शुक्रवार, 3 मई 2013

क्रिकेट और जिस्म (व्यंग्य)


 धर्मेंद्र सिंह राजावत
पाजी अपने कुछ पंजाबी साथियों के साथ पब में जाम छलका रहे थे। इसी बीच किसी ने क्रिकेट का किस्सा शुरू कर दिया। किस्सा सुन पाजी परेशान हो गए। ऐसा लगा माने पाजी की दुखती हुई रग पर किसी ने हाथ रख दिया हो।
'देख भाई गुरबीर ! मुझे इस बात का मलाल नहीं कि मेरी आईसीएल पिट गई, मगर मुझे इस बात का बहुत अफसोस है कि, जो आईपीएल हिट हुई उसने क्रिकेट को शर्मसार कर दिया। उफ ! ये जिस्म। इसकी नुमाइश कर कितनी फूहड़ता फैलाई जा रही है। अब लोग अच्छे शॉट का नहीं बल्कि सिक्स या फोर लगने के बाद विदेशी गर्ल्स जो हिप हिलातीं हैं, उनको देखने का इंतजार करते हैं। शॉट लगते ही टीवी पर भी कैमरा हिप पर ही फोकस हो जाता है। मुझे तो यकीन ही नहीं होता कि मैं भी कभी इसी क्रिकेट का हिस्सा रहा हूं।" पाजी ने बहुत गमगीन होकर कहा
'पाजी ! परेशान होने की जरूरत नहीं है। मेरे पास एक आइडिया है। आप चिंता न करें। न फूहड़ता रहेगी और न फूहड़ता दिखाने वाले।" गुरबीर ने पाजी के कंधे पर हाथ रख दिलासा देते हुए कहा
गुरबीर का इतना कहना था कि पाजी का सारा नशा चूर हो गया। गिलास टेबल पर रखा और गुरबीर को दोनों हाथों से पकड़ लिया। उसका चेहरा देखते हुए सवालों की झड़ी लगा दी।
'क्या कहा गुरबीर? क्या मैं सही सुन रहा हूं? सच बता? तू नशे में तो यह सब नहीं कह रहा है?"
'नहीं पाजी। मैं सच कह रहा हूं।" गुरबीर ने जवाब दिया
'अच्छा बता कैसे करेगा यह सब?" पाजी ने फिर सवाल किया
'हम स्टेडियम में लड़कियों को नचाने के बजाय यहां मैच देखने आने वाले दर्शकों के साथ ही घर, दफ्तर और दुकान में टीवी पर मैच देखने वालों को एक ऑफर देंगे।"
गुरबीर की इतनी बात सुनते ही पाजी ने उत्सुकता पूर्वक फिर सवाल किया।
'कैसा ऑफर?"
गुरबीर, ' दो दिन और तीन रातें बैंकॉक में बिताने का।"
पाजी, ' मैं समझा नहीं। यह क्या है?"
गुरबीर, ' अरे पाजी ! जिन दर्शकों को विदेशी लड़कियों के साथ ही देशी कलेंडर क्वीन को देखने की आदत पड़ गई हो, उनकी यह आदत छुड़वाना कोई आसान काम तो नहीं है। आप क्या समझते हैं, कलेंडर क्वीन ऐसे ही कपड़े उतारती फिर रही थी। वर्ल्ड कप के फाइनल में भीड़ जुटाने के लिए आयोजकों ने ही यह सब कराया था। यही वजह है कि फाइनल मैच देखने के लिए नहीं बल्कि लोग उस पल के दीदार के लिए पहुंचे थे, जब क्वीन अपने हुश्न की पिच पर सभी को बोल्ड कर दे। अब सभी को पता है कि किसी भी चीज की मार्केटिंग कैसे की जाती है। बस एक आप ही हैं, जो नहीं समझते। हम तो ऐसा फॉर्मूला बता रहे हैं, जिससे फूहड़ता भी खत्म हो जाएगी और दर्शकों का दिल भी टूटने के बजाय खुश हो जाएगा। बाकी आपकी मर्जी। और हां, इस सबसे हमें एक्स्ट्रा इनकम होगी सो अलग।"
पाजी, 'देख भाई गुरबीर ! तेरी बातें मेरी समझ से बाहर हैं। तू क्या कह रहा है या क्या करना चाहता है? मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है।"
'लोग बैंकॉक क्यों जाते हैं? यह तो पता है? या फिर मैं यह भी बताऊं?" गुरबीर ने कुछ गुस्सा होते हुए सवाल किया
' हां ! पता है, मगर बहुत ज्यादा नहीं जानता हूं, क्योंकि मैं कभी गया नहीं। अलबत्ता, लोगों से सुना है कि वहां लोग मजे करने के लिए जाते हैं।" पाजी ने कुछ संकोच करते हुए जवाब दिया
'यही मजा तो क्रिकेट से फूहड़ता को खत्म करेगा और अपनी क्रिकेट लीग को सफल बनाएगा।" यह कहते समय गुरबीर के चेहरे पर एक अजब-सी मुस्कान थी
'सही कह रहा है गुरबीर!  मैंने तो कभी सोचा भी नहीं था कि क्रिकेट से कभी फूहड़ता खत्म भी की जा सकती है, मगर तेरे दिमाग की तो माननी पड़ेगी। अच्छा ! यह तो बता कि इससे अपनी एक्स्ट्रा इनकम कैसे होगी?" पाजी ने फिर सवाल किया
गुरबीर, 'जब ऑफर के बारे में लोगों को पता चलेगा तो क्रिकेट प्रेमी ही नहीं और भी कई लोग क्रिकेट के मुरीद हो जाएंगे। स्टेडियम में लोगों को जगह तो मिलेगी नहीं, घरों में भी टीवी सेट की संख्या बढ़ जाना तय है। मतलब साफ है, स्टेडिटम की टिकट के साथ ही टीवी की बिक्री बढ़ेगी। जब बिक्री बढ़ेगी तो हमारा कमीशन भी बढ़ेगा। दूसरा, जब सारा प्लान अपना होगा तो जो विजेता बैंकॉक जाएंगे, उनको किस ट्रैवल एजेंसी से भेजना है यह भी तो हम ही तय करेंगे न की लीग के प्रयोजक। और जब हम तय करेंगे तो कमीशन भी हमें ही मिलेगा न की प्रयोजकों को।"
' वाह ! गुरबीर वाह ! वाकई कमाल का आइडिया है। मैच से फूहड़ता खत्म कर तू मेरे मन को तसल्ली और मेरी लीग की सफलता से मुझे फिर ख्याति दिलाएगा। कमाई करवाएगा सो अलग। और हां, आईपीएल की सफलता ने इतने सालों से मुझे जो पीड़ा दी है, वह जब विदेशी लड़कियों के हिप की तरह ही जब हिलेगी तो और मजा आएगा। इसी खुशी में दो-दो पैक और हो जाएं।' पाजी सभी से आग्रह करते हैं ।
'चिअर्स....." सभी जाम-से-जाम टकराते हैं और फिर पीने में
मशगूल जाते हैं।
अरे भाई अब आप किस सोच में पड़ गए हैं। आप भी दो पैक लगाइए और बैंकॉक की सैर करके आइए।


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