गुरुवार, 21 मार्च 2013

घटनाएं जो सवाल खड़े करतीं हैं

धर्मेंद्र सिंह राजावत

पीएम पर भ्रष्टाचार का आरोप
सिंचाई, चारा, टू-जी स्पेक्ट्रम, विकलांग और कॉमनवेल्थ गेम्स के साथ ही न
जाने कितने घोटाले के आरोप नेताओं पर लगे हैं, मगर पिछले दिनों जब
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर कोयला घोटाले की कालिख उड़ेली गई तो सारा देश
स्तब्ध रह गया। अब सभी के मन में एक ही सवाल बार-बार उभर रहा है कि आखिर
देश की परवाह किसे है। कौन देश का भला सोच रहा है।
दिल्ली गैंग रेप
देश की राजधानी में चलती बस में एक युवती के साथ जो हुआ, वह सोचने पर
मजबूर कर रहा है कि हम किस तरह के गणतंत्र में जी रहे हैं। इसके बावजूद
सरकार ने आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। हालांकि, वर्मा कमेटी ने काफी

सख्त सिफारिशें कीं हैं, मगर वह प्रभावी हो पाएंगी यह वक्त बताएगा।
जवानों का सिर कलम
पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की सेना हमारे जवानों के सिर कलम कर ले जाती है और
देश के प्रधानमंत्री उस पर प्रतिक्रिया देने में कई दिन गुजार देते हैं।
इसके बाद चेतावनी देते हैं, पर कार्रवाई नहीं करते। अलबत्ता, पाकिस्तान
संघर्ष विराम का बदस्तूर उल्लंघन कर गोलीबारी करता रहता है।
शिंदे ने फोड़ा बयान का बम
पाक सैनिकों द्वारा भारतीय सैनिकों की नृशंस हत्या से जब देश के लोग रोष
में थे, तभी देश के गृहमंत्री ने हिंदू आतंकवाद पर बयान देकर नया बखेड़ा
खड़ा कर दिया। उनके बयान से देश को लाभ हुआ या नहीं मगर सरहद पार बैठे
मुंबई हमले के आरोपी ने इसका जरूर फायदा उठाया। सुशील कुमार शिंदे के
बयान के सहारे उसने हिंदुस्तान को ही आंदकवाद का पोषक करार दे दिया।
लाखों का घोटाला नहीं करते
विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद की पत्नी के एनजीओ के घोटाले का जब पिछले
दिनों खुलासा हुआ तो केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा ने यह कहकर सनसनी
फैला दी कि इतने बड़े नेता लाखों का घोटाला नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि
बात करोडों की होती तो मानता। हालांकि, बाद में उन्होंने अपने बयान के
लिए मांफी मांग ली।
मेरे पास जादू की छड़ी नहीं
कांग्रेस ने सत्ता में आने के लिए लोगों से वादा किया था कि वह महंगाई पर
काबू पाएगी, मगर वह ऐसा कर न सकी। महंगाई जब बेकाबू हुई तो लोगों ने
प्रधानमंत्री से कुछ समय पहले इस बाबत सवाल किया। उन्होंने महंगाई को
काबू करने के बजाय बेबसी जाहिर करते हुए कहा कि मेरे पास कोई जादू की छड़ी
नहीं है।
जंग: जनरल बनाम सरकार
उम्र को लेकर सेना के जनरल रहे वीके सिंह और सरकार के बीच ऐसे विवाद हुआ,
जैसे स्कूल के दो बच्चों में झगड़ा हो रहा हो। इस मामले में जो कुछ हुआ,
वह काफी शर्मसार करने वाला था। सरकार के लिए भी और सिंह के लिए भी।
अण्णा का आंदोलन
जनलोकपाल को लेकर राजधाानी में अनशन करने वाले अण्णा हजारे को आखिर इसकी
जरूरत क्यों पड़ी। उनके आह्वान पर आखिर लाखों लोग क्यों सड़कों पर पड़े रहे।
इस सवाल पर सरकार शायद अब भी विचार नहीं कर रही।

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