ने पूछा, 'क्या?"
सिंह बोले, 'इससे अपनी इंटरनेशनल इमेज भी बेहतर होगी।"
मैंडम ने फिर सवाल किया, 'कैसे?"
सिंह बोले, 'हम इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर फक्र से कह सकेंगे कि हमारे देश में आईटी ने जबरदस्त तरक्की की है। हमारे यहां भिखारी ही नहीं भुखमरी के करार पर पहुंचने वाले व्यक्ति के पास भी टैबलेट है। चुनाव के समय देश में भी लोगों से कह सकेंगे कि अन्य दल तो लैपटॉप या कंप्यूटर देने का सिर्फ वादा करते हैं, पर हम ने सभी टैबलेट बांटे हैं।
विपक्ष सहित केजरीवाल के हमलों से परेशान मैडम ने कुछ दिनों पहले मंत्रियों की बैठक बुलाई। इसमें उन्होंने सभी से एक ही सवाल किया।
'भ्रष्टाचार और घोटालों से तो जनता को कोई खास सरोकार नहीं है, पर यह बताओ महंगाई और भुखमरी के मुद्दे पर उसको क्या जवाब दिया जाए?"
सभी मंत्री बगलें झांकने लगे। किसी को कोई जवाब ही नहीं सूझ रहा था।
ऐसे में हर बार की तरह इस बार भी संकट मोचन मनमोहन सिंह ने मोर्चा संभाला।
उन्होंने कहा, 'मैडम हम जनता को जवाब भी देंगे और अपनों की जेब भी भरेंगे।"
सिंह की बात सुन मैडम चौक गईं। बहुत ही आश्चर्य चकित होकर बोलीं। आरे! ऐसा कैसे हो सकता है?
सिंह बोले, 'जरूरी नहीं, जिसने कभी नुकसान पहुंचाया हो वह कभी भी अपने काम नहीं आएगा।"
मैडल बोलीं, 'मन तुम पहेलियां मत बुझाओ। सीधे सीधे बताओ जनता को क्या और कैसे जवाब दिया जाए।"
सिंह बोले, 'राजू को बुलाओ और उससे कहो कि देश में जिनते भी गरीब या भुखमरे दिखें उनको कपिल के ड्रीम प्रोजेक्ट से एक-एक टैबलेट दे दे। हां ! साथ में डेटा कार्ड जरूर दे, जिससे कि वह फेसबुक पर अपना अकाउंट खोल सकें।"
मैडम बोली, 'मन, मैं गंभीर मुद्दे पर बात कर रही हूं और तुम्हें मजाक सूझ रहा है। भुखमरी से टैबलेट का क्या संबंध।"
सिंह बोल, संबंध है मैडम। बहुत गहरा संबंध"
मैडम, कैसे?
सिंह, 'जब उसे फेसबुक का चस्का लगेगा तो वह भूख-प्यास सब भूल जाएगा। और जब उसे भूल लगेगी ही नहीं तो भुखमरी कहां से आएगी। दूसरा, जब लोग खाना ही नहीं खाएंगे तो खाद्य पदार्थों की कीमतें तो नीचे आएंगी ही। ऐसे महंगाई को भी अपन निपटा देंगे। फेसबुक ने हम-आपको बहुत जख्म दिए हैं, पर अब वह नमक का हक अदा करने को तैयार है।"
मैडम बोलीं, 'मन, यह बात तो आपने सौ टके की कही है। बड़े छुपे रुस्तम हैं आप। सच मैंने आपको ऐसे ही नहीं चुना।"
मैंडम ने फिर सवाल दागा, 'मगर यह तो बता कि इससे अपनों की जेबें कैसे भरेंगी?"
सिंह बोले, 'अरे, मैडम। आप समझी नहीं। अच्छा मुझे ये बताइए, क्या राजू अपने घर से टैबलेट देगा, नहीं न। सरकार खरीदकर देगी। और जब सरकार खरीदेगी तो जेब भरने का एक मौका और मिलेगा न।
मैडम मुस्कराईं और बोली, 'मन आप मेरे मन को ऐसे ही नहीं भाते।"
सिंह फिर बोले, 'मैडम मैं इसका एक और फायदा बताना तो भूल ही गया।"
मैडम ने पूछा, 'क्या?"
सिंह बोले, 'इससे अपनी इंटरनेशनल इमेज भी बेहतर होगी।"
मैंडम ने फिर सवाल किया, 'कैसे?"
सिंह बोले, 'हम इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर फक्र से कह सकेंगे कि हमारे देश में आईटी ने जबरदस्त तरक्की की है। हमारे यहां भिखारी ही नहीं भुखमरी के करार पर पहुंचने वाले व्यक्ति के पास भी टैबलेट है। चुनाव के समय देश में भी लोगों से कह सकेंगे कि अन्य दल तो लैपटॉप या कंप्यूटर देने का सिर्फ वादा करते हैं, पर हम ने सभी टैबलेट बांटे हैं।

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